गौतम बुद्ध का जीवन परिचय, यहां 15 लाइनों में जानें
गौतम बुद्ध, बौद्ध धर्म के संस्थापक, विचारक और समाज सुधारक थे। उन्होंने आज से करीब 2600 वर्ष पहले दुनिया को अहिंसा, मानवता, शांति और करुणा का रास्ता दिखाया।
गौतम बुद्ध को भगवान बुद्ध भी कहा जाता है, जिन्होंने आज से करीब 2600 वर्ष पहले दुनिया को अहिंसा, करुणा, शांति और मानवता का रास्ता दिखाया। उन्हें लोग एशिया का ‘ज्योति पुंज’ के नाम से भी जानते हैं, जिन्होंने अपनी शिक्षाओं के माध्यम से बड़े स्तर पर सामाजिक सुधार किये। इस लेख में हम उनके बारे में सिर्फ 15 लाइनों में समझेंगे।
गौतम बुद्ध का जीवन परिचय
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-गौतम बुद्ध का बचपन का नाम ‘सिद्धार्थ’ था। उनका जन्म 563 ईसा पूर्व में नेपाल में स्थित लुंबिनी में एक शाही परिवार में हुआ था।
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-बुद्ध शाक्य वंश के राजा शुद्धोधन के पुत्र थे। उनकी माता का नाम महामाया था।
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-बुद्ध का विवाह 16 वर्ष की आयु में एक सुंदर राजकुमारी यशोधरा से हुआ था। उनके पुत्र का नाम ‘राहुल’ था।
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-एक दिन उन्होंने घूमने के दौरान शहर में एक बूढ़े व्यक्ति, एक बीमार व्यक्ति, एक मृत शरीर और एक संन्यासी को देखा, जिससे उन मन परिवर्तन हुआ।
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-बुद्ध ने सच को ढूंढने के लिए सिर्फ 30 साल की उम्र में ही अपने परिवार और राजपाठ का त्याग कर दिया था।
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-घर से निकलने के बाद उन्होंने 6 वर्षों तक कठिन तपस्या की, जिसके बाद उन्हें बिहार के बोधगया में एक पीपल के पेड़ के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई।
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-ज्ञान प्राप्ति के बाद ही बुद्ध का नाम सिद्धार्थ से ‘गौतम बुद्ध’ हो गया। इसका अर्थ जागृत व्यक्ति से है।
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-गौतम बुद्ध ने अपना पहला उपदेश उत्तर प्रदेश के सारनाथ में अपने पांच शिष्यों को दिया था। इसे धर्मचक्रप्रवर्तन कहते हैं।
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-बुद्ध ने चार सत्यों को बताया, जिसमें दुख, दुख का कारण, दुख का निवारण और निवारण का मार्ग शामिल है।
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-बुद्ध ने दुखों से मुक्ति के लिए आठ कड़ियों वाला एक रास्ता बताया था, जिसे अष्टांगिक मार्ग कहते हैं।
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-बुद्ध ने शरीर को न ही अधिक कष्ट देने और न ही अधिक विलासिता में जीने की सलाह दी। उन्होंने मध्यम मार्ग अपनाने की शिक्षा दी थी।
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-उन्होंने समाज में फैली जाति-प्रथा और छुआछूत के पक्ष नहीं लिया। साथ ही, पशु बलि की भी मनाही की और धार्मिक कर्मकांडों का विरोध किया।
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-बुद्ध ने अपने विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए बौद्ध संघ की स्थापना की, जिसमें पुरुष और महिलाएं शामिल हो सकती थीं।
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-बुद्ध ने 80 वर्ष की आयु में यूपी के कुशीनगर में प्राण त्यागे, जिसे महापरिनिर्वाण कहा गया।
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-बुद्ध की शिक्षाएं अहिंसा और शांति पर आधारित थी। ऐसे में उनकी शिक्षा का प्रचार भारत के साथ-साथ चीन, जापान, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया में हुआ और आज उनके बड़ी संख्या में अनुयायी हैं।
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