भारत में आग सुरक्षा का संवैधानिक और कानूनी ढांचा, परीक्षा एंगल से समझें
UPSC और PCS की सिविल सेवा परीक्षा के एंगल से देखें, तो 'आग और अग्नि सुरक्षा' (Fire and Fire Safety) का मुद्दा एक महत्त्वपूर्ण मुद्दा है। यह मुख्य रूप से GS Paper 3 (आपदा प्रबंधन - Disaster Management), GS Paper 2 (गवर्नेंस और वैधानिक निकाय) और एथिक्स (GS Paper 4 - प्रशासनिक शिथिलता और जवाबदेही) से जुड़ा हुआ है।
इन दिनों देश के विभिन्न शहरों में आग की घटनाएं देखने को मिल रही हैं। इस कड़ी में यदि इसे परीक्षा के एंगल से देखें, तो UPSC और PCS की सिविल सेवा परीक्षाओं के लिए यह महत्त्वपूर्ण विषय बन जाता है। क्योंकि, यह GS Paper 3 (आपदा प्रबंधन - Disaster Management), GS Paper 2 (गवर्नेंस और वैधानिक निकाय) और एथिक्स (GS Paper 4 - प्रशासनिक शिथिलता और जवाबदेही) से जुड़ा हुआ मुद्दा है। इस लेख में हम इसके कानूनी ढांचे और नियमों के बारे में जानेंगे।
अग्नि सेवाएं हैं राज्य सूची का विषय
भारतीय संविधान की 7वीं अनुसूची के तहत अग्नि सेवाएं राज्य सूची में आती हैं। वहीं, 12वीं अनुसूची के तहत अग्नि सेवाओं को नगर पालिकाओं और शहरी निकायों के कार्यों में शामिल किया गया है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि वर्तमान में पूरे देश में कोई एकल केंद्रीय अग्नि सुरक्षा अधिनियम नहीं है। प्रत्येक राज्य का अपना फायर सर्विस एक्ट होता है।
आग सुरक्षा से जुड़े प्रमुख नियम और दिशा-निर्देश
राष्ट्रीय स्तर पर आग से निपटने के लिए कुछ संहिताएं और दिशा-निर्देश हैं, जो कि इस प्रकार हैंः
नेशनल बिल्डिंग कोड ऑफ इंडिया, 2016
यह कोड भारत में भवन निर्माण और आग सुरक्षा से संबंधित है। इसके भाग-4 में आग और जीवन सुरक्षा के बारे में नियम दिये गए हैं, जो कि इस प्रकार हैंः
-बिल्डिंग को उनकी ऊंचाई और उपयोग के आधार पर वर्गीकृत किया गया है।
-प्रत्येक बहुमंजिला इमारत या 15 मीटर से अधिक ऊंची इमारत में स्वचलित स्प्रिंकलर सिस्टम, फायर अलार्म, होस रील और अग्निशामक यंत्र होने चाहिए।
-बिल्डिंग में आपातकालीन निकासी और फायर लिफ्ट के साथ रिफ्यूज एरिया होना चाहिए।
-सीढ़ियों और मुख्य रास्तों पर ऐसे दरवाजे लगे हो, जो कि आग को कुछ देर तक रोक सके।
-किसी भी व्यावसायिक या बहुमंजिला इमारत को प्रयोग में लाने से पहले दमकल विभाग से Fire NOC लेना अनिवार्य है। साथ ही, इसे हर साल या तीन साल में रिन्यू कराना भी जरूरी है।
क्या कहती हैं NDMA की गाइडलाइंस
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की ओर से स्कूल, अस्पताल और सार्वजनिक स्थानों के लिए विशेष 'अग्नि सुरक्षा आवश्यकताएं' जारी की गई हैं। इसमें नियमित Fire Mock Drill से लेकर स्टाफ की ट्रेनिंग को अनिवार्य बताया गया है।
आग लगने पर क्या हैं नियम
यदि किसी स्थान पर आग लगती है, तो आपदा प्रतिक्रिया के तहत मानक संचालन प्रक्रियाओं का पालन करना होता है, जो कि इस प्रकार हैंः
-आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (DM Act, 2005) लागू होना
आग लगने पर जिले का मजिस्ट्रेट यानि कि DM जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के अध्यक्ष के रूप में सक्रिय हो जाता है। इस कानून के लागू होने पर प्रशासन किसी भी निजी संपत्ति को नियंत्रण में लेने के साथ रास्तों को सील करने और संसाधनों को मोबिलाइज करने का असीमित अधिकार रखता है।
-फायर सर्विसेज एक्ट की धाराएं
-इस एक्ट के तहत दमकल अधिकारियों को आग बुझाने के दौरान किसी भी परिसर में प्रवेश करने से लेकर दीवारों को तोड़ने या फिर पानी की पाइपलाइनों को अपने नियंत्रण में लेने का कानूनी अधिकार मिल जाता है। ऐसे में यदि इस दौरान कोई नुकसान होता है, तो दमकल विभाग के ऊपर आप किसी भी प्रकार का मुकदमा नहीं कर सकते हैं।
-पुलिस और आपराधिक कानून के तहत कार्रवाई
आग बुझने के बाद पुलिस घटना की जवाबदेही तय करती है। इस दौरान यदि फायर सेफ्टी ऑडिट नहीं नहीं करवाया होता है या फिर उपकरण बंद मिलते हैं, तो लापरवाही का मामला बनता है।
क्या कोई राहत राशि मिलती है ?
किसी स्थान पर आग लगने की स्थिति में जान-माल का नुकसान देखते हुए मुख्यमंत्री या फिर प्रधानमंत्री राहत कोष से अनुग्रह राशि की घोषणा की जा सकती है। इसके अतिरिक्त, कमर्शियल प्रोपर्टी के लिए सर्वेयर की रिपोर्ट और पुलिस की फायर इंसीडेंट रिपोर्ट को आधार बनाया जाता है, जिससे बीमा क्लेम पास होता है।
क्या हो सकती है आगे की राह
कुछ जरूरी नियमों और बातों का पालन कर समस्या को कम किया जा सकता है, जो कि इस प्रकार हैः
-सभी राज्यों को अपने कानूनों को आधुनिक बनाने के लिए केंद्रीय आदर्श अग्नि सेवा विधेयक को अपनाना चाहिए।
-फायर NOC की प्रक्रिया पारदर्शी होने के साथ ऑनलाइन और मानवीय हस्तक्षेप से फ्री होनी चाहिए।
-आग की घटनाओं में संबंधित व्यक्तियों की जवाबदेही तय हो।
-जापान में स्कूल और सोसायटी में कम्यूनिटी डिजास्टर मैनेजमेंट और फायर ड्रिल पाठ्यक्रम में अनिवार्य है। इस मॉडल को भी भारत में भी अपनाया जा सकता है।
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