भारत में मनाया जाने वाला सबसे लंबा त्योहार कौन-सा है, जानें यहां

Last Updated: Mar 17, 2026, 18:22 IST

भारत में दशहरा का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के बस्तर दशहरा की बात अलग है। यह दो महीने से अधिक चलता है, जिससे यह सबसे लंबा त्योहार बन जाता है।

भारत का सबसे लंबा मनाया जाने वाला त्योहार
भारत का सबसे लंबा मनाया जाने वाला त्योहार

भारत को त्योहारों का देश कहा जाता है। यहां हर त्योहार का अपना महत्त्व है, जिसमें हर्ष और उल्लास के रंग देखने को मिलते हैं। इस कड़ी में यहां दशहरा का त्योहार भी शामिल है, जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर मनाया जाता है।

हालांकि, यहां हम यदि बस्तर के दशहरा की बात करें, तो यह बस्तर दशहरा बन जाता है, जो कि भारत का सबसे लंबा मनाया जाने वाला त्योहार है। यह त्योहार दो महीने से अधिक तक चलता है। क्या है इसके पीछे की कहानी और वजह, जानने के पूरा लेख पढ़ें। 

कितने दिनों तक चलता है बस्तर दशहरा

भारत में आमतौर पर दशहरा के पर्व 9 दिनों पहले शुरू हो जाता है, जिसमें रामलीला का मंचन किया जाता है। हालांंकि, छत्तीसगढ़ का बस्तर दशहरा 9 या 10 दिनों तक नहीं, बल्कि 75 दिनों तक मनाया जाता है। 

कब से कब तक मनाया जाता है त्योहार

बस्तर दशहरा की शुरुआत सावन महीने की अमावस्या से शुरू होती है और अश्विन माह की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तक यह पर्व मनाया जाता है।

क्या है बस्तर दशहरा का इतिहास

बस्तर दशहरा के इतिहास की बात करें, तो इसकी शुरुआत 13वीं शताब्दी में काकतीय वंश के राजा रहे पुरुषोत्तम देव द्वारा की गई थी। ऐसे में यह एक प्राचीन परंपरा बन गई है।

भगवान राम और रावण से नहीं है संबंध

बस्तर दशहरा का भगवान राम द्वारा किए गए रावण के वध से संबंध नहीं है, बल्कि यह त्योहार स्थानीय कुल देवी दंतेश्वरी माई को समर्पित है। ऐसे में त्योहार में रावण का पुतला नहीं जलाते हैं, बल्कि प्रकृति और जनजातीय परंपराओं को पूजा जाता है।

75 दिनों तक मनाई जाती हैं ये परंपराएं

-त्योहार में लकड़ी के लट्ठे की पूजा की जाती है, जिससे रथ बनाया जाता है।

-त्योहार में एक बड़ा रथ तैयार किया जाता है, जिसे आदिवासी लोग खींचते हैं। इस रथ को बनाने में एक भी कील का उपयोग नहीं होता है।

-उत्सव जब समाप्त होता है, तब एक बड़ी सभा होती है। इस सभा में प्रतीकात्मक रूप से राजा और जनता के बीच संवाद होता है। इसे मुरिया दरबार कहते हैं।

-इस पर्व में जनजातीय मिलन भी होता है, जिसमें बस्तर की विभिन्न जनजाति आपस में मिलती हैं और सांस्कृतिक एकता का संदेश देती हैं। इस दौरान लोग अपने-अपने स्थानीय देवताओं को लेकर उत्सव में आते हैं।

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Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior content writer

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First Published: Mar 17, 2026, 18:22 IST

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