भारत का वह किला, जहां हुआ था छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म
भारत के महाराष्ट्र में आज भी वह किला मौजूद है, जहां छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म हुआ था। इस किले को देखने को लिए दूर-दूर से पर्यटक पहुंचते हैं। इस लेख में हम किले के बारे में विस्तार से जानेंगे।
भारत के महाराष्ट्र में आज भी वह गौरवशाली और ऐतिहासिक किला मौजूद है, जिसमें छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म हुआ था। यह किला आज लोगों के दिलों में सम्मानपूर्वक राज करता है। क्योंकि, इसकी यादें मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ी हुई हैं। इस लेख में हम किले के बारे में विस्तार से जानेंगे।
किस किले में हुआ था शिवाजी महाराज का जन्म
छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म महाराष्ट्र के पुणे जिले के शिवनेरी किले में हुआ था। यह किला कभी मराठा साम्राज्य का एक बड़ा सैन्य गढ़ हुआ करता था, जो कि अपनी बनावट और वास्तुकला के लिए जाना जाता है।
शिवाजी महाराज को ऐसे मिला नाम
छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1627 को शिवनेरी किले में हुआ था। दरअसल, उनके पिता शाहजी राजे भोंसले बीजापुर के सुल्तान की सेवा में थे और दक्कन में लगातार युद्ध चल रहे थे।
ऐसे में सुरक्षा के लिहाज से शाहजी राजे ने अपनी पत्नी जीजाबाई को शिवनेरी किले में छोड़ दिया था, क्योंकि यह किला अपनी मजबूती और सुरक्षा के लिए जाना जाता था। इस किले में शिवाई माता का मंदिर है, जिनके नाम पर ही शिवाजी महाराज का नामकरण हुआ था।
खड़ी चट्टानों से घिरा है किला
शिवनेरी का किला एक त्रिकोण आकार वाली पहाड़ी पर बना हुआ है, जो कि चारों ओर से खड़ी चट्टानों से घिरा हुआ है। यह इस प्रकार बना हुआ है कि इस पर हमला करना बहुत मुश्किल है। इसमें प्रवेश के लिए 7 दरवाजों को पार करना पड़ता था। वहीं, ये सात दरवाजें घुमावदार रास्ते और संकरे हैं, जिससे दुश्मन की सेना यहां हमला नहीं कर सकती थी।
शिवनेरी किले से जुड़ी शिवाजी महाराज की यादें
शिवनेरी किले में आज भी वह स्थान है, जहां शिवाजी महाराज का जन्म हुआ था। इस जगह पर आज एक पालना रखा हुआ है।
-किले में आज भी वह प्राचीन मंदिर है, जहां जीजाबाई शिवाई देवी की पूजा करती थीं। इस किले में पहाड़ी को काटकर कई प्राकृतिक झरने बनाए गए हैं, जिनका पानी बहुत मीठा बताया जाता है।
-इस किले में आज भी वह जगह मौजूद है, जहां एक खड़ी चट्टान है और यहां से कभी अपराधियों को खाई में फेंक दिया जाता था।
-किले में शिवाजी महाराज ने अपने जीवन के शुरुआती 5-6 वर्ष बिताए थे। ऐसा कहा जाता है कि यही पर जीजाबाई उन्हें रामायण और महाभारत की कहानियां सुनाती थीं।
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