भारत का पहला Bio-Happy जिला कौन-सा है, जानें नाम

Last Updated: Apr 20, 2026, 14:06 IST

भारत में आपने अलग-अलग जिलों के बारे में पढ़ा और सुना होगा। हालांकि, क्या आप भारत के पहले Bio-Happy जिले के बारे में जानते हैं, जो कि जैव विविधता के लिहाज से एक महत्त्वपूर्ण जैव-सुखद जिला बन रहा है। यह जिला अरूणाचल प्रदेश में स्थित है।

पहला बायो-हैप्पी जिला
पहला बायो-हैप्पी जिला

भारत में यदि कुल जिलों की बात करें, तो इनकी संख्या 790 से अधिक है। इन जिलों में से एक जिला ऐसा भी है, जो कि भारत का पहला जैव-सुखद यानि कि Bio-Happy जिला बन रहा है। यह जिला अरूणाचल प्रदेश का केयी पान्योर जिला है, जो कि एक नया जिला है। जिले की जैव-सुखद जिला बनने की घोषणा इस वर्ष ही की गई है। क्या होता है जैव-सुखद जिला और क्या है इसका उद्देश्य, जानने के लिए पूरा लेख पढे़ं।

एमएस स्वामीनाथन फाउंंडेशन की है योजना 

Bio-Happy जिले का आधार एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन द्वारा तैयार किया गया है। हालांकि, इसे जिला प्रशासन के सहयोग से अमलीजामा पहनाया जा रहा है। फाउंडेशन की अध्यक्ष सौम्या स्वामीनाथन के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य केयी पान्योर में आजीविका, कृषि-जैव विविधता और पारिस्थितिक तंत्र का आकलन करना है।

स्वामीनाथन के अनुसार, जैव-सुखदता उस स्थिति को बताती है, जो जैव विविधता के संरक्षण और सतत उपयोग से प्राप्त होती है, जिससे पोषण, स्वास्थ्य और आय में सुधार होता है और लोगों और प्रकृति के बीच सामंजस्य स्थापित होता है।

Bio-Happy परियोजना के तहत क्या होगा?

बायो-हैप्पी डिस्ट्रिक्ट परियोजना के तहत स्थानीय कृषि प्रणालियों, पारंपरिक ज्ञान और जैव विविधता वाले भूदृश्यों का अध्ययन होगा। अरुणाचल प्रदेश पहले से ही अपनी पारिस्थितिक जैव विविधता के लिए विख्यात है। यह राज्य संरक्षण और आर्थिक सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने और विकास दृष्टिकोण के परीक्षण के लिए एक आदर्श स्थान माना जाता है। 

मध्य प्रदेश का मंडला जिला भी टॉप पर

कुछ लेखों में आपको भारत का पहला Bio-Happy जिला मध्य प्रदेश के मंडला पढ़ने को मिलेगा। इस जिले में पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ लोगों के जीवन स्तर और खुशी को जोड़ने का एक अलग मॉडल तैयार किया गया है। 

जिले की प्रमुख विशेषताएं

-मंडला जिले के किसानों को रसायनों को छोड़कर जैविक खाद अपनाने के लिए प्रेरित किया गया है, जिससे अच्छी फसल भी हो।

-यहां बायो-हैप्पी को स्वस्थ भोजन, स्वच्छ वातावरण और खुशहाल जीवन से जोड़ा गया है, जिससे बैलेंस बना रहे।

-इस योजना के तहत मिलेट्स जैसे पांरपिरक मोटे अनाजों के उत्पादन को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है। इससे किसानों का लाभ हुआ है।

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Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior content writer

A seasoned journalist with over 7 years of extensive experience across both print and digital media, skilled in crafting engaging and informative multimedia content for diverse audiences. His expertise lies in transforming complex ideas into clear, compelling narratives that resonate with readers across various platforms. At Jagran Josh, Kishan works as a Senior Content Writer (Multimedia Producer) in the GK section. He writes on national and international topics from a GK perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com

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First Published: Apr 20, 2026, 14:06 IST

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