क्या यूपी कैबिनेट में शामिल होने के बाद बढ़ जाती है विधायक की सैलरी? समझें यहां

Last Updated: May 14, 2026, 13:46 IST

उत्तर प्रदेश में एक विधायक को हर महीने करीब 1.87 लाख रुपये तक वेतन और भत्ते मिलते हैं। इसमें मूल वेतन, यात्रा भत्ता और अन्य दैनिक खर्च शामिल होते हैं। लेकिन जब कोई विधायक मंत्री या कैबिनेट मंत्री बन जाता है, तो उसकी सैलरी के साथ-साथ सुविधाएं भी बढ़ जाती हैं।

विधायक और मंत्री की सैलरी
विधायक और मंत्री की सैलरी

जब भी कोई चुनी हुई सरकार अपने मंत्रिमंडल में नए चेहरों को शामिल करती है या पुराने मंत्रियों के विभागों में बदलाव करती है, उसे कैबिनेट विस्तार कहा जाता है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी कैबिनेट में नए मंत्रियों को जगह दी, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल भी उठने लगा है कि आखिर विधायक और मंत्री की सैलरी व सुविधाओं में कितना फर्क होता है।

विधायक और मंत्री की सैलरी में कितना अंतर?

उत्तर प्रदेश में एक विधायक को हर महीने करीब 1.87 लाख रुपये तक वेतन और भत्ते मिलते हैं। इसमें मूल वेतन, यात्रा भत्ता और अन्य दैनिक खर्च शामिल होते हैं। लेकिन जब कोई विधायक मंत्री या कैबिनेट मंत्री बन जाता है, तो उसकी सैलरी के साथ-साथ सुविधाएं भी बढ़ जाती हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, कैबिनेट मंत्री को करीब 2.5 लाख रुपये तक का मासिक वेतन के अलावा कई अतिरिक्त सुविधाएं दी जाती हैं।

मंत्री बनने के बाद  मिलती हैं कौन-कौन सी सुविधाएं?

मंत्री बनने के बाद नेताओं को सरकारी बंगला, सरकारी गाड़ी, सुरक्षा कर्मी, निजी स्टाफ और कई प्रशासनिक सुविधाएं मिलती हैं। इसके अलावा सरकारी बैठकों, दौरों और विभागीय कामकाज के लिए अलग-अलग भत्ते भी दिए जाते हैं। यही वजह है कि मंत्री पद को सिर्फ राजनीतिक ताकत ही नहीं बल्कि विशेष सुविधाओं के नजरिए से भी काफी अहम माना जाता है।

बढ़ जाती हैं जिम्मेदारियां

सरकार में मंत्री बनने के बाद किसी नेता की जिम्मेदारी पहले से काफी ज्यादा हो जाती है। उन्हें बड़े विभागों का काम संभालना पड़ता है और कई अहम सरकारी फैसलों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसी कारण सरकार उन्हें अतिरिक्त संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध कराती है, ताकि वे अपने काम को बेहतर तरीके से निभा सकें। 

कैसे तय होती है सैलरी?

भारत में विधायकों और मंत्रियों की सैलरी राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए नियमों के तहत तय होती है। हर राज्य अपने हिसाब से वेतन और सुविधाओं में बदलाव कर सकता है। मंत्री बनने के बाद विधायक की पहचान तो विधायक की ही रहती है, लेकिन उसे मंत्री पद से जुड़ी अतिरिक्त सुविधाएं और भत्ते मिलने लगते हैं। यही कारण है कि कैबिनेट में शामिल होने के बाद उनकी कुल आय और सुविधाएं पहले के मुकाबले काफी बढ़ जाती हैं।

Bagesh Yadav
Bagesh Yadav

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First Published: May 14, 2026, 13:46 IST

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