भारत में कुल 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं। इनमें से एक राज्य ऐसा है, जिसे ‘नारियल का देश’ भी कहा जाता है। दरअसल, दक्षिण भारत के केरल राज्य को नारियल का देश कहा जाता है। यह भारत का प्रमुख नाीरियल उत्पादक राज्य है, जो कि भारत के कुल नारियल उत्पादन में अहम योगदान देता है।
हालांकि, यदि सबसे बड़े नारियल उत्पादक राज्य की बात करें, तो यह कर्नाटक है, लेकिन इसके बावजूद केरल को ‘नारियल का देश’ कहा जाता है। क्या है इसके पीछे का कारण, जानने के लिए यह पूरा लेख पढ़ें।
क्या होता है केरलम का अर्थ
केरल शब्द के अर्थ की बात करें, तो यह ‘केर’ और ‘अलम’ से मिलकर बना है। यहां केर का अर्थ ‘नारियल के पेड़’ और अलम का अर्थ ‘भूमि’ से होता है। ऐसे में इसे ‘नारियल के पेड़ों की भूमि’ और स्थानीय स्तर पर ‘नारियल का देश’ भी कहा जाता है।
नारियल का है सांस्कृतिक महत्त्व
केरल में नारियल सिर्फ एक पेड़ तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक कल्पवृक्ष माना जाता है। ऐसे में पेड़ का हर प्रत्येक भाग किसी-न-किसी रूप में काम आता है। इस वजह से नारियल का सांस्कृतिक महत्त्व भी है।
नारियल उत्पादन में कितने फीसदी की है हिस्सेदारी
केरल नारियल उत्पादन में पूरे भारत में 20 से 23 फीसदी का योगदान देता है। वहीं, सबसे अधिक उत्पादन में टॉप पर मौजूद कर्नाटक 30 फीसदी तक योगदान देता है। वहीं, दूसरे स्थान पर तमिलनाडू 28 फीसदी उत्पादन के साथ मौजूद है।
भारत सबसे बड़ा नारियल उत्पादक देश
भारत दुनिया का सबसे बड़ा नारियल उत्पादक देश है। यह वैश्विक स्तर पर कुल उत्पादन में 30.37 फीसदी का योगदान देता है। इसे देखते हुए सरकार ने केंद्रीय बजट 2026-27 में नारियल प्रोत्साहन योजना की भी घोषणा की है, जिससे नारियल उत्पादन को बढ़ावा मिल सके। इसके तहत पुराने और कम उत्पादन वाले पेड़ों को नई किस्म के पेड़ों से बदलने की योजना है, जिससे उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ावा मिल सके। आपको बता दें कि देश में हर साल 21,373.62 मिलियन नारियल का उत्पादन होता है।
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