गरीबी को हराकर जीता कॉमनवेल्थ मेडल! सब्ज़ी बेची, ई-रिक्शा भी चलाया, पढ़े बिहार के झंडू कुमार की कहानी
कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली बार उतरे झंडू कुमार ने पुरुष हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रौशन किया। परिवार का पेट पालने के लिए सब्ज़ियां बेचने वाले झंडू कुमार का कैसा रहा सफर, चलिए जानते है।
जब लोग मुश्किलों के आगे हार मान लेते हैं, तब कुछ लोग उन्हीं मुश्किलों को अपनी ताकत बना लेते हैं। बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले झंडू कुमार ने यही कर दिखाया। कभी परिवार का पेट पालने के लिए सब्ज़ियां बेचीं, कोविड के दौर में ई-रिक्शा चलाया और आज उसी शख्स ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए कांस्य पदक जीतकर करोड़ों लोगों का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।
संघर्ष से शुरू हुआ सफर, पदक तक जा पहुंचा
कॉमनवेल्थ गेम्स में पहली बार उतरे झंडू कुमार ने पुरुष हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन किया। पहले प्रयास में 181 किलोग्राम और दूसरे प्रयास में 190 किलोग्राम वजन उठाकर उन्होंने 130.9 अंक हासिल किए। तीसरे प्रयास में उन्होंने 196 किलोग्राम उठाकर बड़ा दांव खेला, लेकिन यह सफल नहीं हो सका। फिर भी उनका प्रदर्शन भारत के लिए कांस्य पदक जीतने के लिए काफी था।
दिन में सब्ज़ियां बेचते, शाम को जिम जाते
झंडू की जिंदगी कभी आसान नहीं रही। हर दिन करीब 20 किलोमीटर दूर बिहार शरीफ जाकर सब्ज़ियां खरीदना, बाजार में बेचना और शाम होते ही सीधे जिम पहुंचकर घंटों अभ्यास करना उनकी दिनचर्या थी। कोविड-19 के दौरान दुकान बंद हुई तो परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए उन्होंने ई-रिक्शा चलाना शुरू कर दिया। आर्थिक तंगी थी, लेकिन उनके सपनों की रफ्तार कभी धीमी नहीं हुई।
ई-रिक्शा बेच दिया, फिर भी नहीं मिली पहली जीत
राष्ट्रीय पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए झंडू ने अपना ई-रिक्शा तक बेच दिया। लेकिन किस्मत ने उस दिन उनका साथ नहीं दिया और उनका एक भी लिफ्ट सफल नहीं हुआ। कई लोग शायद यहीं हार मान लेते, लेकिन झंडू ने हार नहीं मानी।
इसके बाद, उनके जज़्बे ने कोच राजिंदर सिंह राहेलू का ध्यान खींचा, जिन्होंने उन्हें SAI के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र, गांधीनगर में प्रशिक्षण का मौका दिलाया। यही मौका उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बन गया।
आज देश के लिए बने प्रेरणा की मिसाल
पोलियो से प्रभावित होने के बावजूद झंडू ने कभी खुद को कमजोर नहीं माना। उन्होंने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीते, फिर खेलो इंडिया पैरा गेम्स में रजत और एशिया-ओशिनिया ओपन पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया। अब कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य जीत भारत का नाम रौशन किया।
झंडू कुमार की कहानी हमें यही सिखाती है कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो कठिनाइयों से गुजरकर कॉमनवेल्थ गेम्स के पोडियम तक का सफर भी तय किया जा सकता है।
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