नागार्जुन सागर डैम किस राज्य में और किस नदी पर है स्थित? ऐसे रखें नाम याद

Last Updated: May 25, 2026, 15:42 IST

नागार्जुन सागर डैम कृष्णा नदी पर तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की सीमा पर स्थित है। यह भारत के सबसे बड़े बहुउद्देश्यीय बांधों में गिना जाता है। इसका विशाल जलाशय और लंबी नहर प्रणाली दक्षिण भारत की सबसे बड़ी जल परियोजनाओं में शामिल है, जो लाखों एकड़ खेतों तक पानी पहुंचाती है।

नागार्जुन सागर डैम
नागार्जुन सागर डैम

नागार्जुन सागर बांध भारत की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक नदी परियोजनाओं में गिना जाता है। कृष्णा नदी पर बना यह बांध सिर्फ कंक्रीट और पत्थरों की विशाल संरचना नहीं, बल्कि दक्षिण भारत के लाखों किसानों की उम्मीद भी है। सिंचाई, बिजली उत्पादन और पेयजल आपूर्ति के लिए तैयार इस प्रोजेक्ट ने उन इलाकों में हरियाली पहुंचाई, जहां कभी पानी की भारी कमी हुआ करती थी। बांध का नाम प्राचीन बौद्ध स्थल नागार्जुनकोंडा के नाम पर रखा गया, जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत को भी दर्शाता है।

कहां स्थित है यह डैम?

नागार्जुन सागर बांध कृष्णा नदी पर तेलंगाना के नलगोंडा जिले और आंध्र प्रदेश से जुड़े क्षेत्रों की सीमा पर स्थित है। यही वजह है कि यह प्रोजेक्ट दोनों राज्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसका विशाल जलाशय और लंबी नहर प्रणाली दक्षिण भारत की सबसे बड़ी जल परियोजनाओं में शामिल है, जो लाखों एकड़ खेतों तक पानी पहुंचाती है।

कैसे शुरू हुआ यह ड्रीम प्रोजेक्ट?

कृष्णा नदी के पानी का बेहतर इस्तेमाल करने का विचार आजादी से पहले ही सामने आ चुका था। ब्रिटिश इंजीनियरों और हैदराबाद निजाम प्रशासन ने कई जगहों का सर्वे किया, लेकिन असली रफ्तार आजादी के बाद मिली। देश में बड़े बांधों को विकास का प्रतीक माना जा रहा था और इसी सोच के तहत नागार्जुन सागर परियोजना को मंजूरी मिली। 10 दिसंबर 1955 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इसकी आधारशिला रखी। इसे उस दौर के आधुनिक भारत के “मंदिरों” में भी गिना गया। 

इंजीनियरिंग का शानदार नमूना

साल 1955 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट 1967 में बनकर तैयार हुआ। लगभग 1.6 किलोमीटर लंबा और करीब 124 मीटर ऊंचा यह बांध भारत के सबसे बड़े मैसनरी (कंक्रीट और पत्थरों वाला स्ट्रक्चर) बांधों में गिना जाता है। इसकी लेफ्ट और राइट बैंक नहरें दूर-दराज के खेतों तक पानी पहुंचाती हैं। उस समय इतनी विशाल परियोजना का निर्माण भारतीय इंजीनियरिंग की बड़ी उपलब्धि माना गया था। 

सिचाई और बिजली के लिए वरदान 

नागार्जुन सागर परियोजना ने तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कई सूखे इलाकों की किस्मत बदल दी। जहां पहले किसान बारिश के भरोसे खेती करते थे, वहां अब बड़े पैमाने पर धान और अन्य फसलें उगाई जाती हैं। इस बांध से बनने वाली बिजली ने भी क्षेत्रीय विकास को गति दी। यही कारण है कि इसे भारत की हरित क्रांति में योगदान देने वाली अहम परियोजनाओं में शामिल किया जाता है।

प्राचीन बौद्ध स्थल का कनेक्शन

इस डैम के निर्माण से प्राचीन बौद्ध स्थल नागार्जुनकोंडा का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया था। हालांकि, पुरातत्व विशेषज्ञों ने समय रहते कई स्मारकों और अवशेषों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। आज यहां मौजूद नागार्जुनकोंडा म्यूजियम उस विरासत को संजोए हुए है। विशाल जलाशय, बोटिंग, एथीपोतला जलप्रपात और खूबसूरत नजारे इस जगह को लोकप्रिय पर्यटन स्थल भी बनाते हैं। 

कृष्ण-अर्जुन से रखें नाम याद? 

नागार्जुन सागर बांध का नाम याद रखने के लिए “कृष्ण-अर्जुन” ट्रिक अपनाएं। “कृष्ण” से याद रखें कृष्णा नदी, जबकि “अर्जुन” से जोड़ें नागार्जुन नाम। यह बांध तेलंगाना-आंध्र प्रदेश सीमा पर स्थित है।  

इस तरह के टॉपिक प्रतियोगी एग्जाम के नजरिये से बहुत ही उपयोगी होते है, इनसे जुड़े सवाल रेलवे, स्टेट लेवल के एग्जाम संघ लोक सेवा आयोग और राज्य लोक सेवा की परीक्षाओं में पूछें जाते है.  

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Bagesh Yadav
Bagesh Yadav

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First Published: May 25, 2026, 15:35 IST

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