भारत में न्यायपालिका को संविधान के तीन महत्त्वपूर्ण स्तंभों में गिना जाता है। इसकी बानगी हमें सत्र जिला न्यायालय से लेकर होई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका में देखने को मिलती है। देश के विभिन्न राज्यों में हाई कोर्ट मौजूद हैं। हालांकि, यदि सबसे पुराने हाई कोर्ट की बात करें, तो सबसे टॉप पर कलकत्ता हाई कोर्ट का नाम आता है।
यह कोर्ट 1 जुलाई, 1862 को ब्रिटिश शासन द्वारा स्थापित किया गया था। किस अधिनियम से हुई थी इसकी स्थापना और क्या है इसका अधिकार क्षेत्र, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
भारत में कुल कितने हाई कोर्ट हैं
भारत में कुल 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं। हालांकि, कुल हाई कोर्ट की बात करें, तो इनकी संख्या 25 है। क्योंकि, कुछ राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के कोर्ट दूसरे राज्य के हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
कैसे हुई थी हाई कोर्ट की स्थापना
हाई कोर्ट की स्थापना भारतीय उच्च न्यायालय अधिनियम, 1861 के तहत हुई थी। उस समय इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया द्वारा लेटर पेटेंट जारी कर इसे अधिकार प्रदान किए गए थे।
एक ही वर्ष में बने थे तीन हाई कोर्ट
उस समय 1861 के अधिनियम के तहत देश में तीन हाई कोर्ट बनाए गए थे। ये हाई कोर्ट तीन अलग-अलग प्रेसीडेंसी में बने थे, जिनमें कलकत्ता हाई कोर्ट(1 जुलाई,1862), बांबे हाई कोर्ट(14 अगस्त,1862) और मद्रास हाई कोर्ट(15 अगस्त,1862) को स्थापित किया गया था।
कलकत्ता हाई कोर्ट का अधिकार क्षेत्र
कलकत्ता हाई कोर्ट सिर्फ पश्चिम बंगाल के मामलों की सुनवाई नहीं करता है, बल्कि यह अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के मामलों की भी सुनवाई करता है। कोर्ट की एक स्थायी बेंच पोर्ट ब्लेयर और दूसरी जलपाईगुड़ी में स्थित है।
भव्यता के लिए जाना जाता है कोर्ट
कलकत्ता हाई कोर्ट की इमारत अपनी भव्यता के लिए जानी जाती है। इसे नियो-गॉथिक शैली में तैयार किया गया है। कोर्ट के डिजाइन की बात करें, तो यह बेल्जियम के क्लॉथ हॉल की तर्ज पर बना हुआ दिखता है। यह हॉल मध्यकालीन यूरोप की वास्तुकला शैली पर बना हुआ है।
आज भी नहीं बदला है नाम
आज कलकत्ता नाम बदलकर कोलकाता हो गया है, लेकिन संवैधानिक संस्था होने के कारण आज भी इसका नाम नहीं बदला गया है। इसे आज भी कलकत्ता हाई कोर्ट नाम से जाना जाता है। कोर्ट के पहले मुख्य न्यायाधीश सर बार्न्स पीकॉक थे, जबकि पहले भारतीय मुख्य न्यायाधीश फणी भूषण चक्रवर्ती थे।
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