तुंगभद्रा डैम किस राज्य में और किस नदी पर है बना? जानें यहां
तुंगभद्रा डैम (Tungabhadra Dam) कर्नाटक के बल्लारी जिले के होस्पेट क्षेत्र में स्थित है। यह तुंगभद्रा नदी पर बना एक प्रमुख बहुउद्देशीय बांध है। इसका उपयोग सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन, पेयजल आपूर्ति और बाढ़ नियंत्रण के लिए किया जाता है।
कर्नाटक के बल्लारी जिले में होस्पेट के पास बना तुंगभद्रा डैम दक्षिण भारत की सबसे अहम बहुउद्देशीय परियोजनाओं में गिना जाता है। यह बांध (डैम) सिर्फ पानी रोकने का काम नहीं करता, बल्कि लाखों किसानों की खेती, शहरों की पानी जरूरत, बिजली उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण की जिम्मेदारी भी संभालता है। स्थानीय लोग इसे “पंपा सागर” के नाम से भी जानते हैं।
कैसे बनी तुंगभद्रा नदी?
तुंगभद्रा नदी का निर्माण कर्नाटक के कूड़ली में तुंगा और भद्रा नदियों के संगम से होता है। दोनों नदियाँ पश्चिमी घाट की पहाड़ियों से निकलती हैं। इसके बाद तुंगभद्रा नदी लंबा सफर तय करते हुए आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी से मिल जाती है। वेदावती, वरदा और कुमुदवती जैसी कई सहायक नदियाँ भी इसके जल तंत्र को मजबूत बनाती हैं।
आजादी के बाद हुआ कायाकल्प
देश की आजादी के बाद जब बड़े सिंचाई और बिजली प्रोजेक्ट शुरू हुए, तब तुंगभद्रा डैम को भी तेजी से विकसित किया गया। 1950 के दशक में यह प्रोजेक्ट पूरा हुआ। बांध बनने से सूखे प्रभावित इलाकों में खेती आसान हुई, गांवों तक बिजली पहुंची और पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिली।
तुंगभद्रा डैम किस राज्य में और किस नदी पर
तुंगभद्रा डैम कर्नाटक के बल्लारी जिले के होस्पेट क्षेत्र में स्थित है। यह तुंगभद्रा नदी पर बना एक प्रमुख बहुउद्देशीय बांध है। इसका उपयोग सिंचाई, जलविद्युत उत्पादन, पेयजल आपूर्ति और बाढ़ नियंत्रण के लिए किया जाता है।
कैसे हुई तुंगभद्रा प्रोजेक्ट की शुरुआत
तुंगभद्रा परियोजना ने जहां विकास को गति दी, वहीं इसके कारण कई गांव जलमग्न होने लगे और लोगों को विस्थापित होना पड़ा। समय के साथ जलाशय में गाद जमने, प्रदूषण बढ़ने और जल गुणवत्ता प्रभावित होने जैसी समस्याएं भी सामने आई हैं। क्योंकि यह नदी कर्नाटक और आंध्र प्रदेश दोनों राज्यों से जुड़ी है, इसलिए पानी के बंटवारे और प्रबंधन को लेकर दोनों राज्यों के बीच लगातार समन्वय जरूरी रहता है।
बिजली, पानी और बाढ़ से मिली राहत
यह बांध जलविद्युत उत्पादन के जरिए आसपास के इलाकों को बिजली भी देता है। इसके अलावा शहरों और उद्योगों के लिए पेयजल की आपूर्ति में भी इसकी बड़ी भूमिका है। मानसून के दौरान जब नदी में पानी बढ़ता है, तब यही बांध अतिरिक्त पानी को नियंत्रित कर नीचे के इलाकों को बाढ़ से बचाने में मदद करता है।
लाखों किसानों के लिए बना वरदान
तुंगभद्रा डैम का सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिला। इस प्रोजेक्ट से कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के विशाल कृषि क्षेत्रों को सिंचाई मिलती है। पहले जहां किसान केवल मानसून पर निर्भर थे, वहीं अब नहरों के जरिए सालभर पानी मिलता है। इससे धान, गन्ना और दूसरी फसलों की पैदावार कई गुना बढ़ी और कई इलाकों में साल में दो से तीन फसलें उगाई जाने लगीं।
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