CBSE का बड़ा फैसला, अब छठी से लागू होगा “नया थ्री-लैंग्वेज सिस्टम”, English बनी फॉरेन लैंग्वेज

Akshara Verma
Last Updated: Feb 26, 2026, 13:09 IST

CBSE Third Language System 2026: CBSE 2026-27 सेशन से नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) के तहत कक्षा 6 से यह नया 'थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला' लागू किया जा रहा है। ये छात्रों में भारतीय भाषाओं की समझ को बढ़ावा देगा। साथ ही, इंग्लिश को फॉरेन लैंग्वेज के तौर पर पढ़ाया जाएगा।

CBSE Introduce New 3 Language System from Class 6 Two Indian Languages Mandatory
CBSE Introduce New 3 Language System from Class 6 Two Indian Languages Mandatory

CBSE Third Language Policy 2026: देशभर के CBSE स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए बड़ी खबर है। साल 2026-27 के सेशन से CBSE, नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP 2020) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन (NCFSE 2023) की सिफारिशों को लागू करने जा रहा है। साथ ही, CBSE द्वारा कक्षा 6 से लागू किया जा रहा यह नया 'थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला' छात्रों को पढ़ाना जरूरी होगा।

दो भारतीय भाषाएं पढ़ना हुआ जरूरी 

नए नियमों के अनुसार, कक्षा 6 से 10 तक के छात्रों को अब तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन तीन में से दो भाषाएं भारतीय होनी चाहिए। इस नियम को लागू करने का उद्देश्य छात्रों को अपनी संस्कृति और मातृभाषा के प्रति समझ पैदा करना है।

  • भारतीयता पर जोर: छात्रों को हिंदी, संस्कृत, मराठी, तमिल या अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में से दो का चुनाव करना होगा।
  • इंग्लिश का नया दर्जा: इंग्लिश को मुख्य अब तक मुख्य भाषा माना जाता था, परंतु अब इसे 'विदेशी भाषा' का दर्जा दे दिया गया है। 
  • स्किल डेवलपमेंट: इस बदलाव से छात्रों की भाषाई पकड़ मजबूत होगी और वे एक से ज्यादा भाषा बोलने और समझने लगेंगे। 

भारतीय भाषा का नया ढांचा 

CBSE ने कक्षा 6 से 10 तक 'थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला' जारी करके छात्रों के लिए भारतीय भाषा पढ़ना जरूरी कर दिया है। छात्र उन तीन जरूरी भारतीय भाषाओं को जानने के लिए नीचे दी गई टेबल पर नजर डालें। टेबल की सहायता से जानें कैसे और किन-किन भाषाओं को जरूरी किया गया। 

कैटेगरी जरूरी / ऑप्शनल  उदाहरण 
भाषा 1 (भारतीय) जरूरी  हिंदी, बंगाली, गुजराती, आदि
भाषा 2 (भारतीय) जरूरी  संस्कृत, पंजाबी, कन्नड़, आदि
भाषा 3 (विदेशी/भारतीय) ऑप्शनल  अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन या एक और भारतीय भाषा

NCFSE का कहना है कि “भाषा शिक्षा छात्रों को अपने देश से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, क्योंकि यह व्यक्तियों को अपनी संस्कृति, विरासत और समाज से जुड़ने में सक्षम बनाती है… भारत एक समृद्ध भाषाई विरासत वाला देश है, जिसमें कई भाषाएँ और एक महान साहित्यिक विरासत शामिल है… दो अन्य भाषाओं के संपर्क में आने से छात्रों को बहुभाषी बनने, विविधता में एकता को समझने और इस प्रकार एक राष्ट्रीय पहचान बनाने में मदद मिलेगी।”

Akshara Verma
Akshara Verma

Content Writer

Akshara Verma is an Executive Content Writer at Jagran Josh, specializing in authoritative content focused on Education, Current Affairs, and General Knowledge. A graduate of Bharati Vidyapeeth's Institute of Computer Applications and Management (BVICAM) with a Bachelor of Journalism and Mass Communication, Akshara leverages her 1.5 years of experience to create impactful pieces, building on her previous roles in content writing and Public Relations at both Genesis BCW and Dainik Bhaskar. She can be reached at akshara.verma@jagrannewmedia.com.

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