New PAN Card Application Rules 2026: 1 अप्रैल 2026 से केवल आधार के जरिए PAN बनवाने की सुविधा खत्म हो जाएगी। अब आधार के साथ जन्मतिथि का अलग प्रमाण देना अनिवार्य होगा। साथ ही नए PAN आवेदन फॉर्म लागू होंगे और पुराने Form 49A/49AA स्वीकार नहीं किए जाएंगे, जिससे प्रक्रिया अधिक सुरक्षित बनेगी।
केवल आधार से PAN बनवाने की सुविधा खत्म
1 अप्रैल 2026 से PAN कार्ड के लिए केवल आधार के जरिए आवेदन करना संभव नहीं होगा। अब पहचान के साथ-साथ जन्मतिथि के लिए अलग दस्तावेज देना जरूरी होगा, ताकि फर्जीवाड़े को रोका जा सके।
जन्मतिथि के लिए अतिरिक्त दस्तावेज अनिवार्य
अब आधार के अलावा जन्मतिथि प्रमाण के लिए जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं की मार्कशीट, वोटर आईडी, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेज देना अनिवार्य होगा। इससे उम्र की सही पुष्टि की जाएगी।
जन्मतिथि-प्रमाण दस्तावेजों में शामिल हैं:
जन्म प्रमाण पत्र
कक्षा 10 (या समकक्ष) विद्यालय प्रमाण पत्र
वोटर आईडी (ईपीआईसी)
पासपोर्ट
ड्राइविंग लाइसेंस
एक मजिस्ट्रेट से नोटरीकृत शपथ पत्र (विशिष्ट मामलों में)
आधार से नाम का सटीक मिलान जरूरी
PAN कार्ड में दर्ज नाम अब आधार के नाम से पूरी तरह मेल खाना चाहिए। नाम में छोटी गलती, स्पेलिंग या इनिशियल का अंतर भी आवेदन रिजेक्ट कर सकता है, इसलिए पहले आधार अपडेट करना जरूरी होगा।
How to Apply After April 1, 2026: आसान स्टेप्स यहां देखें
जरूरी डॉक्यूमेंट तैयार करें: आधार (अनिवार्य) + एक DOB प्रूफ (10वीं सर्टिफिकेट/पासपोर्ट/वोटर ID आदि)।
नया PAN फॉर्म इस्तेमाल करें: 2026 का अपडेटेड Form 49A/49AA भरें।
फॉर्म भरें और अपलोड करें: सही जानकारी भरकर डॉक्यूमेंट और फोटो अपलोड करें।
फीस जमा करें: ऑनलाइन या Common Services Centres (CSC) के जरिए भुगतान करें।
स्टेटस ट्रैक करें: आवेदन नंबर से स्टेटस चेक करें।
नए PAN फॉर्म लागू
केंद्र सरकार 1 अप्रैल 2026 से नए PAN आवेदन फॉर्म लागू करने जा रही है। पुराने Form 49A और 49AA स्वीकार नहीं किए जाएंगे। नए फॉर्म में अपडेटेड जानकारी और दस्तावेजों की जरूरत शामिल होगी।
किन लोगों पर लागू होंगे नियम
ये नियम नए PAN आवेदकों, मौजूदा PAN में बदलाव कराने वालों और कंपनियों/फर्मों जैसे नए संस्थानों पर लागू होंगे। सभी को नए वेरिफिकेशन नियमों का पालन करना होगा।
बदलाव क्यों किए गए
सरकार का उद्देश्य पहचान की सख्ती बढ़ाना, टैक्स चोरी रोकना और PAN-आधार डेटा को अधिक सटीक बनाना है। इससे KYC प्रक्रिया मजबूत होगी और वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता आएगी।
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