भारत में जनगणना 2026-27 की शुरुआत हो गई है। इस बार इसे दो चरणों में पूरा किया जाएगा, जिसके तहत पहले चरण में मकान और निवास का डाटा एकत्रित होगा और दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा, जिसमें शिक्षा, लिंग, धर्म और जाति से जुड़े आंकड़े शामिल रहेंगे।
हालांकि, यह पहली बार नहीं है, जब भारत में जनगणना हो रही है। इसकी शुरुआत 202 साल पहले उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 1824 में हुई थी, जब आर. गुलाब ने शहर की जनगणना कराई थी। इस लेख में हम भारत की जनगणना के बारे में जानेंगे।
1800 में कब-कब हुई जनगणना
साल 1824 में इलाहाबाद में आर. गुलाब ने पहली बार जनगणना कराई थी। इसके बाद 1827-28 में बनारस में जेम्स प्रिंसेप ने जनगणना करवाई। वहीं, 1830 में ढाका में हेनरी वाल्टर ने जनगणना कराई, जिसे पहली और पूरी तरह आधुनिक शहर की जनगणना माना गया।
कब हुई पहली देशव्यापी जनगणना
भारत में पहली बार देशव्यापी जनगणना 1872 में गवर्नर जनरल लॉर्ड मेयो के कार्यकाल में हुई थी। हालांकि, यह एक ही समय पर नहीं हुई थी और इस दौरान कई क्षेत्र शामिल नहीं हो सके थे। इस वजह से इस जनगणना को सही नहीं माना जाता है।
भारत में कब हुई पहली नियमित जनगणना
भारत में पहली नियमित जनगणना 1881 में गवर्नर जनरल रहे लॉर्ड रिपन के कार्यकाल में हुई थी। उस समय डब्ल्यू. सी. प्लाउडेन के नेतृत्व में पूरे देश में एक साथ जनगणना की गई थी। इसके बाद हर 10 साल में एक बार जनगणना की परंपरा शुरू हुई थी।
आजादी के बाद कब हुई पहली जनगणना
आजादी के बाद जनगणना का महत्त्व और भी बढ़ गया था, क्योंकि सरकार को आर्थिक नीतियों और विकास को बढ़ावा देने के लिए जनगणना के सटीक आंकड़ें चाहिए थे। ऐसे मे 1951 में आजाद भारत की पहली जनगणना की गई। हालांकि, इसके लिए जनगणना अधिनियम, 1948 बना। इसके तहत ही भारत में जनगणना की जाती है।
2011 में आखिरी बार हुई थी जनगणना
भारत में आखिरी बार 2011 में जनगणना हुई थी। यह देश की 15वीं और आजाद भारत की 7वीं जनगणना थी। इसकी थीम "हमारी जनगणना, हमारा भविष्य" तय की गई थी। इसके बाद साल 2021 में भारत की पहली डिजिटल जनगणना होनी थी, लेकिन कोविड महामारी की वजह से यह जनगणना नहीं हो सकी। ऐसे में अब साल 2026 में 1 अप्रैल से इसकी शुरुआत हुई है और साल 2027 तक इसके आंकड़ें जारी किए जाएंगे।
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