कैसे बनता है नया देश और कैसे मिलती है मान्यता? पूर्ण मान्यता प्राप्त सबसे नया देश कौन, यहां जानें सब कुछ

Last Updated: Jul 27, 2026, 17:40 IST

यदि कोई क्षेत्र कल खुद को आजाद देश घोषित कर दे, तो क्या वह तुरंत दुनिया के नक्शे पर एक नया देश बन जाएगा? ऐसे सवाल आप के मन में भी स्वाभाविक रूप से उठते होंगे, चलिए आज इसकी पूरी प्रक्रिया के बारें में विस्तार से चर्चा करते है।

सिर्फ आजादी का ऐलान क्यों नहीं बनाता किसी क्षेत्र को देश?
सिर्फ आजादी का ऐलान क्यों नहीं बनाता किसी क्षेत्र को देश?

किसी नए देश का जन्म सिर्फ आजादी की घोषणा से नहीं होता। इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय कानून, वैश्विक राजनीति और कूटनीतिक सहमति की लंबी प्रक्रिया होती है। यही वजह है कि 2011 में दक्षिण सूडान के गठन के बाद से दुनिया के नक्शे पर कोई नया संप्रभु देश आधिकारिक तौर पर नहीं जुड़ा है। आइए जानते हैं कि आखिर नया देश बनने का पूरा नियम क्या है और इसमें अंतरराष्ट्रीय कानून का कितना प्रमुख रोल है।

नया देश के लिए कौन सी शर्तें पूरा होना जरुरी?

अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक, किसी भी क्षेत्र को देश माने जाने के लिए सिर्फ स्वतंत्रता का दावा करना काफी नहीं होता। 1933 के मोंटेवीडियो कन्वेंशन के अनुसार चार बुनियादी शर्तें पूरी करना जरूरी है।

- वहां रहने वाली स्थायी आबादी हो।

- उस क्षेत्र की स्पष्ट भौगोलिक सीमा तय हो, चाहे कुछ सीमा विवाद मौजूद हों।

- एक प्रभावी सरकार हो, जो प्रशासन और कानून-व्यवस्था संभाल सके।

- दूसरे देशों के साथ राजनयिक और अंतरराष्ट्रीय संबंध बनाने की क्षमता हो।

यदि ये प्रमुख शर्तें पूरी नहीं होतीं, तो किसी क्षेत्र के लिए खुद को देश साबित करना आसान नहीं होता।

क्या संयुक्त राष्ट्र किसी नए देश को मान्यता देता है?

यह सबसे बड़ा भ्रम है कि संयुक्त राष्ट्र किसी नए देश को मान्यता देता है। सच यह है कि UN के पास किसी क्षेत्र को देश घोषित करने का अधिकार नहीं है।

किसी नए देश को मान्यता देना पूरी तरह दूसरे संप्रभु देशों का फैसला होता है। हां, संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता जरूर यह दिखाती है कि दुनिया के अधिकांश देशों ने उस राष्ट्र को स्वीकार कर लिया है। इसलिए UN सदस्य बनना किसी भी नए देश के लिए सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि माना जाता है।

संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता का पहला पड़ाव 

यदि कोई नया देश संयुक्त राष्ट्र का सदस्य बनना चाहता है, तो सबसे पहले उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की मंजूरी चाहिए।

पहली: 15 सदस्यीय (5 स्थायी और 10 अस्थाई) सुरक्षा परिषद में कम से कम 9 देशों का समर्थन मिलना चाहिए।

दूसरी: पांच स्थायी सदस्य (यूएसए, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन) में से कोई भी वीटो का इस्तेमाल न करे। यही वीटो कई बार नए देशों की राह में सबसे बड़ी बाधा बन जाता है। 

सुरक्षा परिषद के बाद महासभा की परीक्षा 

यदि सुरक्षा परिषद से हरी झंडी मिल जाती है, तो मामला संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में पहुंचता है।

यहां सदस्यता के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है। यानी 193 सदस्य देशों में से कम से कम 129 देशों को प्रस्ताव के पक्ष में वोट देना होता है। तभी कोई नया देश संयुक्त राष्ट्र का आधिकारिक सदस्य बन पाता है।

सिर्फ आजादी का ऐलान क्यों नहीं बनाता किसी क्षेत्र को देश?

इतिहास में कई ऐसे क्षेत्र रहे हैं, जिन्होंने खुद को स्वतंत्र घोषित किया, लेकिन उन्हें आज तक पूरी दुनिया की मान्यता नहीं मिल सकी। इसका कारण सिर्फ कानूनी शर्तें नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति, कूटनीतिक हित, सुरक्षा परिषद में वीटो और दूसरे देशों का समर्थन भी है।

यही कारण है कि दुनिया में नया देश बनना सिर्फ एक घोषणा का मुद्दा नहीं, बल्कि कानून, वैश्विक समर्थन और राजनीतिक सहमति की लंबी और बेहद जटिल प्रक्रिया है। इसलिए किसी भी क्षेत्र का दुनिया के नक्शे पर एक नए देश के रूप में जगह बनाना आसान नहीं होता।

Bagesh Yadav
Bagesh Yadav

Senior Executive - Editorial

Bagesh Yadav is a journalist and current affairs analyst with over six years of experience in education journalism, national and international affairs, and digital media. He has contributed to India’s leading knowledge platforms, including Vision IAS and Only IAS, and currently serves in a senior editorial role at Jagranjosh.com, where he leads coverage across the Current Affairs and General Knowledge sections. His expertise spans breaking news, government policy analysis, world affairs, sports updates, science and technology, and visually engaging infographics. Known for his commitment to factual accuracy, editorial integrity, and audience-first storytelling, Bagesh delivers well-researched, accessible, and impactful journalism that serves millions of students, competitive exam aspirants, and informed readers across India.

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First Published: Jul 27, 2026, 17:35 IST

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