क्यों चर्चाओं में है सिंधु जल संधि, क्या है इसकी पृष्ठभूमि, सब कुछ यहां पढ़ें

Last Updated: Jun 10, 2026, 14:38 IST

हाल ही में सिंधु जल संधि चर्चाओं में बन गई है। क्योंकि, हाल ही में केंद्र की ओर से इस पर बड़ा बयान सामने आया है। इस लेख में हम सिंधु जल संधि और इससे जुड़े ताजा अपडेट के बारे में जानेंगे।

सिंधु जल संधि
सिंधु जल संधि

इन दिनों सिंधु जल संधि(Indus Waters Treaty) चर्चाओं में आई है। यह संधि भारत और पाकिस्तान के बीच नदियों के जल बंटवारे को लेकर हुई एक ऐतिहासिक और अहम संधि है। साल 1960 में हुई यह सबसे सफल जल समझौतों में से एक मानी जाती है। हालांकि, दोनों देशों के बीच तनाव के बीच इस संधि को वर्तमान में स्थगित किया हुआ है। इसका मतलब है कि संधि खत्म नहीं हुई है, बल्कि अस्थायी रूप से रोक दी गई है। इस लेख में हम इसके इतिहास और चर्चाओं पर गौर करेंगे।

क्यों चर्चा में है सिंधु जल संधि

हाल ही में केंद्र सरकार की ओर से पाकिस्तान के खिलाफ सिंधु जल संधि को लेकर कड़ा रूख अपनाया गया है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल द्वारा कहा गया है कि भारत की ओर से पाकिस्तान को सिंधु जल प्रणाली का एक बूंद भी पानी नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में हर संभव प्रयास कर रही है कि पाकिस्तान तक एक बूंद पानी न पहुंचे। आने वाले सालों में एक बूंद पानी भी पाकिस्तान नहीं जाएगा।

क्या है सिंधु जल संधि की पृष्ठभूमि

भारत के विभाजन के बाद सिंधु नदी घाटी की नदियां दो देशों के बीच बंट गई थी। ऐसे में इसकी मुख्य नदियां भारत से होकर पाकिस्तान में प्रवेश करती थीं, जिससे पाकिस्तान को यह डर था कि भारत कभी भी पानी की सप्लाई रोक सकता है। इस वजह से विश्व बैंक ने मध्यस्थता की और 1960 में सिंधु जल संधि पर समझौता किया गया।

भारत की ओर से तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान की ओर से राष्ट्रपति अयूब खान ने इस संधि पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें विश्व बैंक को भी तीसरे पक्ष के रूप में शामिल किया गया था।

कैसे हुआ नदियों का विभाजन

सिंधु जल संधि के तहत 6 नदियों को दो हिस्सों में बांटा गया। इसके तहत पूर्वी नदियो में रावी, ब्यास और सतलज नदी आई, जिस पर भारत को पूर्ण अधिकार मिला, जबकि पश्चिमी नदियों में सिंधु, झेलम और चिनाब नदी आई, जिनका करीब 80 फीसदी पानी पाकिस्तान को दिया गया।

पश्चिमी नदियों पर भारत को मिले ये अधिकार

सिंधु जल संधि के तहत भारत पश्चिमी नदियों के पानी को न ही रोक सकता है और न ही इसका भंडारण कर सकता है। हालांकि, भारत को इसके कुछ सीमित अधिकार दिए गए हैं, जो कि इस प्रकार हैः

-घरेलू उपयोग

-गैर-उपभोग्य उपयोग

-नदियों पर ऐसे पनबिजली परियोजनाएं लगाई जा सकती हैं, जिनसे बिना पानी को रोके हुए बिजली को तैयार किया जा सके। इसके साथ ही पानी से कृषि की जा सकती है।

दोनों देशों का होता है अपना सिंधु आयुक्त

संधि के तहत दोनों देशों का अपना एक सिंधु आयुक्त होता है, जो कि साल में कम से कम एक बार बैठक करते हैं। विवाद होने पर अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय की मदद ली जा सकती है। हालांकि, पहलगाम हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया है।


Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Jun 10, 2026, 14:38 IST

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