अवध के पहले नवाब, जिन्हें कहा जाता था 'बुर्हान-उल-मुल्क'

Last Updated: Jun 30, 2026, 13:34 IST

अवध, मुगलों का महत्त्वपूर्ण प्रांत रहा है, जहां की कमान नवाबों के हाथों में थी। इस कड़ी में यहां एक ऐसे नवाब भी हुए हैं, जिन्हें 'बुर्हान-उल-मुल्क' के नाम से भी जाना जाता था। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे।

अवध के पहले नवाब
अवध के पहले नवाब

मुगलों ने भारत के अलग-अलग प्रांतों में शासन किया। इसमें से एक अवध प्रांत भी है, जो कि मुगलों का महत्त्वपूर्ण एरिया था। इसकी कमान नवाबों के हाथ में थी, जो कि यहां प्रशासनिक रूप से जिम्मेदार थे। इस कड़ी में अवध के पहले नवाब भी हुए हैं, जिन्हें 'बुर्हान-उल-मुल्क' नाम से जाना जाता है। उन्होंने ही 1722 ईस्वी में अवध के रूप में एक स्वतंत्र राज्य की नींव रखी थी। इस लेख में हम अवध के पहले नवाब के बारे में विस्तार से जानेंगे।

अवध के पहले नवाब कौन थे

अवध के पहले नवाब साआदत खान थे। इतिहास में उन्हें 'बुर्हान-उल-मुल्क' नाम से जाना जाता है। हालांकि, उनका मूल नाम मीर मोहम्मद अमीन था, जिनका जन्म 1680 ईस्वी में ईरान में हुआ था। वह अपने बेहतर भविष्य की तलाश में मुगल सम्राट औरंगजेब के शासनकाल में भारत आए मुगल सेना में शामिल हो गए। 

कैसे बने अवध के पहले नवाब 

1707 ईस्वी में औरंगेजब की मौत के बाद मुगल साम्राज्य कमजोर होने लगा था और दिल्ली में गुटबाजी हो रही थी। यह वह समय था, जब सैयद बंधुओं की ताकत बढ़ रही थी और वह लोगों को राजा बना रहे थे।

हालांकि, साआदत खान ने सैयद बंधुओं के खिलाफ रची गई साजिश में नए मुगल सम्राट मोहम्मद शाह 'रंगीला' का साथ दिया। उनकी इस वफादारी से खुश होकर मुगल सम्राट ने 9 सितंबर, 1722 में साआदत खान को अवध का सूबेदार बनाया गया। ऐसे में उन्हें 'बुर्हान-उल-मुल्क' यानि कि साम्राज्य का स्तंभ की उपाधि से नवाजा गया। यहीं से अवध के नवाबों के वंश की शुरुआत हुई।

अवध में क्या किया सुधार

साआदत खान को जब अवध का नवाब बनाया गया, तो यहां के जमींदार और राजपूत राजा मुगलों के खिलाफ थे और टैक्स देने से पीछे हट गए थे। हालांकि, साआदत खान ने लखनऊ के प्रसिद्ध 'शेखजादों' और अन्य विद्रोही जमींदारों को हराकर अपना शासन स्थापित किया।

वहीं, उन्होंने 1723 में नया लैंड रैवन्यू सिस्टम बनाया, जिसमें छोटे किसानों को शोषण से बचाया गया। साथ ही, उन्होंने प्रशासन और सेना में मुस्लिम समुदाय के अलावा हिंदू राजाओं को भी नियुक्त किया, जिससे लोगों का विश्वास जीता जा सके। उस समय फैजाबाद अवध का मुख्य केंद्र हुआ करता था। 

ऐसे हुआ साआदत खान का अंत 

1739 ईस्वी में फारस के शासक रहे नादिरशाह ने भारत पर आक्रमण कर दिया था। इस बीच साआदत खान मुगलों की तरफ से करनैल के युद्ध में लड़ने के लिए पहुंच गए थे। इस युद्ध में नादिरशाह को बंदी बना लिया गया था।

ऐसा कहा जाता है कि नादिर शाह मामूली रकम लूटकर वापस लौटने को तैयार था, लेकिन साआदत खान ने दिल्ली के वजीर पद के लिए उसे हमले लिए उकसाया और 20 करोड़ रुपये का खजाना मिलने का झासा दिया।

नादिरशाह ने खजाना न मिलने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी, जिसके बाद 19 मार्च,1739 में साआदत खान ने जहर खाकर अपना अंत कर लिया था।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Jun 30, 2026, 13:34 IST

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