उत्तर प्रदेश की पहली महिला वकील, जिनके नाम ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में भी है रिकॉर्ड

Last Updated: Jul 27, 2026, 17:11 IST

उत्तर प्रदेश में प्रयागराज को कानून की राजधानी कहा जाता है। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि यूपी की पहली महिला वकील कौन थीं ? उन्होंने अपने समय में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की प्लीडर परीक्षा को पास कर लिया था।

यूपी की पहली महिला वकील
यूपी की पहली महिला वकील

उत्तर प्रदेश में प्रयागराज को वकालत का गढ़ कहा जाता है। यहां मौजूद इलाहाबाद विश्वविद्यालय वर्षों से कानून के क्षेत्र में अपनी प्रतिष्ठा को बनाए हुए है। आज यूपी में वकालत के क्षेत्र में कई महिलाएं हैं, हालांकि क्या आप जानते हैं कि यूपी की पहली महिला वकील कौन हैं? उन्होंने अपने समय में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री प्राप्त की थी, जिसके बाद उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय की प्लीडर परीक्षा पास किया था। 

यूपी की पहली महिला वकील

उत्तर प्रदेश की पहली महिला वकील कार्नेलिया सोराबजी थीं। उन्होंने उस समय कानून के क्षेत्र में कदम रखा था, जब महिलाओं के लिए किताब उठाना भी एक बहुत बड़ी और दुर्लभ बात मानी जाती थी।

बांबे यूनिवर्सिटी की पहिला महिला ग्रेजुएट

कार्नेलिया का जन्म 1866 में महाराष्ट्र के नासिक जिले में एक पारसी परिवार में हुआ था। उन्होंने पुणे के डेक्कन कॉलेज से पढ़ाई की और बॉम्बे यूनिवर्सिटी की पहली महिला ग्रेजुएट भी बनीं।

ऑक्सफोर्ड तक का सफर

वह अपने कॉलेज में टॉपर थी, लेकिन महिला होने के कारण उन्हें स्कॉलरशिप नहीं मिली। हालांकि, बाद में

फ्लोरेंस नाइटिंगेल जैसी प्रमुख ब्रिटिश महिलाओं की मदद से फंड जुटाकर वह इंग्लैंड पहुंची और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में कानून की पढ़ाई करने वाली दुनिया की पहली महिला बनीं। उस समय ऑक्सफोर्ड महिलाओं को डिग्री नहीं देता था, इसलिए उन्हें 1920 में डिग्री मिली। 

1899 में पास की इलाहाबाद कोर्ट की परीक्षा

कानून की पढ़ाई करने के बाद वह भारत लौटी, लेकिन उन्हें वकालत करने की अनुमति नहीं मिली। इस वजह से उन्होंने 1899 में इलाहाबाद हाई कोर्ट की प्लीडर यानि कि वकालत की परीक्षा को पास किया। इसके बाद भी उनका संघर्ष जारी रहा और 1921 में उन्हें हाई कोर्ट ने महिला वकील के रूप में नामांकित किया।

पर्दा करने वाली महिलाओं के लिए लड़े केस

कार्नेलिया ने अपनी कानून की लड़ाई पर्दा करने वाली महिलाओं के लिए लड़ी। ये वे महिलाएं थीं, जो कि पर्दे में रहती थीं और बाहरी पुरुष या वकीलों से बात नहीं कर सकती थीं। उन्होंने कई बड़े जमींदार परिवारों की महिलाओं के केस लड़े, जिन्हें पुरुष वकील न मिलने के कारण संपत्ति से बेदखल कर दिया गया था। उन्होंने अपने कार्यकाल में 600 से अधिक महिलाओं और बच्चों की कानूनी लड़ाई लड़ी।

1923 में मिला बैरिस्टर का दर्जा

साल 1923 में जब महिलाओं को वकालत की पूरी अनुमति मिली, तो कार्नेलिया भी बैरिस्टर बनीं और कलकत्ता हाई कोर्ट में वकालत की। उन्होंने अपनी आत्मकथाएं 'इंडिया कॉलिंग' और 'इंडिया रिकॉल्ड' सहित कई पुस्तकें लिखीं हैं। साल 1929 में वह सेवानिवृत होकर लंदन चली गई, जहां 1954 में उनका निधन हो गया।

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Jul 27, 2026, 17:11 IST

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