चादर बेचने वाले पिता के बेटे ने रचा इतिहास, ISRO में टेक्निकल असिस्टेंट बन कायम की मिसाल
कहते हैं कि हौसले अगर बुलंद हों और इरादे पक्के, तो गरीबी कभी भी कामयाबी के रास्ते का रोड़ा नहीं बन सकती। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है, दिल्ली के रहने वाले मौहम्मद उमेर ने। उमेर ने कड़ी मेहनत, लगन और सही रणनीति के दम पर ISRO में टेक्निकल असिस्टेंट बनने का सपना साकार किया। आज हम आपको उनकी सफलता की कहानी के बारे में बताएंगे।
मौहम्मद उमेर, यह एक ऐसा नाम है, जिसने गरीबी को अपनी मेहनत का कभी रौड़ा नहीं बनने दिया और अपनी कड़ी तपस्या से सफलता का एक नया मुकाम हासिल कर अपनी एक अलग पहचान बनाई। जहां एक तरफ उनके पिता तपती धूप और कड़कती ठंड में सड़कों पर घूम-घूम कर चादर बेचने का काम करते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ बेटे मौहम्मद उमेर ने ISRO में टेक्निकल असिस्टेंट बनकर न केवल अपने परिवार, बल्कि देश का भी नाम रोशन किया। आज देश उनके हौंसले को सलाम कर रहा है।
उमेर की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है, जो संसाधनों की कमी के चलते हार मान लेते हैं। मौहम्मद उमेर इससे पहले कई सरकारी एग्जाम पास कर चुके हैं, जिनमें एटोमिक एनर्जी, इंटेलीजेंस ब्यूरो और पावरग्रिड शामिल है। आइए उनकी सफलता की कहानी के बारे में जानते हैं।
उमेर के पिता बेचते हैं चादर
मौहम्मद उमेर दिल्ली के नॉर्थ ईस्ट इलाके नेहरू विहार में रहते हैं। उमेर ने ISRO में टेक्निकल असिस्टेंट बनने का सपना साकार किया। वह बेहद साधारण परिवार से आते हैं। उमेर के पिता का नाम मौहम्मद इस्माइल है, जो गली-गली घूमकर चादर बेचने का काम करते हैं। माता का नाम संजीद बेगम है, जो परिवार की जिम्मेदारी संभालती है। एक बड़े भाई है, जिनका नाम मौहम्मद हिलाल है। वह पेशे से फिजियोथेरेपिस्ट है। वहीं एक छोटा भाई भी काशिफ भी है, जो आईटीआई पास आउट है।
कम संसाधनों होने के बावजूद उमेर के माता-पिता और भाई ने पढ़ाई के लिए मोटिवेट किया और आज इसी के बदौलत उमर ने ISRO में सलेक्ट होने का मुकाम पाया है। वह अपनी इस सफलता का श्रेय अपना माता-पिता और टीचर्स को देते हैं।
दिल्ली विश्विद्यालय से पूरा किया ग्रेजुएशन
मौहम्मद उमेर ने अपनी 10वीं की पढ़ाई सीबीएसई बोर्ड से पूरी की और 10वीं के बाद साल 2020 में उन्होंने दिल्ली विश्विद्यालय के कॉलेज/इंस्टीट्यूट अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से डिप्लोमा इन इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग किया। इसके बाद वह अपनी तैयारी में जुट गए। हालांकि ISRO में सलेक्शन होने उनके लिए आसान नहीं था। अपनी गलतियों से सीखते रहें और आगे बढ़ते रहें। बेटे के ISRO में सलेक्शन होने से आज मां-बाप की आंखों में खुशी के आंसू है।
मौहम्मद उमेर ने कैसे की तैयारी?
मौहम्मद उमेर ने अपनी तैयारी के लिए सेल्फ स्टडी पर ज्यादा फोकस किया। इसके लिए उन्होंने नोट्स और बुक्स का अध्यन किया। इसके अलावा वह क्लेरिटी लाने के लिए यूट्यूब लेक्चर्स को भी सुनते थे। उमेर सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले सभी उम्मीदवारों को यह संदेश देना चाहते हैं कि पहले सिलेबस को ध्यान से पढ़ें और इसके बाद रणनीति बनाकर पूरा ईमानदारी से पढ़ाई करें। देखना एक दिन सफलता आपके कदम चूमेगी।
Farhan Khan is an education journalist with over 3 years of experience specializing in the public sector recruitment space. From UPSC and SSC to Banking and Defense, he provides end-to-end coverage on exam notifications, admit cards, and Sarkari results. Farhan holds a Master’s degree in Mass Communication from Guru Jambheshwar University and blends research-driven journalism with creative storytelling to guide aspirants through their exam preparation journeys.