S-400 Sudarshan Chakra: भारत को मिली चौथी स्क्वाड्रन, ऑपरेशन सिंदूर में दिखा था दम, जानें कितना ताकतवर है यह सुरक्षा कवच

Last Updated: Jun 5, 2026, 13:01 IST

S-400 Sudarshan Chakra: भारत को रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की चौथी स्क्वाड्रन मिल गई है, जिससे देश की वायु सुरक्षा और मजबूत होगी। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी इसकी भूमिका चर्चा में रही थी। जानें यह एडवांस एयर डिफेन्स सिस्टम कैसे 400 किमी तक दुश्मन के हवाई खतरों को निशाना बनाने में सक्षम है।

भारत को मिली S-400 की चौथी स्क्वाड्रन
भारत को मिली S-400 की चौथी स्क्वाड्रन

S-400 Sudarshan Chakra: भारत की वायु रक्षा क्षमता को एक और बड़ी मजबूती मिली है। रूस से निर्मित एडवांस S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की चौथी स्क्वाड्रन भारत पहुंच गई है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, यह सिस्टम कुछ दिन पहले समुद्री मार्ग से भारत लाया गया और जल्द ही इसे एक अहम रणनीतिक क्षेत्र में तैनात भी किया जाएगा। यहां हम इस एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम के बारे में विस्तार से चर्चा करने जा रहे हैं। 

जल्द मिलेगी पांचवीं और आखिरी स्क्वाड्रन

रक्षा अधिकारियों का कहना है कि पांचवीं और अंतिम स्क्वाड्रन भी आने वाले महीनों में भारत पहुंच सकती है। युद्ध के कारण प्रभावित हुई सप्लाई चेन अब धीरे-धीरे सामान्य हो रही है, जिससे डिलीवरी प्रक्रिया में तेजी आई है। 

अतिरिक्त S-400 खरीदने की तैयारी

भारत सिर्फ पांच स्क्वाड्रन तक सीमित रहने के मूड में नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार अतिरिक्त S-400 सिस्टम खरीदने की संभावनाओं पर भी रूस के साथ बातचीत कर रही है। बदलते सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए लंबी दूरी की एयर डिफेंस क्षमता को और मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। 

ऑपरेशन सिंदूर में दिखी ताकत 

हाल ही में हुए "ऑपरेशन सिंदूर" के दौरान S-400 की भूमिका चर्चा का विषय रही। रक्षा सूत्रों का दावा है कि इस सिस्टम ने पाकिस्तान की ओर से उत्पन्न कई हवाई खतरों को निष्क्रिय करने में अहम योगदान दिया।

सूत्रों के मुताबिक, S-400 ने 300 किलोमीटर से अधिक दूरी पर एक महत्वपूर्ण पाकिस्तानी निगरानी विमान को निशाना बनाया। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे इस प्रणाली की क्षमताओं को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।

क्या है S-400 और कैसे करता है काम?

S-400 दुनिया के सबसे एडवांस लंबी दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम में गिना जाता है। रूस द्वारा विकसित यह प्रणाली लड़ाकू विमान, ड्रोन, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे खतरों को पहचानने और उन्हें हवा में ही नष्ट करने में सक्षम है।

इस सिस्टम में शक्तिशाली रडार, कमांड सेंटर और मोबाइल लॉन्चर शामिल होते हैं। रडार पहले टारगेट का पता लगाता है, फिर कमांड सेंटर खतरे का विश्लेषण कर उपयुक्त मिसाइल को लॉन्च करने का आदेश देता है। इसके बाद मिसाइल लक्ष्य का पीछा करते हुए उसे नष्ट कर देती है।

S-400 की सबसे बड़ी खासियत

S-400 की सबसे बड़ी ताकत इसकी लंबी मारक क्षमता और एक साथ कई लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसका रडार 600 किलोमीटर तक लक्ष्य पहचान सकता है, जबकि इसकी सबसे लंबी दूरी की मिसाइल लगभग 400 किलोमीटर तक हमला कर सकती है।

यह सिस्टम एक साथ सैकड़ों लक्ष्यों को ट्रैक करने और कई खतरों को इंटरसेप्ट करने में सक्षम माना जाता है। यही वजह है कि इसे आधुनिक युद्ध का गेम-चेंजर एयर डिफेंस सिस्टम कहा जाता है।

S-400 एयर डिफेन्स सिस्टम हाई-लाइट्स 

सिस्टम का नाम

S-400 Triumf (भारत में लोकप्रिय नाम: सुदर्शन चक्र)

निर्माता

रूस की अल्माज-आंते (Almaz-Antey)

प्रकार

लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली (SAM) एयर डिफेंस प्रणाली

कुल स्क्वाड्रन

5

भारत को प्राप्त

4 स्क्वाड्रन (जून 2026 तक)

अधिकतम मारक क्षमता

400 किमी

रडार डिटेक्शन रेंज

लगभग 600 किमी

लक्ष्य

लड़ाकू विमान, ड्रोन, क्रूज मिसाइल, बैलिस्टिक मिसाइल

प्रमुख मिसाइलें

40N6, 48N6DM, 9M96 सीरीज

खासियत

मल्टी-लेयर एयर डिफेंस, लंबी दूरी से इंटरसेप्शन

भारत के लिए क्यों है महत्वपूर्ण? 

भारत के सामने पश्चिम और उत्तर दोनों दिशाओं से सुरक्षा चुनौतियां मौजूद हैं। ऐसे में S-400 भारतीय वायुसेना और महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करता है।

यह दुश्मन के लड़ाकू विमानों, ड्रोन और मिसाइलों को भारतीय सीमा के काफी करीब आने से पहले ही चुनौती दे सकता है। यही कारण है कि इसे केवल रक्षा प्रणाली नहीं, बल्कि एक प्रभावी रणनीतिक प्रतिरोधक भी माना जाता है।

2018 के ऐतिहासिक रक्षा सौदे का हिस्सा

S-400 की यह डिलीवरी भारत और रूस के बीच 2018 में हुए 5.43 अरब डॉलर के रक्षा समझौते के तहत की गई है। इस सौदे में भारत को कुल पांच S-400 स्क्वाड्रन मिलनी हैं। अब तक चार स्क्वाड्रन की आपूर्ति हो चुकी है, जबकि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण शेष सिस्टम की डिलीवरी में देरी हुई थी।

प्रोजेक्ट कुशा: स्वदेशी सुरक्षा कवच की ओर कदम

जहां S-400 भारत की मौजूदा सुरक्षा जरूरतों को पूरा कर रहा है, वहीं देश भविष्य के लिए स्वदेशी समाधान भी तैयार कर रहा है। DRDO का महत्वाकांक्षी "प्रोजेक्ट कुशा" (Project Kusha) इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।

इस परियोजना के तहत लंबी दूरी की तीन इंटरसेप्टर मिसाइलें विकसित की जा रही हैं-

M1 इंटरसेप्टर:  लगभग 150 किमी रेंज

M2 इंटरसेप्टर:  लगभग 250 किमी रेंज

M3 इंटरसेप्टर: लगभग 350 से 400 किमी रेंज

इसका उद्देश्य एक ऐसा स्वदेशी मल्टी-लेयर एयर डिफेंस नेटवर्क तैयार करना है, जो भविष्य में S-400 जैसी क्षमताएं प्रदान कर सके। 

भारत की भविष्य की वायु सुरक्षा 

भारत फिलहाल S-400, बराक-8 और अन्य एयर डिफेंस सिस्टम को एकीकृत कर मजबूत सुरक्षा ढांचा तैयार कर रहा है। आने वाले वर्षों में प्रोजेक्ट कुशा के शामिल होने के बाद देश की वायु रक्षा क्षमता और अधिक आत्मनिर्भर तथा शक्तिशाली हो जाएगी। 

विशेषज्ञों का मानना है कि S-400 और प्रोजेक्ट कुशा का संयोजन भारत को दुनिया की सबसे मजबूत मल्टीलेयर एयर डिफेंस प्रणालियों वाले देशों की सूची में और मजबूती से स्थापित कर सकता है।

प्रतियोगी परीक्षा की दृष्टि से कैसे महत्वपूर्ण है यह आर्टिकल

यह लेख प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें भारत की वायु रक्षा क्षमता, S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, भारत-रूस रक्षा सहयोग, ऑपरेशन सिंदूर, मिसाइल तकनीक और DRDO के प्रोजेक्ट कुशा जैसी महत्वपूर्ण समसामयिक व रक्षा संबंधी जानकारियां शामिल हैं, जो UPSC, SSC, CDS और राज्य परीक्षाओं में पूछी जाती हैं। 

Bagesh Yadav
Bagesh Yadav

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Bagesh Yadav is an experienced content professional with over 5 years of experience in covering education, general news, national, and international affairs. He has contributed to leading platforms like Vision IAS and Only IAS. Bagesh specializes in crafting impactful content, including current news articles, trending stories, sports updates, world affairs, and engaging infographics. He delivers high-quality, informative, and inspiring content, focusing on audience engagement and achieving positive results. Currently working as a Senior Content Writer for the Current Affairs and General Knowledge sections of jagranjosh.com, he can be reached at bagesh.yadav@jagrannewmedia.com.

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First Published: Jun 5, 2026, 12:58 IST

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