Lesson of the Day: “मैंने कभी भी अपनी स्कूली शिक्षा को…..”
आज की अत्यधिक कॉम्पिटिशन और नौकरी की दौड़ के कारण छात्र और कामकाजी लोग भारी मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। इस तनाव के चलते वे न तो अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर पा रहे हैं और न ही अपने काम को बेहतर बना पा रहे हैं। यहां अमेरिकी लेखक मार्क ट्वेन का एक प्रेरक विचार बेहद मददगार साबित हो सकता है।
आजकल सभी लोग एंव छात्र अपने अच्छे नंबर और जॉब की इस बढ़ती दौड़ को लेकर काफी परेशान और चिंता में रहते है। परंतु, इस दौड़ से सभी को काफी कुछ देखना और सहना पड़ता है, जिसके कारण उनकी मानसिक स्थिती स्ट्रेस में बदल जाती है। साथ ही, इसके कारण छात्र न अपनी पढ़ाई पर ध्यान लगा पाते और न ही जॉब में अपने काम को बेहतर बना पाते। इसी को लेकर आज हम आपके लिए मार्क ट्वेन का एक ऐसा कथन लेकर आए है, जो आपको हिम्मत के साथ-साथ आगे बढ़ने का हौसला देगा। आइए जानते हैं मार्क ट्वेन कौन है, उन्होनें क्या कथन दिया है।
मार्क ट्वेन कौन थे? Who was Mark Twain?
मार्क ट्वेन अमेरिका के बहुत ही प्रसिद्ध और महान लेखक थे, जिनका असली नाम 'सैम्युअल लैंगहॉर्न क्लेमेंस' था। वे अपनी मजेदार कहानियों, गहरी सोच और कमाल की किताबों जैसे The Adventures of Tom Sawyer के लिए पूरी दुनिया में आज भी फेमल हैं। वे अपनी बातों को बहुत ही मजाकिया तरीके से वयक्त करके सीधे अंदाज में बोलकर लोगों को काफी अच्छे से समझा देते थे। साथ ही, वह लोगों को सोचने पर भी मजबूर कर देते थे। आइए जानते है इस कथन के बारे में जो लोगों और छात्रों के लिए बेस्ट है। साथ ही, कैसे मोटिवेट करता हैं।
“मैंने कभी भी अपनी स्कूली शिक्षा को अपनी असली शिक्षा में बाधा नहीं बनने दिया।”
— मार्क ट्वेन
इस विचार/ कथन का क्या मतलब है?
मार्क ट्वेन का मोटिवेशनल कथन हमें शिक्षा का असली मतलब समझाता है। साथ ही, उनके इस कथन के कहने के दो मुख्य मायने हैं, जिसे आप यहां से विस्तार से समझें।
- स्कूल की पढ़ाई और असली सीख में अंतर: इस कथन से छात्रों को यह समझाने की कोशिश की गई है कि केवल स्कूल जाना, किताबें पढ़ना और एग्जाम पास करना बहुत जरूरी होता है। लेकिन असली शिक्षा सिर्फ स्कूल की चारदीवारी या किताबों तक सीमित नहीं होती। आजकल छात्रों को प्रैक्टिकली ज्ञान लेना काफी जरूरी होता है।
- दुनिया से सीखना: मार्क ट्वेन के अनुसार असली शिक्षा वह है, जो हम अपने जीवन के अनुभवों से, गलतियों से, लोगों से मिलकर और अपने आस-पास की दुनिया को देखकर काफी सीख प्रदान करती है।
यदि आप आसान शब्दों में सझें, तो मार्क ट्वेन यह समझाना चाहते थे कि हमें सिर्फ किताबी कीड़ा नहीं बनना चाहिए। स्कूल की डिग्री हासिल करने के साथ-साथ हमें व्यावहारिक यानी प्रैक्टिकल ज्ञान और जीवन में होने वाली सभी चीजों से सबक भी सीखना चाहिए।
Life Lesson for Us: इस विचार या कथन से हमें क्या सीख मिलती है?
आज के टाइंम में छात्रों और लोगों के लिए यह कथन काफी बड़ी सीख लेकर आता है:
- नया सीखते रहें: मार्क के इस कथन से आज मैं आपको यह बताना चाहती कि आप सभी अपने जीवन में सिर्फ उतना ही मत सीखिए, जितना एग्जाम में पास करने के लिए जरूरी हो। नई चीजें आजमाइए, नए स्क्लिस सीखिए और हर दिन कुछ नया जानने और सीखने की कोशिश कीजिए।
- गलतियांकरने से मत डरिए: असली शिक्षा तब होती है, जब हम कोई काम खुद करते हैं, उसमें फेल होते हैं और फिर इसके लिए प्रयास करके खुद को बेहतरीन बनाते है, न की खुद को कमजोर समझ कर परेशान हो।
- खुले दिमाग से जिएं: हर व्यक्ति जिससे आप मिलते हैं। छात्रों को हर परिस्थिति जिसमें आप होते हैं, आपको कुछ न कुछ सिखा कर जाती है।
Conclusion: निष्कर्ष
स्कूल हमें ज्ञान का रास्ता दिखाता है, लेकिन उस रास्ते पर चलना और दुनिया को समझना हमारा अपना काम है। डिग्री आपको एक नौकरी दिला सकती है, लेकिन आपका अनुभव, आपकी समझ और आपका व्यवहार ही आपको जीवन में एक सफल इंसान बनाता है। इसलिए, स्कूल की पढ़ाई भी पूरी कीजिए और अपने जीवन की 'असली शिक्षा' को भी कभी मत रुकने दीजिए।
Akshara Verma is an Executive Content Writer at Jagran Josh, specializing in authoritative content focused on Education, Current Affairs, and General Knowledge. A graduate of Bharati Vidyapeeth's Institute of Computer Applications and Management (BVICAM) with a Bachelor of Journalism and Mass Communication, Akshara leverages her 1.5 years of experience to create impactful pieces, building on her previous roles in content writing and Public Relations at both Genesis BCW and Dainik Bhaskar. She can be reached at akshara.verma@jagrannewmedia.com.