गुब्बारे बेचने से हुई थी शुरुआत, आज 55,000 करोड़ के साथ है देश की सबसे बड़ी टायर कंपनी

Last Updated: Jul 28, 2026, 13:43 IST

के.एम.मेमन मपिल्लई ने अपनी मेहनत और संघर्ष के आगे किस्मत को भी झुका दिया था। उन्होंने गुब्बारे बेचने से अपने बिजनेस की शुरुआत की थी, जिसके बाद आज उनकी कंपनी MRF देश की सबसे बड़ी टायर कंपनी बन गई है।  

मपिल्लई
मपिल्लई

सफलता सिर्फ उन्हीं लोगों के हिस्से में आती है, जो कि मेहनत का साथ नहीं छोड़ते और लगन से मुंह नहीं मोड़ते हैं। इन्हीं में शामिल हैं के.एम.मेमन मपिल्लई, जिन्होंने अपने मेहनत और संघर्ष के आगे किस्मत को भी झुका दिया था। उन्होंने खुद के दम पर एक शेड में गुब्बारे बेचने से अपना बिजनेस शुरू किया और आज उनकी कंपनी MRF नाम से जानी जाती है, जो कि देश की सबसे बड़ी टायर कंपनी बन चुकी है। 

1946 में हुई थी शुरुआत

के.एम.मैमन मपिल्लई केरल के एक ईसाई परिवार से ताल्लुक रखते थे। कभी उनके परिवार का बिजनेस में काफी नाम हुआ करता था, लेकिन एक समय उनके सामने आर्थिक संकट आ गया। मपिल्लई ने मद्रास कॉलेज से पढ़ाई पूरी की और इसके बाद अपना बिजनेस करने का फैसला किया। उन्होंने 1946 में चेन्नई के तिरुवेत्तियूर में एक शेड में गुब्बारे बनाने का काम शुरू किया।

1949 में शुरू किया खिलौने बनाने का काम

कंपनी ने साल 1949 में लेटेक्स के खिलौने बनाने का काम शुरू किया। इसके साथ ही कंपनी की ओर से रबड़ के दस्ताने और अन्य उत्पाद बनाए, जिससे धीरे-धीरे कंपनी का दायर बढ़ने लगा।

1952 में ट्रैड रबड़ बनाने की शुरुआत की

कंपनी के मालिक मपिल्लई ने देखा कि 1952 में बस और ट्रकों के लिए टायर की मांग बढ़ रही है, जिसके लिए बाहर से टायर मंगवाए जाते थे। ऐसे में उन्होंने ट्रैड रबड़ बनाने की शुरुआत की और 1956 तक इस फील्ड में 50 फीसदी तक अपना कब्जा कर लिया था।

1960 में बनी MRF कंपनी

मपिल्लई ने ट्रैड रबड़ के साथ-साथ अब अपने देश में ही टायर बनाने का फैसला कर लिया था। क्योंकि, इससे पहले विदेश से टायर मंगवाए जाते थे। ऐसे में उन्होंने 1960 में MRF(मद्रास रबड़ फैक्ट्री) कंपनी स्थापित की और अमेरिका की एक कंपनी की मदद से टायर बनाने के लिए तकनीकी मदद ली। इस कड़ी में 1961 में पहला टायर बनकर तैयार हुआ। 

1967 में रचा इतिहास 

कंपनी के टायरों की मांग धीरे-धीरे बढ़ने लगी और 1967 में कंपनी ने एक नया इतिहास रच दिया। एमआरएफ की कंपनी ने अमेरिका को भारतीय टायर निर्यात किये, जो कि ऐसा करने वाली देश की पहली कंपनी बन गई। कंपनी ने सचिन तेंदुलकर के बैट पर लंबे समय तक अपने प्रचार किया, जिससे यह कंपनी भारतीय घरों में अपनी पहचान बनाने में कामयाब रही। आज इस कंपनी की मार्केट वैल्यू 55,000 करोड़  रुपये है।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Jul 28, 2026, 13:43 IST

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