विदेशी नागरिकों पर नहीं लागू होते हैं भारत के ये मौलिक अधिकार, देखें लिस्ट
भारतीय संविधान में नागरिकों के लिए मौलिक अधिकार दिए गए हैं। हालांकि, इनमें से कुछ मौलिक अधिकार ऐसे हैं, जो कि विदेशियों पर लागू नहीं होते हैं। इस लेख में हम इस बारे में विस्तार से जानेंगे।
भारतीय संविधान दुनिया का सबसे बड़ा संविधान है, जो कि 2 साल 11 महीने और 18 दिनों में बनकर तैयार हुआ था। इस कड़ी में संविधान निर्माताओं ने यह सुनिश्चित किया था कि कुछ मौलिक अधिकार सभी नागिरकों को मिले, फिर चाहे वह देशी हो या विदेशी नागरिक हो। वहीं, कुछ मूल अधिकारों को सिर्फ भारत के नागरिकों के लिए आरक्षित रखा गया था। इस लेख में हम उन मूल अधिकारों के बारे में जानेंगे, जो कि विदेशी नागरिकों पर लागू नहीं होते हैं।
संविधान के ये मूल अधिकार विदेशी नागरिकों पर नहीं होते हैं लागू
भारतीय संविधान के तहत अनुच्छेद 15, 16, 29 और 30 के मूल अधिकार ऐसे हैं, जो कि विदेशी नागरिकों पर लागू नहीं होते हैं। इस बारे में हम विस्तार से जानेंगे।
अनुच्छेद 15
यह मूल अधिकार सुनिश्चित करता है कि राज्य द्वारा किसी भी नागरिक के खिलाफ उसकी जाति, धर्म, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही सार्वजनिक रेस्तरां, होटल और दुकानों समेत मनोरंजन के स्थानों पर प्रवेश पर भी रोक नहीं लगाई जा सकती है। ऐसे में राज्य सुरक्षा और वीजा नियमों के तहत कुछ प्रतिबंधित और सीमावर्ती क्षेत्रों में विदेशियों के प्रवेश प्रतिबंध लग सकता है।
अनुच्छेद 16
इस मूल अधिकार में भारत के सभी नागरिकों को सरकारी नौकरियों में समान अवसर मिलने की बात कही गई है। किसी भी नागरिक को उसकी जाति या धर्म के आधार पर अयोग्य नहीं माना जा सकता है। ऐसे में विदेशियों को भारतीय प्रशासन या पुलिस का हिस्सा बनने का अनुमति नहीं है। क्योंकि, कोई भी संप्रभु देश ऐसा नहीं करेगा।
अनुच्छेद 19
यह अनुच्छेद नागरिकों को 6 तरह की आजादी देता है
-बोलने और अभिव्यक्त करने की आजादी
-शांतिपूर्ण ढंग से बिना हथियारों के एकत्र होने की आजादी
-संघ या यूनियन बनाने की आजादी
-भारत में कहीं भी घूमने की आजादी
-भारत में कहीं भी बसने या रहने की आजादी
-कोई भी व्यापार करने या पेशा अपनाने की आजादी
भारत में विदेशियों का प्रवास वीजा के आधार पर होता है। ऐसे में उन्हें कहीं भी बसने की आजादी नहीं दी जा सकती है। साथ ही, विदेशियों को भारत के लिए कुछ भी बोलने की आजादी नहीं दी जा सकती है।
अनुच्छेद 29
इस मूल अधिकार के तहत भारत के नागरिक अपनी विशिष्ट भाषा, लिपि या संस्कृति को संरक्षित कर सकते हैं। यह अधिकार यहां के मूल भाषाई और धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए है, न कि विदेशी संस्कृतियों को बढ़ावा देने के लिए, ऐसे में यह विदेशी नागरिकों पर लागू नहीं होता है।
अनुच्छेद 30
इस मूल अधिकार में भाषाई या धार्मिक अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शिक्षण संस्थान को स्थापित करने के साथ उन्हें चलाने का अधिकार देता है। वहीं, विदेशियों को भारत में अपने शिक्षण संस्थान खोलकर उन्हें अपने हिसाब से चलाने का अधिकार नहीं दिया जा सकता है। उन्हें कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है।
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