महाराष्ट्र का सबसे पुराना किला, 2000 साल पुराना है इतिहास
महाराष्ट्र, भारत के सबसे बड़े राज्यों में शामिल है। यहां मराठा व अन्य राजवंशों के करीब 350 किले मौजूद हैं, जो कि साह्यद्री पर्वत श्रृंखला में बने हुए हैं। इस कड़ी में यहां हम महाराष्ट्र के सबसे पुराने किले के बारे में जानेंगे।
महाराष्ट्र, भारत के सबसे बड़े राज्यों में शामिल है। यहां का समृद्ध इतिहास इसे अन्य राज्यों से अलग बनाता है। इस कड़ी में यहां विभिन्न ऐतिहासिक किले बने हुए हैं, जो कि साह्यद्री पर्वत श्रृंखला में हैं। मराठा और विभिन्न राजवंशों के यहां करीब 350 किले बने हुए हैं, जिनमें से कुछ किले विरासत स्थल लिस्ट में शामिल हैं। इनमें एक किला ऐसा भी है, जो कि महाराष्ट्र का सबसे पुराना किला है। इस लेख में हम इस किले के बारे में विस्तार से जानेंगे।
महाराष्ट्र का सबसे पुराना किला
महाराष्ट्र पर्यटन विभाग के मुताबिक, लोहागढ़ और शिवनेरी किला, दोनों ही राज्य के सबसे पुराने किलों में शामिल हैं। इनका इतिहास 2000 साल पुराना है। आज भी ये किले शान से साह्यद्री पर्वत श्रृंखला पर खड़े हैं और अपने ऐतिहासिक पलों की गवाही दे रहे हैं। इन दोनों किलों में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं।
लोहागढ़ किले का इतिहास
महाराष्ट्र पर्यटन के मुताबिक, लोहागढ़ किले के इतिहास के बात करें, तो इस किले का शुरुआती निर्माण लोहतमिया वंश द्वारा किया गया था। इस वंश ने 10वीं शताब्दी ईस्वी में इस क्षेत्र में शासन किया था। साल 1648 में यह मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज के हाथ में आया, जिन्होंने अपने राज्य के लिए इसे एक रणनीतिक किला बनाया। हालांकि, पुरंदर की संधि के बाद यह किला मुगलों के पास चला गया था। साल 1670 में किले को दोबारा शिवाजी महाराज द्वारा जीत लिया गया।
किले में मौजूद प्रमुख स्थल
किले में अंतिम छोर पर एक ऐसी जगह बनी हुई है, जो कि बिच्छू के पूंछ की तरह दिखती है। यह घुमावदार पहाड़ी के ऊपर है। वहीं, रणनीतिक रूप से भी यह महत्त्वपूर्ण जगह है, जहां से दुश्मनों पर नजर रखी जाती थी। आज भी लोग इस जगह को देखने के लिए पहुंचते हैं। वहीं, मानसून के मौसम में यहां का नजारा बहुत खूबसूरत दिखता है। क्योंकि, साह्यद्री पर्वत श्रेणी पूरी तरह हरा-भरा दिखती है।
शिवनेरी किले का इतिहास
शिवनेरी किले को छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म स्थान भी कहा जाता है। यहां आज भी एक छोटा कमरा बना हुआ है, जहां शिवाजी महाराज का जन्म हुआ था। इस कमरे में शिवाजी और उनकी माता जीजाबाई की मूर्ति स्थापित है।
किले में मौजूद प्रमुख स्थल
किले में कई प्रमुख स्थल हैं, जिनका संबंध छत्रपति शिवाजी महाराज से हैः
बादामी तालाब
यह किले में मौजूद एक बड़ जलाशय है। कहा जाता है शिवाजी महाराज बचपन में इस कुंड में तैरा करा थे।
चेन गेट
यह किले का एक गुप्त रास्ता है, जिसका प्रयोग शिवाजी महाराज द्वारा किया जाता था।
फांसी स्थल
यह किले में मौजूद ऐसी जगह है, जहां कैदियों को फांसी दी जाती थी।
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