पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) के साथ मिलकर जैव विविधता पर सम्मेलन (CBD) के सचिवालय को नागोया प्रोटोकॉल के क्रियान्वयन पर भारत की पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट (NR1) 27 फरवरी 2026 को प्रस्तुत की। यह रिपोर्ट प्रोटोकॉल के अनुच्छेद-29 के तहत निगरानी और रिपोर्टिंग के प्रावधानों के अनुसार दी गई है।
क्या है नागोया प्रोटोकॉल?
नागोया प्रोटोकॉल को 29 अक्टूबर 2010 को जापान के नागोया शहर में अपनाया गया था और यह अक्टूबर 2014 में प्रभावी हुआ। यह समझौता बायोपायरेसी (जैविक संसाधनों की चोरी) की ऐतिहासिक समस्या को संबोधित करता है। यह पौधों, जानवरों और सूक्ष्मजीवों जैसे आनुवंशिक संसाधनों तथा उनसे जुड़े पारंपरिक ज्ञान पर लागू होता है।
इसका मुख्य उद्देश्य एक्सेस एंड बेनिफिट-शेयरिंग (ABS) के सिद्धांत के आधार पर संसाधन प्रदान करने वाले और उपयोग करने वाले पक्षों के बीच लाभों का न्यायसंगत और समान वितरण सुनिश्चित करना है, ताकि किसी भी पक्ष को नुकसान न हो।
भारत ने जैविक विविधता सम्मेलन में आनुवंशिक संसाधनों तक पहुंच और उनके लाभ के निष्पक्ष और समान बंटवारे के नागोया प्रोटोकॉल कार्यान्वयन पर पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट पेश की
— पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) March 16, 2026
विवरण: https://t.co/LI6TzMTf9y @moefcc
क्यों पेश की गई यह रिपोर्ट
यह रिपोर्ट 1 नवंबर 2017 से 31 दिसंबर 2025 की अवधि को कवर करती है और नागोया प्रोटोकॉल के कार्यान्वयन में भारत की प्रगति को दर्शाती है। साथ ही यह भारत की अद्यतन राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (NBSAP) के लक्ष्य-13 में योगदान को भी उजागर करती है। इससे पहले भारत ने नवंबर 2017 में अंतरिम राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।
कैसा है भारत का ABS स्ट्रक्चर
भारत में एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) ढांचा जैव विविधता अधिनियम 2002, जैव विविधता नियम 2024 और ABS विनियम 2025 के तहत संचालित होता है। इसमें तीन स्तरीय संस्थागत ढांचा है—राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, राज्य जैव विविधता बोर्ड/केंद्रशासित प्रदेश जैव विविधता परिषद और स्थानीय स्तर पर जैव विविधता प्रबंधन समितियां (BMCs)। देशभर में अब तक 2,76,653 से अधिक BMCs स्थापित की जा चुकी हैं, जिससे समुदाय की भागीदारी मजबूत हुई है।
अनुमोदन और आर्थिक लाभ
2017–2025 के दौरान भारत ने 12,830 ABS अनुमोदन जारी किए, जिनमें 5,913 अनुमोदन NBA द्वारा और 6,917 अनुमोदन SBBs/UTBCs द्वारा दिए गए। भारत ने 3,556 अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त अनुपालन प्रमाणपत्र (IRCCs) भी जारी किए, जो वैश्विक कुल का 60% से अधिक है। इस अवधि में ₹216.31 करोड़ की राशि जुटाई गई, जिसमें से ₹139.69 करोड़ स्थानीय समुदायों, किसानों और पारंपरिक ज्ञान धारकों को वितरित किए गए।
भारत और नागोया प्रोटोकॉल
भारत ने नागोया प्रोटोकॉल के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए व्यापक जागरूकता और क्षमता निर्माण कार्यक्रम चलाए। देशभर में 3,724 कार्यशालाओं के माध्यम से 2,56,393 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया और 600 से अधिक क्षमता निर्माण पहलें आयोजित की गईं। मजबूत कानूनी ढांचे, संस्थागत व्यवस्था और सामुदायिक भागीदारी के कारण भारत नागोया प्रोटोकॉल के क्रियान्वयन में वैश्विक स्तर पर अग्रणी देशों में शामिल हो गया है।
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