प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में समय का महत्त्व है। बात समय की हो और घड़ी का जिक्र न हो, ऐसा नहीं हो सकता है। भारत में यूं, तो बहुत-से शहर हैं, लेकिन इनमें से एक शहर ऐसा भी है, जिसे घड़ियों का शहर भी कहा जाता है। यह शहर तमिलनाडू का होसुर है, जिसे City of Watches के नाम से पहचान मिली हुई है। होसुर व घड़ी से जुड़े संबंध के बारे में हम विस्तार से जानेंगे।
होसुर क्यों है घड़ियों का केंद्र
होसुर में दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी घड़ी निर्माता कंपनी का प्लांट मौजूद है। ऐसे में यहां बड़ी संख्या में घड़ियों का उत्पादन किया जाता है। घड़ी निर्माण की वजह से शहर की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से बदल गई है। क्योंकि, यहां न सिर्फ घड़ियों को बनाया जाता है, बल्कि उनके सूक्ष्म पुर्जे भी बनाए जाते हैं।
होसुर में घड़ी के साथ इसका भी होता है निर्माण
आपको बता दें कि होसुर में घड़ियों के साथ-साथ आभूषण का भी निर्माण किया जाता है। ऐसे में यहां इंजीनियरिंग उद्योग भी फल-फूल रहा है। यही वजह है कि इस क्षेत्र को भारत के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में गिना जाता है।
मोरबी की है ऐतिहासिक पहचान
यदि हम ऐतिहासिक या दीवार घड़ियों की बात करें, तो गुजरात का मोरबी शहर दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यह घड़ी निर्माण के क्षेत्र में भारत में सबसे टॉप पर आता है। इस शहर को घड़ियों का हब भी कहा जाता है। यहां कई बड़ी घड़ी ब्रांड की कंपनियों के कारखानें हैं, जहां गुणवत्तापूर्ण घड़ियों का निर्माण किया जाता है।
उत्तर भारत का यह शहर है प्रसिद्ध
यदि उत्तर भारत में देखें, तो हिमाचल प्रदेश का सोलन शहर घड़ियों के लिए जाना जाता है। यहां एक समय पर HMT (Hindustan Machine Tools) की एक बड़ी इकाई हुआ करती थी। हालांकि, अब HMT का घड़ी निर्माण बंद हो चुका है, लेकिन आज भी इस शहर को लोग घड़ी निर्माण के लिए जानते हैं।
स्थानीय लोगों के बीच में शहर की पहचान घड़ी वाले शहर के रूप में है। वर्तमान में सोलन में कई आयुर्वेदिक और अंग्रेजी दवाइयों के बड़े कारखाने हैं, जहां से देश के अलग-अलग राज्यों में दवाइयों की आपूर्ति की जाती है।