Rajasthan Khushi Shala Scheme: राजस्थान के 1,500 सरकारी स्कूलों में शुरू हुई 'खुशी शाला', बच्चों का मानसिक तनाव होगा दूर

Last Updated: Jun 30, 2026, 13:43 IST

राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (RSCERT) ने कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों के लिए एक नया मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम लागू किया है, जिसका नाम ‘Khushi Shala’ रखा गया है। इस कार्यक्रम को लगभग 1,500 सरकारी स्कूलों में लागू किया गया है। सभी जानकारी के लिए यहां से देखें।

Rajasthan Khushi Shala Scheme: राजस्थान के 1,500 सरकारी स्कूलों में शुरू हुई 'खुशी शाला', बच्चों का मानसिक तनाव होगा दूर
Rajasthan Khushi Shala Scheme: राजस्थान के 1,500 सरकारी स्कूलों में शुरू हुई 'खुशी शाला', बच्चों का मानसिक तनाव होगा दूर

Rajasthan Launches ‘Khushi Shala’: अक्सर स्कूलों में केवल मार्क्स, अटेंडेंस और सिलेबस को पूरा करने पर ही चर्चा होती रहती है। लेकिन, इस साल यानी 2026 में राजस्थान सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक बेहतरीन कदम उठाते हुए बच्चों के मन की बात और उनकी खुशियों के बारे में जानने को प्राथमिकता दी गई है। 

राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (RSCERT) ने कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक विकास के लिए एक स्किम शुरू की है। यह स्किम छात्रों के लिए करीब राज्य के 1,500 सरकारी स्कूलों में 'खुशी शाला' (Khushi Shala) के नाम से शुरू की गई है। 

अभी शुरुआती स्टेप में इस योजना को केवल सरकारी स्कूलों में ही लागू किया गया है। इसी के साथ, आरएससीईआरटी की निदेशक श्वेता फागेडिया ने अनुसार राजस्थान प्राथमिक शिक्षा के लेवल पर ऐसा छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल करने वाला यानी अनूठा मेंटल हेल्थ प्रोग्राम शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

'खुशी शाला' कार्यक्रम की पूरी जानकारी के लिए यहां देखें

इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए RSCERT ने 'क्षमतालय फाउंडेशन' (Kshamtalaya Foundation) और 'ब्रियो' (Brio) संस्था के साथ मिलाव किया गया है। छात्र और सभी पेरेंट्स इस योजना से जुड़ी सभी जानकारी के बारे में जानने के लिए नीचे दी गई टेबल को देखें। 

मुख्य बिंदु 

योजना की मुख्य जानकारी 

कार्यक्रम का नाम

खुशी शाला 

किसके द्वारा लॉन्च किया गया

राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (RSCERT)

टारगेटेड छात्र 

कक्षा 1 से कक्षा 5 

प्रारंभिक स्टेप का दायरा

लगभग 1,500 सरकारी स्कूल

मुख्य उद्देश्य

छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य सुधारना, भावनात्मक मजबूती और सोशल स्किल्स को बढ़ाना है। 

टीचर्स के लिए ट्रेनिंग मॉड्यूल

3-दिवसीय कार्यशाला + 21 दिनों का ऑडियो-आधारित कोर्स

भविष्य का लक्ष्य (2029 तक)

राज्य के 12,000 से अधिक स्कूलों और 33 लाख से ज्यादा बच्चों तक पहुंचना

'खुशी शाला' क्या है? - यह कैसे काम करेगी?

'खुशी शाला' का मुख्य उद्देश्य छात्रों को रटने वाली प्रणाली और पढ़ाई के बोझ से दूर और बोझ को कम करके एक खुशनुमा और मजेदार माहौल देना है, जिससे छोट बच्चे परेशान न हो। साथ ही, वह हर एक प्रक्रिया का मजा लें। इस कार्यक्रम के साथ छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ कई प्रकार की एक्टिविटीज से भी जोड़ा जाएगा। 

यह कार्यक्रम मुख्य रूप से तीन आधार पर काम करता है:

1. माइंडफुलनेस: 

इस लेवल पर बच्चों को ध्यान लगाना सिखाया जाता है ताकि वे अपने शरीर, भावनाओं और विचारों के प्रति सचेत हो सकें।

2. करुणा भाव: 

इस प्रक्रिया में बच्चों को खुद के प्रति और अपने सहपाठियों यानी दोस्तों और क्लासमेट के लिए सहानुभूति और दयालुता की भावना को विकसित किया जाता है। 

3. मूल्य-आधारित मार्गदर्शन: 

बच्चों को कहानियों, कला और खेलों के माध्यम से जीवन के नैतिक मूल्यों को समझाने की प्रक्रिया को अपनाया जाएगा। ऐसा करने से वे जीवन की चुनौतियों का डटकर सामना करने लगते हैं। 

टीचर्स को दी जा रही है विशेष ट्रेनिंग: 'हौसला' कार्यक्रम

बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को समझने के लिए सबसे पहले टीचर्स का मानसिक रूप से पक्का होना जरूरी है। इसी सोच के साथ 'खुशी शाला' के तहत टीचर्स के लिए 'हौसला कार्यक्रम' भी चलाया जा रहा है।

इस हौसला कार्यक्रम के अंदर टीचर्स को 3 दिन की व्यावहारिक ट्रेनिंग और 21 दिनों का एक विशेष ऑडियो कोर्स कराया जाएगा। इस ट्रेनिंग से टीचर्स यह सीख पाएंगे कि बच्चों में तनाव के लक्षणों को कैसे पहचाना जाए, बच्चों के साथ एक दोस्ताना रिश्ता कैसे बनाया जाए। साथ ही, क्लासरूम को एक 'सेफ स्पेस' कैसे बनाया जाए। 

'खुशी शाला' कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों को सिखाया और बताया जाएगा कि सफलता और असफलता दोनों ही जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। छात्रों को केवल एग्जाम में अच्छे नंबर लाने के दबाव में ही नहीं जीना चाहिए, बल्कि सीखने की प्रक्रिया का भी पूरा आनंद लेना चाहिए। 

राजस्थान सरकार की इस पहल से आने वाले समय में न सिर्फ सरकारी स्कूलों की शिक्षा के लेवल को सुधरेगा, बल्कि इस कार्यक्रम का हिस्सा होने पर देश को भी मानसिक रूप से मजबूत और खुशहाल नागरिक भी मिलेंगे।

Akshara Verma
Akshara Verma

Executive - Editorial

Akshara Verma is a digital journalist working in the GK section of Jagran Josh. She writes in Hindi and is a subject matter expert in Education, Current Affairs, General Knowledge, News, History, and Trending National News, delivering accurate and authoritative content for a wide readership.

A graduate of Bharati Vidyapeeth's Institute of Computer Applications and Management (BVICAM) with a Bachelor of Journalism and Mass Communication, Akshara brings a strong academic and professional foundation to her work. She has previously held content writing and Public Relations roles at Genesis BCW and Dainik Bhaskar, experiences that have sharpened her ability to craft impactful, audience-first content across diverse formats. She can be reached at akshara.verma@jagrannewmedia.com.

... Read More
First Published: Jun 30, 2026, 13:43 IST

आप जागरण जोश पर सरकारी नौकरी, रिजल्ट, स्कूल, सीबीएसई और अन्य राज्य परीक्षा बोर्ड के सभी लेटेस्ट जानकारियों के लिए ऐप डाउनलोड करें।

Trending

Latest Education News