असम के युवा शतरंज खिलाड़ी मयंक चक्रवर्ती ने शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के 94वें ग्रैंडमास्टर बनने का गौरव हासिल किया है। स्वीडन में खेले गए टूर्नामेंट में तीसरा GM नॉर्म पूरा कर उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की। मयंक असम और पूरे पूर्वोत्तर भारत से ग्रैंडमास्टर बनने वाले पहले खिलाड़ी बनकर इतिहास रच दिया। मयंक भारत में 55वें स्थान पर है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मयंक को बधाई दी।
स्वीडन में हासिल किया तीसरा GM नॉर्म
16 वर्षीय युवा इंटरनेशनल मास्टर मयंक चक्रवर्ती ने स्वीडन में आयोजित होटल स्टॉकहोम नॉर्थ बाय फर्स्ट होटल्स यंग टैलेंट्स (Hotel Stockholm North by First Hotels Young Talents) टूर्नामेंट में अपना तीसरा और अंतिम ग्रैंडमास्टर (GM) नॉर्म हासिल किया। शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने 9 में से 7 अंक बनाए और प्रतियोगिता में शीर्ष स्थान हासिल किया।
असम और पूर्वोत्तर से पहले ग्रैंडमास्टर
इस उपलब्धि के साथ मयंक चक्रवर्ती असम और पूरे पूर्वोत्तर भारत के पहले शतरंज ग्रैंडमास्टर बनने जा रहे हैं। यह उपलब्धि क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है और इससे पूर्वोत्तर भारत में शतरंज को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
A proud moment for Assam! ♟️
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) March 13, 2026
Congratulations to Mayank Chakraborty for becoming the 93rd Grand Master of India and the first from North East & Assam.
Just like the chess board, may you move ahead in your life successfully.
My best wishes and blessings. pic.twitter.com/HLBtgJE0qK
2500 FIDE रेटिंग भी किया पार
मयंक ने इस टूर्नामेंट के दौरान अनिवार्य 2500 FIDE रेटिंग की सीमा भी पार कर ली। उन्होंने कई शीर्ष वरीय खिलाड़ियों को हराया और अंतिम राउंड से पहले तक अपराजित रहते हुए शानदार प्रदर्शन किया।
आठवें राउंड में मिली निर्णायक जीत
आठवें राउंड में फिलिप लिंडग्रेन को हराकर मयंक ने अपना अंतिम GM नॉर्म हासिल किया। इस जीत के बाद उन्होंने प्रतियोगिता में स्पष्ट बढ़त बना ली और ग्रैंडमास्टर बनने की राह लगभग तय कर ली।
आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी
हालांकि GM खिताब की अंतिम पुष्टि उनके आखिरी राउंड के प्रतिद्वंद्वी विलो जोना बी. की उपस्थिति पर निर्भर करेगी। यदि वह निर्धारित समय पर मुकाबले के लिए उपस्थित होते हैं, तो मयंक का ग्रैंडमास्टर नॉर्म आधिकारिक रूप से मान्य हो जाएगा। फिलहाल इस उपलब्धि पर असम और पूरे पूर्वोत्तर भारत में जश्न का माहौल है।
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