KGF के बाद मिली नई सोने की खदान! जानें देश की पहली प्राइवेट गोल्ड माइन के बारें में

Last Updated: Jun 30, 2026, 11:15 IST

India's First Private Gold Mine: आजादी के बाद भारत की पहली निजी सोने की खदान का उद्घाटन आंध्र प्रदेश में किया गया है. गोल्ड माइन के खनन का शुभारंभ मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने खुद किया. यह भारत में निजी गोल्ड माइनिंग के एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है.

KGF के बाद भारत को मिला नया गोल्ड डेस्टिनेशन
KGF के बाद भारत को मिला नया गोल्ड डेस्टिनेशन

भारत की गोल्ड माइनिंग की कहानी में एक नया अध्याय जुड़ गया है। आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले के जोंनागिरी में देश की बड़ी निजी गोल्ड माइनिंग और प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट की शुरुआत हो गयी है। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने खुद ही इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया। ₹405 करोड़ की लागत वाले  इस प्रोजेक्ट को डेक्कन गोल्ड माइन्स लिमिटेड और जियो मैसूर सर्विसेज़ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड मिलकर आगे बढ़ा रहे हैं। 

इसकी अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जोंनागिरीगांव को अब “स्वर्णगिरी” नाम दिया गया है,  यानी एक ऐसा क्षेत्र जिसे राज्य भविष्य के गोल्ड हब के रूप में देख रहा है।

सरकार के लिए एक स्वर्णिम अवसर 

यह प्रोजेक्ट सरकार के लिए सिर्फ सोना निकालने की योजना नहीं है, बल्कि राजस्व और रोजगार का बड़ा जरिया है। सोने के उत्पादन पर राज्य सरकार को 4% रॉयल्टी मिलेगी। शुरुआती अनुमान की माने तो 400 किलो सोना उत्पादन से करीब ₹57 करोड़ की आय होगी वहीं 900 किलो उत्पादन तक पहुंचने पर करीब ₹144 करोड़ की रॉयल्टी मिलेगी।

बढ़ेंगे रोजगार के साधन

इसके अलावा करीब 700 लोगों को सीधे रोजगार मिलने की उम्मीद है। लंबे समय में यह प्रोजेक्ट आसपास के क्षेत्रों में कारोबार, परिवहन और अन्य सेवाओं को भी बढ़ावा दे सकता है।

KGF के बाद भारत को मिला नया गोल्ड डेस्टिनेशन

भारत में जब भी सोने की खदानों की बात होती है, तो सबसे पहले कर्नाटक का कोलर गोल्ड फील्ड Kolar Gold Fields (KGF) याद आता है। KGF ने करीब 120 वर्षों तक देश के लिए सोने का उत्पादन किया और दुनिया की सबसे गहरी खदानों में शामिल रही। लेकिन 2001 में इसके बंद होने के बाद देश में निजी क्षेत्र की बड़ी गोल्ड माइनिंग लगभग खत्म हो गई थी।

30 साल की मेहनत के बाद मिली सफलता 

स्वर्णगिरी की कहानी सिर्फ एक खदान की नहीं, बल्कि दशकों की खोज और धैर्य की कहानी है। बता दें कि कंपनी ने 1990 के दशक में यहां संभावनाएं तलाशनी शुरू की थीं। साल 2006 में माइनिंग लीज के लिए आवेदन किया गया और वर्षों की जांच, निवेश और योजना के बाद अब जाकर उत्पादन शुरू हुआ है।

आसान नहीं होती गोल्ड माइनिंग  

गोल्ड माइनिंग आसान काम नहीं होता इसके लिए पहले जमीन के अंदर मौजूद संसाधन का पता लगाना, फिर उसे आर्थिक रूप से निकालना और आखिर में उत्पादन तक पहुंचना एक लंबी और जोखिम भरी प्रक्रिया होती है।

नई नीतियों ने बदली भारत की माइनिंग तस्वीर

जोंनागिरी प्रोजेक्ट इस बात का उदाहरण है कि नीतिगत बदलाव कैसे निजी निवेश को बढ़ावा दे सकते हैं। 2015 के बाद खनिज ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाया गया। वहीं 2021 के सुधारों ने उन निजी कंपनियों को ज्यादा अधिकार दिए, जो खुद खनिज खोजती और विकसित करती हैं।

कितना सोना है यहां?

स्वर्णगिरी प्रोजेक्ट करीब 1,500 एकड़ क्षेत्र में फैली है। पहले फेज में 600 एकड़ में खनन शुरू किया गया है। कंपनी के अनुसार यहां करीब 8.2 मिलियन टन गोल्ड अयस्क मौजूद है। यहां पर औसत गोल्ड ग्रेड 1.49 ग्राम प्रति टन है और लगभग 12 टन सोने का संसाधन मौजूद होने का अनुमान है।

बनेगा नया ज्वैलरी मैन्युफैक्चरिंग पार्क

सीएम चंद्रबाबू नायडू ने उद्घाटन के दौरान कहा कि उत्पादित गोल्ड से ज्वैलरी मैन्युफैक्चरिंग के लिए, प्रोजेक्ट के पास ही एक अत्याधुनिक गोल्ड ज्वैलरी मैन्युफैक्चरिंग पार्क भी स्थापित किया जायेगा।   

KGF जहां गहरी भूमिगत खदानों के लिए मशहूर था, वहीं स्वर्णगिरी आधुनिक ओपन-पिट माइनिंग मॉडल पर काम कर रहा है। यह भारत में निजी गोल्ड माइनिंग के एक नए दौर की शुरुआत हो सकती है।

Bagesh Yadav
Bagesh Yadav

Senior Executive - Editorial

Bagesh Yadav is a journalist and current affairs analyst with over six years of experience in education journalism, national and international affairs, and digital media. He has contributed to India’s leading knowledge platforms, including Vision IAS and Only IAS, and currently serves in a senior editorial role at Jagranjosh.com, where he leads coverage across the Current Affairs and General Knowledge sections. His expertise spans breaking news, government policy analysis, world affairs, sports updates, science and technology, and visually engaging infographics. Known for his commitment to factual accuracy, editorial integrity, and audience-first storytelling, Bagesh delivers well-researched, accessible, and impactful journalism that serves millions of students, competitive exam aspirants, and informed readers across India.

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First Published: Jun 29, 2026, 13:08 IST

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