क्या थी अनुशीलन समिति और कौन था इसका संस्थापक, पढ़ें यहां

Last Updated: Jun 26, 2026, 18:39 IST

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान कई समितियों का गठन हुआ था, जिसमें से एक अनुशीलन समिति भी थी। यह एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण समिति थी, जिसे लेकर कई परीक्षाओं में सवाल पूछे जाते हैं। इस लेख में हम इस संबंध में विस्तार से जानेंगे।

अनुशीलन समिति
अनुशीलन समिति

हम जब भी भारतीय इतिहास में राष्ट्रीय आंदोलनों के बारे में पढ़ते हैं, तो हमें अनुशीलन समिति का प्रमुखता से जिक्र मिलता है। यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण समिति रही है, जिसमें युवाओं को देश की आजादी के लिए तैयार किया जाता था। खुदी राम बोस और प्रफुल्ल चाकी जैसे स्वतंत्रता सेनानी भी इस समिति के सदस्य थे, जिन्होंने मुजफ्फरपुर में किंग्स फोर्ड की गाड़ी पर बम फेंक दिया था। इस लेख में हम इस समिति के बारे में महत्त्वूपर्ण बातें जानेंगे।

क्या थी अनुशीलन समिति 

अब हम अनुशीलन समिति के बारे में जान लेते हैं। अनुशीलन समिति एक क्रांतिकारी संगठन था, जिसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

कब और किसने की थी समिति की स्थापना

अनुशीलन समिति की स्थापना 1902 में पी. मित्रा व बरिंद्र कुमार घोष समेत अन्य लोगों द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य सशस्त्र संसाधनों के माध्यम से ब्रिटिश सेना से भारत को आजादी दिलाना था। ऐसे में इसका संचालन गुप्त रूप से किया जाता था, जिससे ब्रिटिश अधिकारियों को इसके ठिकानों का पता न चले।

दो शाखाओं में बंटी हुई थी समिति 

अनुशीलन समिति दो शाखाओं में बंटी हुई थी। इसमें एक शाखा युगांतर और दूसरी ढाका अनुशीलन समिति थी। खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी युगांतर से जुड़े हुए थे, जिन्होंने मुजफ्फरपुर में किंग्स फोर्ड की गाड़ी पर बम फेंका था। वहीं, ढाका शाखा की स्थापना पुलिन दास ने की थी।

क्या करती थी अनुशीलन समिति 

समिति की शाखाओं के माध्यम से नवयुवाओं को एकत्रित किया जाता था। उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से शक्तिशाली बनाया जाता था, जिससे वे अंग्रेजी सेना का सामना कर सके। साथ ही, उन्हें बम बनाना, हथियार चलाना और अंग्रेजों की मारने की ट्रेनिंग दी जाती थी। 

अंग्रेजों ने समिति को दबाया

अंग्रेजों के ऊपर समिति का अधिक दबाव बन रहा था। ऐसे में अंग्रेजों द्वारा समिति के सदस्यों और नेताओं को गिरफ्तार किया गया। इसमें से कुछ को फांसी दी गई, जबकि कुछ को जेल में डाल दिया गया। इस प्रकार अनुशीलन समिति को पूरी तरह दबा दिया गया। आपको बता दें कि यह समिति बंकीमचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास ‘आनंदमठ’ और स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरित थी। 

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Jun 26, 2026, 18:39 IST

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