IIT दिल्ली निदेशक रंगन बनर्जी का सलाह: युवा AI के साथ कौशल बढ़ाएं, आत्मनिर्भर बनें

Last Updated: Jun 2, 2026, 16:22 IST

आईआईटी दिल्ली के निदेशक रंगन बनर्जी ने युवाओं को एआई जैसी तकनीकों पर निर्भर रहने के बजाय आत्मनिर्भर बनने की सलाह दी है। उन्होंने अपनी प्रतिभाओं को पहचानकर रोजगार सृजन करने और सामाजिक समस्याओं का समाधान खोजने पर जोर दिया।

IIT दिल्ली निदेशक रंगन बनर्जी का सलाह: युवा AI के साथ कौशल बढ़ाएं, आत्मनिर्भर बनें
IIT दिल्ली निदेशक रंगन बनर्जी का सलाह: युवा AI के साथ कौशल बढ़ाएं, आत्मनिर्भर बनें

एआइ युवाओं के लिए केवल एक तकनीक ही नहीं, बल्कि रोजगार, कौशल और अवसरों का नया आधार है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें केवल तकनीक पर निर्भर शील होकर आगे नहीं बढ़ना चाहिए। स्वंय की प्रतिभाओं को पहचानकर आत्मनिर्भर बनने का प्रयास करना चाहिए। आज के युवा कैसे इस दिशा की ओर कदम बढ़ाएं, इसपर उन्हें प्रेरणा दे रहे हैं आइआइटी दिल्ली के निदेशक, रंगन बनर्जी...

हां, यह सत्य है कि आज का समय एआइ, डाटा साइंस, रोबोटिक्स, स्पेस साइंस, डीपटेक तकनीकी जानकारियों का है। युवाओं को इन नई तकनीकों और कौशलों के साथ ताल से ताल मिलाकर चलना है। ताकि वे भविष्य में अनुसंधान और औद्योगिकीकरण की नई राहें तैयार कर सकें। तकनीक की मदद से ऐसे एप्स या स्टार्ट अप का निर्माण कर सकें जिससे वे खुद रोजगार पैदा करने में सक्षम हो सके। आइआइटी जैसे बड़े संस्थानों में विद्यार्थियों को केवल शिक्षा या डिग्री के लिए तैयार नहीं किया जाता , उनके आत्मविश्वास  को इतना मजबूत किया जाता है कि आने वाले समय में वे किसी भी चुनौती का सामना कर सकें।

पहचानें अपने अंदर छिपी प्रतिभा को

आज के युवाओं को पढ़ाई के साथ साथ अपने अंदर छिपी प्रतिभाओं को भी पहचानने की कोशिश करनी होगी। उन्हें समझना होगा कि वे समाज में क्या और कैसे बदलाव ला सकते हैं। हर किसी के अंदर एक ना एक प्रतिभा या कौशल छिपा रहता है, जरूरत है तो बस उसे तराशने की। हमारे आस पास समाज में कई सारी ऐसी समस्याएं हैं जिन्हें हम सालों से अनदेखा करते आए हैं। युवाओं का दायित्व है कि वे इन समस्याओं को समझें और उनका समाधान करने का प्रयास करें। इसके लिए उन्हें बहुत दूर जाने की जरूरत नहीं है। केवल केवल अपनी रचनात्मक शक्ति का विकास करके नए इनोवेशन करने हैं, जो समाज के लिए उपयोगी साबित हो सकें।

रोजागर का करें सृजन  

पहले युवा आइआइटी से डिग्री लेने के बाद सबसे पहले अच्छे पैकेज वाली नौकरी तलाशते थे, आज भी ऐसा करते हैं, लेकिन कुछ युवा ऐसे भी हैं जो नौकरी के पीछे नहीं, रोजगार सृजन करने वाले बनना चाहते हैं। पिछले कुछ सालों में आइआइटी दिल्ली 'स्टार्ट अप कैपिटल' बनकर उभरा है। कई युवा यहां से निकलने के बाद आज स्टार्ट अप की दुनिया में महारथ हैं। आज के युवाओं को भी इसी दिशा में काम करना चाहिए। शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक कई क्षेत्रों में स्टार्ट अप निर्माण करने के अवसर हैं। युवाओं को स्वंय पर इतना विश्वास होनाा चाहिए कि कभी अगर नौकरी में कोई भी दिक्कत आए तो वे इतने आत्मनिर्भर हो सकें कि किसी भी चुनौती का सामना करने से डरे नहीं। ये जिम्मेदारी केवल स्टूडेंट्स की नहीं होनी चाहिए, संस्थान को भी उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाना होगा।

समाधान स्वरूप बनें युवा

युवाओं को डिग्री से आगे सोचना होगा। डिग्री के आधार पर उन्हें नौकरियां तो मिल जाएंगी, लेकिन आज के समय में स्किल्स बहुत जरूरी पहलू है। वर्तमान समय में कंपनियां इंप्लाइज की केवल डिग्री नहीं देखती, बल्कि यह भी देखती हैं कि वह कितनी कुशलता के साथ काम करते हैं। टीम को कैसे मैनेज करते हैं, किसी परिस्थिति में समस्या का समाधान कैसे निकालते हैं। उनके आईक्यू के साथ ईक्यू भी देखा जाता है। भावनात्मक परिस्थितियों में कैसे निर्णय लेते हैं, यह उतना ही महत्वपूर्ण है। इसलिए करियर के साथ-साथ जीवन के प्रति भी उनकी तैयारी पूरी होनी चाहिए।

Priyaish Srivastava is Community Manager at Jagran Josh and holds a postgraduate degree in Mass Communication. With over six years of experience in creative writing, AV content creation, social media marketing, and community management, he specialises in building engaging digital communities and developing impactful content strategies in the education and media sectors. He can be reached at priyaish.srivastava@jagrannewmedia.com.

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First Published: Jun 2, 2026, 16:22 IST

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