New Income Tax Rules 2026: 1 अप्रैल 2026 से देश में नया आयकर अधिनियम 2025 लागू होगा, जो 1961 के कानून की जगह लेगा। इसके साथ “टैक्स ईयर” सिस्टम लागू होगा, ₹12 लाख तक प्रभावी टैक्स-फ्री आय, STT में बढ़ोतरी, विदेशी रेमिटेंस पर 2% TCS, ITR की नई डेडलाइन, शेयर बायबैक पर कैपिटल गेन टैक्स और छोटे कारोबारियों के लिए टर्नओवर सीमा ₹3 करोड़ जैसे बदलाव लागू होंगे। आप यहां 1 अप्रैल से लागू होने वाले नए नियम देख सकते हैं।
नया आयकर अधिनियम 2025 और ‘टैक्स ईयर’ की शुरुआत
1 अप्रैल 2026 से आयकर अधिनियम 2025 लागू हो जाएगा, जो 1961 के पुराने कानून की जगह लेगा। नए कानून में “फाइनेंशियल ईयर” और “असेसमेंट ईयर” की जगह एक ही “टैक्स ईयर” लागू होगा, जिससे टैक्स प्रणाली को सरल और समझने में आसान बनाया जाएगा।
₹12 लाख तक टैक्स फ्री आय
नई टैक्स व्यवस्था चुनने वाले करदाताओं को धारा 87A के तहत बढ़ी हुई छूट का लाभ मिलेगा। इससे लगभग ₹12 लाख तक की आय प्रभावी रूप से टैक्स-फ्री हो सकती है। साथ ही ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन भी जारी रहेगा, जिससे मध्यम वर्ग को अतिरिक्त राहत मिलेगी।
3. ITR दाखिल करने की नई अंतिम तिथियां
नए कानून में आयकर रिटर्न भरने की समयसीमा भी बदली गई है।
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31 जुलाई: ITR-1 और ITR-2 भरने वाले व्यक्तिगत करदाता
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31 अगस्त: बिना ऑडिट वाले बिजनेस या प्रोफेशनल आय वाले करदाता
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31 अक्टूबर: कंपनियां और ऑडिट अनिवार्य वाले करदाता
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30 नवंबर: विशेष प्रावधान वाले मामले (जैसे धारा 172)
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ये नई समयसीमाएं टैक्स ईयर 2026-27 से लागू होंगी।
1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले प्रमुख बदलाव
| बदलाव | डिटेल्स |
| नया आयकर कानून | आयकर अधिनियम 1961 की जगह आयकर अधिनियम 2025 लागू होगा। “फाइनेंशियल ईयर” और “असेसमेंट ईयर” की जगह अब एक ही “टैक्स ईयर” सिस्टम लागू होगा। |
| टैक्स-फ्री आय सीमा | नई टैक्स व्यवस्था में धारा 87A के तहत छूट के कारण लगभग ₹12 लाख तक की आय प्रभावी रूप से टैक्स-फ्री हो सकती है। |
| TCS में बदलाव | शराब, स्क्रैप और खनिज जैसे कुछ सामानों पर TCS दरों को सरल बनाकर लगभग 2% किया गया है। |
| शेयर बायबैक टैक्स | कंपनियों द्वारा किए गए शेयर बायबैक से मिलने वाला लाभ अब शेयरधारकों के लिए कैपिटल गेन के रूप में टैक्स होगा, जिसे घाटे के साथ समायोजित किया जा सकेगा। |
| निवेश आय पर ब्याज कटौती | डिविडेंड और म्यूचुअल फंड आय पर ब्याज खर्च की 20% तक मिलने वाली कटौती समाप्त कर दी गई है। |
| सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) | फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग पर STT बढ़ाया जाएगा, जिससे डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर टैक्स देनदारी बढ़ सकती है। |
| ITR फाइल करने की नई तारीख | बिना ऑडिट वाले करदाताओं के लिए ITR-3 और ITR-4 दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त कर दी गई है। |
STT और शेयर बायबैक टैक्स में बदलाव
डेरिवेटिव ट्रेडिंग में बढ़ती सट्टेबाजी को देखते हुए सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) की दरें बढ़ाई गई हैं। फ्यूचर्स पर STT 0.02% से बढ़कर 0.05% हो जाएगा, जबकि ऑप्शंस पर भी टैक्स बढ़ाया गया है। इसके अलावा अब शेयर बायबैक से मिलने वाली राशि को कैपिटल गेन के रूप में टैक्स किया जाएगा, जिससे निवेशकों की टैक्स देनदारी बढ़ सकती है।
TCS, प्रिसम्प्टिव टैक्सेशन और अन्य बदलाव
विदेश भेजे जाने वाले पैसे (LRS) पर TCS को सरल बनाते हुए 2% कर दिया गया है, खासकर शिक्षा, चिकित्सा और विदेश यात्रा पैकेज के लिए। छोटे कारोबारियों के लिए सेक्शन 44AD के तहत टर्नओवर सीमा बढ़ाकर ₹3 करोड़ कर दी गई है। वहीं, नियोक्ता द्वारा दिए जाने वाले उपहार ₹15,000 तक ही टैक्स-फ्री रहेंगे और घर-ऑफिस यात्रा के लिए कंपनी द्वारा दी गई सुविधा को टैक्सेबल परक्विजिट नहीं माना जाएगा।
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