होली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। दिवाली के बाद होली ऐसा त्योहार है, जो कि बड़े स्तर पर और धूमधाम से मनाया जाता है। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि होली का त्योहार भारत के कुछ स्थानों पर नहीं मनाया जाता है, जिसमें हरियाणा के दुसेरपुर, उत्तराखंड का खुरजान, झारखंड का दुर्गापुर और गुजरात का रामसन समेत अन्य स्थल भी शामिल हैं।
इन जगहों पर अलग-अलग घटनाओं और मान्यताओं के कारण होली का त्योहार नहीं मनाया जाता है। क्या है इसके पीछे की वजह, जानने के लिए यह पूरा लेख पढ़ें।
हरियणा का दुसेरपुर
हरियाणा के दुसेरपुर में बीते 300 साल से होली का पर्व नहीं मनाया गया है। स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, यहां के लोगों ने एक साधु की अवहेलना की थी, जिसके बाद यहां होली का पर्व नहीं मनाया गया है।
झारखंड का दुर्गापुर
यहां दुर्गापुर में भी होली नहीं मनाई जाती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, रामगढ़ के राजा द्वारा दुर्गापुर के राजा दुर्गा प्रसाद की होली के दिन हत्या की गई थी, जिसके बाद यहां होली का पर्व नहीं मनाया जाता है। कुछ समय बाद यहां कुछ मल्हारों ने होली का पर्व मनाया था, लेकिन गांव वालों ने इसे स्वीकार नहीं किया और आने वाले वर्षों में होली नहीं मनाई गई।
उत्तराखंड का खुरजान और क्विली गांव
उत्तराखंड के खुरजान और क्विली गांव में भी होली का पर्व नहीं मनाया जाता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, गांव की कुल देवी त्रिपुर सुंदरी को शोर पसंद नहीं है। ऐसे में यदि गांव के लोग होली का पर्व मनाएंगे, तो गांव पर विपदा आएगी, इसलिए गांव के लोग होली नहीं मनाते हैं।
गुजरात, रामसन गांव
गुजरात के रामसन गांव मे भी बीते कई वर्षों से होली का पर्व नहीं मनाया गया है। ऐसा कहा जाता है कि एक बार होलिका दहन पर पूरे गांव में आग फैल गई थी, जिसमें कई घर जल गए थे। इसे लोगों ने अशुभ माना और होली का पर्व नहीं मनाया गया।
केरल
केरल में रहने वाले मलयाली समुदाय में भी होली नहीं मनाई जाती है। हालांकि, यहां सिर्फ विशेष समुदाय जैसे कुडुम्बी समुदाय द्वारा ही होली का पर्व मनाया जाता है, जिसे वे ‘मंजुल कुली’ कहते हैं। इनके अलावा यहां होली के पर्व का महत्त्व नहीं है।
तमिलनाडू
यहां कई इलाकों में होली का पर्व नहीं मनाया जाता है, बल्कि कामदेव की पूजा की जाती है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, इस दिन भगवान शिव ने कामदेव को भस्म किया था, ऐसे में यहां के लोग होली के दिन शोक मनाते हैं।
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