भारत में है एशिया का सबसे बड़ा रेलवे मार्शलिंग यार्ड, ‘ट्रेन फॉर्मेशन’ का कहा जाता है गढ़

Last Updated: Jul 1, 2026, 14:17 IST

भारत में एशिया का सबसे बड़ा रेलवे मार्शलिंग यार्ड मौजूद है। खास बात यह है कि यह उत्तर प्रदेश के एक जिले में है, जिसे ‘ट्रेन फॉर्मेशन’ का गढ़ कहा जाता है। इस लेख में हम रेलवे मार्शलिंग यार्ड के बारे में विस्तार से जानेंगे।

रेलवे यार्ड
रेलवे यार्ड

भारतीय रेलवे दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। वहीं, पूरे एशिया में इसका दूसरा स्थान है। इसके अतिरिक्त, पूरे एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मार्शलिंग यार्ड भी भारत में मौजूद है। इस जगह को ‘ट्रेन फॉर्मेशन’ का गढ़ भी कहा जाता है। इस लेख में हम जानेंगे कि आखिर मार्शलिंग यार्ड क्या होता है और भारत में यह कहां स्थित है? जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें। 

कौन-सा है सबसे बड़ा रेलवे मार्शलिंग यार्ड

एशिया का सबसे बड़ा रेलवे मार्शलिंग यार्ड पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन है, जिसे पहले मुगलसराय जंक्शन के नाम से जाना जाता था। यह उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में स्थित है, जिसे भारतीय रेलवे का सबसे महत्त्वपूर्ण स्थल भी माना जाता है। रेलवे के संदर्भ में इसकी लोकेशन की बात करें, तो यह हावड़ा-नई दिल्ली मुख्य लाइन पर स्थित होने के कारण पूर्व और उत्तर भारत को आपस में जोड़ने वाली मुख्य कड़ी कहलाता है।

मार्शलिंग यार्ड क्या होता है?

अब हम मार्शलिंग यार्ड (Marshalling Yard) के बारे में समझ लेते हैं। दरअसल, रेलवे का एक विशेष स्टेशन या क्षेत्र होता है, जहां पर मालगाड़ियों के डिब्बों को उनकी मंजिल के अनुसार छांटा जाता है। यहां पर अलग-अलग दिशाओं से आने वाली मालगाड़ियां पहुंचती हैं, जिनके डिब्बों को अलग किया जाता है।  इसके बाद, एक ही दिशा में जाने वाले डिब्बों को मिलाकर एक नई मालगाड़ी को तैयार किया जाता है, जिससे रेलवे का समय और संसाधन की बचत हो सके। रेलवे में इस प्रक्रिया को 'ट्रेन फॉर्मेशन' कहा जाता है।

क्या है मार्शलिंग यार्ड का इतिहास

रेलवे का मार्शलिंग यार्ड का इतिहास ब्रिटिश काल का है। जब ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा दिल्ली और कोलकाता को जोड़ने के लिए रेल मार्ग का निर्माण किया जा रहा था, तब 1862 में मुगलसराय स्टेशन अस्तित्व में आया था। यह उस समय केंद्र में हुआ करता था, जिस वजह से यहां पर मार्शलिंग यार्ड को बनाया गया। साल 2018 में उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार ने इसका नाम बदलकर जनसंघ के नेता पंडित दीन दयाल उपाध्याय के नाम पर रख दिया।

कितना बड़ा है यार्ड 

पंडित दीनदयाल उपाध्याय मार्शलिंग यार्ड करीब 12.5 किलोमीटर लंबा है। यहां कई ट्रैक्स का जाल देखने को मिल जाएगा, जिन पर गाड़ियों का आना-जाना लगा रहता है। यार्ड में प्रतिदिन करीब 8,000 मालगाड़ी के डिब्बों को एक जगह से दूसरी जगह बदला जाता है। वहीं, यहां हर दिन 100 से अधिक मालगाड़ियों को तैयार किया जाता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्त्वपूर्ण

इस यार्ड को भारतीय रेलवे की कमाई का रीढ़ कहा जाता है। क्योंकि, रेलवे में सबसे अधिक कमाई माल ढुलाई से ही होती है। यहां झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से आने वाले कोयला, लोहा और अन्य खनिज पदार्थ पहुंचते हैं, जिन्हें उत्तर और पश्चिमी भारत के बिजली घरों और उद्योगों तक पहुंचाया जाता है।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Jul 1, 2026, 14:17 IST

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