NCERT New Book: NCERT ने कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान (Social Science) की किताब में भारत की न्यायिक प्रणाली के एक संवेदनशील पहलू 'भ्रष्टाचार' और 'जजों की स्वतंत्रता' पर चर्चा की है। यह चैप्टर छात्रों को न केवल न्यायपालिका की कार्यप्रणाली समझाता है, बल्कि यह भी बताता है कि कभी-कभी न्याय की राह में रोड़े क्यों अटक जाते हैं।
चैप्टर का मुख्य आकर्षण: जजों के हाथ क्यों बंधे होते हैं?
नई किताबों और सिलेब्स में यह स्पष्ट किया गया है कि एक स्वतंत्र न्यायपालिका लोकतंत्र के लिए कितनी जरूरी है। साथ ही, किताब में बताया गया है कि यदि कोई शक्तिशाली राजनेता या व्यक्ति न्यायपालिका पर दबाव डालता है, तो जज के लिए निष्पक्ष निर्णय लेना कठिन हो जाता है।
जजों क्यों निर्णय नहीं ले सकते हैं?
- राजनैतिक हस्तक्षेप: जब ऊंचे पदों पर बैठे लोग जजों के तबादले या करियर को प्रभावित करने की शक्ति रखते हैं।
- भ्रष्टाचार का जाल: न्यायपालिका के निचले स्तरों पर व्याप्त भ्रष्टाचार कभी-कभी सही साक्ष्यों को दबा देता है।
- सुरक्षा और करियर का डर: कई मामलों में जजों को अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा या पदोन्नति की चिंता के कारण दबाव में काम करना पड़ता है।
पुरानी किताब में क्या था?
पुरानी किताब में “न्यायपालिका की भूमिका, स्वतंत्र न्यायपालिका क्या होती है, अदालतों की संरचना और उन तक पहुंच के बारे में ही बताया गया था” जिसमें भ्रष्टाचार का कोई जिक्र नहीं था। हालांकि, उसमें एक पैराग्राफ था, जिसमें कहा गया था कि आम आदमी को न्याय मिलने में बाधा डालने वाला एक मुद्दा अदालतों द्वारा किसी मामले की सुनवाई में लगने वाला लंबा समय है। इसमें लिखा था 'न्याय में देरी न्याय से इनकार के समान है, यह मुहावरा अक्सर अदालतों द्वारा लिए जाने वाले इस लंबे समय को दर्शाता है.'
भारत की न्यायिक संरचना क्या है?
किताब में छात्रों को न्यायपालिका के ढांचे को समझाने के लिए हमारे द्वारा नीचे दी गई टेबल को देखना होगा। टेबल में सभी वर्गो को पूरी तरह से बताया गया है।
| लेवल | न्यायालय का नाम | भूमिका और कार्य |
| शीर्ष स्तर | सुप्रीम कोर्ट | देश का सर्वोच्च न्यायालय, जिसका फैसला अंतिम होता है। |
| राज्य स्तर | हाई कोर्ट | राज्य का मुख्य न्यायालय, जो राज्य के मामलों को देखता है। |
| निचला स्तर | जिला अदालतें | आम जनता के रोजमर्रा के कानूनी विवादों का निपटारा करना। |
नई किताबों में क्या होगा?
नई किताब में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों में लंबित मामलों की अनुमानित संख्या के बारे में भी बताया गया है। NCERT के निदेशक डीपी सकलानी ने नए सेक्शन पर टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया। उन्होंने किताब के प्रकाशन में देरी के बारे में पूछे गए सवाल का भी उत्तर नहीं दिया क्योंकि शैक्षणिक सत्र खत्म होने वाला है।
नई किताब के न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़े सेक्शन में कहा गया है कि “जज एक आचार संहिता से बंधे होते हैं, जो न केवल अदालत में उनके व्यवहार को नियंत्रित करती है, बल्कि अदालत के बाहर उनके आचरण को भी नियंत्रित करती है”। इसमें जवाबदेही बनाए रखने के लिए न्यायपालिका के आंतरिक तंत्र और केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण एवं निगरानी प्रणाली (CPGRAMS) के माध्यम से शिकायतें मिलने करने की प्रक्रिया के बारे में भी बताया गया है। साथ ही, यह भी बताया गया है कि 2017 से 2021 के बीच ऐसी 1,600 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं।
भ्रष्टाचार और न्यायपालिका की किताब क्या कहती है?
NCERT की इस नई पहल का उद्देश्य छात्रों को 'स्वतंत्र न्यायपालिका' के बारे में बताया और उसकी प्रक्रिया को समझाना है।
- शक्तियों का बंटवारा: विधायिका और कार्यपालिका, न्यायपालिका के काम में दखल न दे सकें।
- मौलिक अधिकारों की रक्षा: यदि किसी नागरिक के अधिकारों का हनन होता है, तो वह बिना डरे कोर्ट जा सके।
- संविधान का संरक्षण: कानून की व्याख्या केवल तथ्यों और संविधान के आधार पर हो, न कि किसी के प्रभाव में।
किताब में यह उल्लेख है कि "न्यायपालिका की स्वतंत्रता ही वह शक्ति है जो जजों को अमीर और ताकतवर लोगों के खिलाफ निष्पक्ष फैसला सुनाने का साहस देती है। यदि यह स्वतंत्रता छिन जाए, तो न्याय का अर्थ ही समाप्त हो जाएगा।"
छात्रों और शिक्षकों के लिए नई दृष्टि
यह बदलाव केवल एग्जाम के लिए नहीं है, बल्कि छात्रों को एक जागरूक नागरिक बनाने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाना है। नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत, अब वास्तविकता और सामाजिक चुनौतियों को किताबों का हिस्सा बनाया जा रहा है ताकि छात्र केवल किताबी ज्ञान न लें, बल्कि देश की व्यवस्था को गहराई से समझें।

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