उत्तर प्रदेश का पहला हिंदी अखबार, 181 साल पुराना है इतिहास
उत्तर प्रदेश का पहला हिंदी अखबार भारतीय पत्रकारिता के जगत में मील का पत्थर साबित हुआ था। यह एक हिंदी साप्ताहिक अखबार था, जो कि वाराणसी से निकलता था।
वर्तमान में उत्तर प्रदेश में कई बड़े हिंदी अखाबर हैं, जो कि हिंदी पत्रकारिकता के क्षेत्र के मजबूत स्तंभ कहे जाते हैं। इस कड़ी में उत्तर प्रदेश की धरती से निकलने वाला पहला हिंदी अखबार ऐसा था, जो कि हिंदी पत्रकारिता के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हुआ था। इस अखबार की शुरुआत वाराणसी से की गई थी। इस अखबार को भारत का पहला प्रांतीय हिंदी अखबार भी माना जाता है। इस लेख में हम इस बारे में विस्तार से जानेंगे।
उत्तर प्रदेश का पहला हिंदी अखबार
उत्तर प्रदेश का पहला हिंदी अखबार 'बनारस अखबार' था। इसकी शुरुआत जनवरी 1845 में काशी (वाराणसी) से हुई थी, जो कि उस समय संयुक्त प्रांतसे प्रकाशित होने वाला पहला हिंदी समाचार पत्र था। यह उस समय बिहार, मध्य प्रदेश व राजस्थान आदि जैसे हिंदी प्रांतीय क्षेत्र से पहला प्रांतीय हिंदी अखबार माना जाता है।
क्यों और किसने निकाला था अखबार
भारत में 19वीं शताब्दी में प्रिंटिंस प्रेस और पत्रकारिता बढ़ रही थी। इस समय उत्तर भारत में लोगों तक सूचना पहुंचाने के लिए कोई हिंदी माध्यम का साधन नहीं था। इस कमी को देखते हुए काशी के प्रसिद्ध विद्वान राजा शिवप्रसाद 'सितारेहिंद' ने 'बनारस अखबार' की नींव रखी थी। यह एक साप्ताहिक अखबार हुआ करता था, जो कि हर शुक्रवार को प्रकाशित होता था।
कौन था अखबार का संपादक
बनारस अखबार के संपादन की जिम्मेदारी गोविंद रघुनाथ थत्ते को दी गई थी, जो कि उस समय बनारस में एक बड़े विद्वान थे। इस अखबार को बनारस प्रेस में ही छापा जाता था।
नाम से हिंदी और पढ़ने में उर्दू और फारसी
यह अखबार एक हिंदी अखबार था, लेकिन इसमें शुद्ध हिंदी भाषा नहीं होती थी। अखबार में उस समय की हिंदुस्तानी भाषा को शामिल किया गया था, जिसमें हिंदी, फारसी और उर्दू के शब्द शामिल होते थे, जिससे हिंदू और मुस्लिम, दोनों वर्ग के लोग अखबार को आसान भाषा में समझ सके।
इस वजह से अखबार में हिंदी के भारी-भरकम शब्दों को प्रयोग नहीं हुआ था। ऐसे में इस अखबार को विरोध का भी सामना करना पड़ा। यही वजह है कि वरिष्ठ साहित्यकार भारतेंदु हरिश्चंद्र के पिता बाबू गोपालचंद्र और तारामोहन मैत्र ने इसके जवाब में शुद्ध हिंदी को बढ़ावा देने के लिए 1850 में काशी से ही 'सुधाकर' नामक एक शुद्ध हिंदी भाषा वाला पहला अखबार निकाला।
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