Women’s Reservation Bill 2026 Hindi:16 अप्रैल 2026 से संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र शुरू हो गया है, जिसमें केंद्र सरकार महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करने के लिए जरूरी संशोधनों को पारित कराने की कोशिश कर रही है। इस सत्र को राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसके जरिए वर्षों से लंबित महिला आरक्षण को जमीन पर उतारने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए जा रहे हैं। यह बिल लोकसभा में पेश भी कर दिया गया है।
सरकार का बड़ा कदम और विधेयकों का पैकेज
केंद्र सरकार ने इस दिशा में तेजी दिखाते हुए संविधान संशोधन विधेयक की प्रति सांसदों को सौंप दी है। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इस पूरे पैकेज में तीन अहम विधेयक शामिल हैं, जिनका उद्देश्य न केवल आरक्षण लागू करना है बल्कि इसके लिए जरूरी संवैधानिक और प्रशासनिक ढांचे को भी तैयार करना है।
क्यों महत्वपूर्ण है महिला आरक्षण बिल
इस प्रस्तावित व्यवस्था के जरिए अलग-अलग सामाजिक और भौगोलिक क्षेत्रों की महिलाओं को राजनीति में प्रतिनिधित्व का अवसर मिलेगा। खास बात यह है कि इस आरक्षण में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की महिलाओं के लिए भी सीटें शामिल होंगी, जिससे सामाजिक न्याय और समावेशिता को बढ़ावा मिलेगा।
परिसीमन आयोग और उसकी भूमिका
विधेयक में परिसीमन आयोग के गठन का प्रावधान भी किया गया है, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त या वर्तमान न्यायाधीश करेंगे। यह आयोग लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं को नए सिरे से निर्धारित करेगा। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल इस संबंधित विधेयक को संसद में पेश करेंगे, जिसमें संविधान के कुछ अनुच्छेदों में संशोधन का प्रस्ताव है ताकि सीटों का बंटवारा वर्तमान जनसंख्या के आधार पर किया जा सके।
क्यों हुई परिसीमन की आवश्यकता?
वर्तमान में लोकसभा और विधानसभा सीटों का निर्धारण 1971 की जनगणना के आधार पर किया जाता है, जबकि देश की जनसंख्या और सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों में बड़ा बदलाव आ चुका है। इसी को ध्यान में रखते हुए नए विधेयक में सीटों का पुनर्निर्धारण आवश्यक माना गया है, ताकि प्रतिनिधित्व अधिक संतुलित और यथार्थपरक हो सके।
महिला आरक्षण संशोधन विधेयक 2026 के प्रमुख प्रस्ताव
अप्रैल 2026 में सरकार ने इस प्रक्रिया को तेज करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए। 8 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तीन प्रमुख विधेयकों को मंजूरी दी। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर लगभग 816–850 करने का प्रस्ताव है, जिसमें से करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। साथ ही, परिसीमन विधेयक 2026 के जरिए 2011 की जनगणना के आधार पर नई सीमाएं तय की जाएंगी, ताकि 2027 की संभावित देरी का असर न पड़े।
2023 अधिनियम से 2029 तक का रोडमैप
महिला आरक्षण विधेयक, जिसे “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” कहा जाता है, 2023 में पारित हुआ था, लेकिन इसका कार्यान्वयन जनगणना और परिसीमन से जुड़ा होने के कारण टल गया था। अब 2026 के संशोधनों के जरिए इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार चाहती है कि 31 मार्च 2029 तक यह पूरी व्यवस्था लागू हो जाए, जिससे महिलाओं को राष्ट्रीय और राज्य स्तर की राजनीति में अधिक भागीदारी मिल सके और “महिला-नेतृत्व वाले विकास” की अवधारणा को मजबूती मिले।