Five-Year Plans: भारत की पंचवर्षीय योजनाएं, कब से कब तक, यहां देखें उद्देश्य और परिणाम
भारत मेंपंचवर्षीय योजनाएं(Five-Year Plans) देश के आर्थिक विकास का महत्त्वपूर्ण भाग रही हैं। यही वजह है कि आज भी इन्हें UPSC, PCS और SSC की महत्त्वपूर्ण परीक्षाओं में पूछा जाता है। इस लेख में हम इन योजनाओं के बारे में विस्तार से जानेंगे।
भारत जब आजाद हुआ, तो देश के सामने भुखमरी, गरीबी, साक्षरता, कमजोर अर्थव्यवस्था थी। इन समस्याओं से निपटने के साथ देश के संसाधनों का सही इस्तेमाल करने के लिए भारत ने सोवियत संघ(USSR) मॉडल से प्रेरित होकर पंचवर्षीय योजनाओं का मॉडल तैयार किया, जो कि भारत के आर्थिक विकास के साथ-साथ सामाजिक विकास में भी बहुत ही महत्त्वपूर्ण साबित हुई।
इन योजनाओं को तैयार करने के साथ-साथ इसे लागू करवाने की जिम्मेदारी योजना आयोग (Planning Commission) को दी गई, जिसका गठन 15 मार्च, 1950 को किया गया था। देश में कुल 12 पंचवर्षीय योजनाओं को लागू किया गया था। साल 2015 में योजना आयोग की जगह नीति आयोग बना और पंचवर्षीय योजनाएं हमेशा के लिए समाप्त हो गईं। हालांकि, आज भी UPSC, PCS और SSC की महत्त्वपूर्ण परीक्षाओं में हमें इससे जुड़े सवाल देखने को मिलते हैं।
पंचवर्षीय योजनाओं का प्रारंभिक चरण
पंचवर्षीय योजनाओं का प्रारंभिक चरण 1951 से 1965 तक रहा था। इस दौरान बुनियादी ढांचे का निर्माण किया गया।
पहली पंचवर्षीय योजना (1951 - 1956)
-यह योजना हैरोड-डोमर मॉडल पर आधारित थी, जिसकी मुख्य प्राथमिकता कृषि, सिंचाई और बिजली थी। आजादी के बाद देश में खाद्यान को लेकर भारी संकट था, ऐसे में पहली योजना में कृषि और सिंचाई जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया।
-यह योजना काफी सफल रही थी और इस दौरान भाखड़ा-नांगल बांध, हीराकुंड बांध और दामोदर घाटी बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं को शुरू किया गया था। आपको बता दें कि इस समय में ही प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज 5 IITs की भी नींव पड़ी थी।
-इस योजना की विकास दर का लक्ष्य 2.1 फीसदी थी, लेकिन वास्तविक तौर पर यह 3.6 फीसदी तक रही थी।
दूसरी पंचवर्षीय योजना (1956 - 1961)
दूसरी पंचवर्षीय योजना पी.सी. महालनोबिस मॉडल पर आधारित थी, जिसकी मुख्य प्राथमिकता भारी उद्योग और औद्योगीकरण को बढ़ावा देना था। इस योजना के तहत सार्वजनिक क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया, जिससे देश आत्मनिर्भर बन सके। वहीं, छत्तीसगढ़ के भिलाई, पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर और ओडिसा के राउरकेला में विदेशी सहयोग से स्टील प्लांट स्थापित किये गए। यही वह समय था, जब टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) की स्थापना भी हुई थी।
-इस योजना में विकास दर का लक्ष्य 4.5 फीसदी रखा गया था, जो कि 4.27 फीसदी हासिल हुआ था।
तीसरी पंचवर्षीय योजना (1961 - 1966)
यह योजना सैंडी और सुखमय चुक्रवर्ती मॉडल पर आधारित थी, जिसकी मुख्य प्राथमिकता कृषि और उद्योग, दोनों को बढ़ावा देना था। हालांकि, यह योजना सबसे असफल योजना साबित हुई थी, जिसके तीन मुख्य कारण थेः
-1962 का भारत-चीन युद्ध।
-1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध।
-1965-66 का भीषण सूखा।
-इस योजना के तहत विकास दर का लक्ष्य 5.6 फीसदी तय किया गया था, लेकिन वास्तविक रूप से यह 2.4 फीसदी ही रह गया था।
योजना अवकाश (1966 - 1969)
देश में तीसरी योजना की विफलता और युद्ध की वजह से देश की अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ा था। ऐसे में सरकार चौथी योजना को शुरू करने की स्थिति में नहीं थी। सरकार ने तीन साल के लिए तीन वार्षिक योजनाओं को तैयार किया, जिसे योजना अवकाश भी कहा जाता है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इस दौरान ही भारत में हरित क्रांति की शुरुआत हुई थी, जिससे देश कृषि और खाद्यान के मामले में आत्मनिर्भर बना था।
मध्य चरण (1969 - 1985): आत्मनिर्भरता और गरीबी हटाओ
भारत में योजनाओं के लिहाज से मध्य चरण की शुरुआत अवकाश योजना के बाद हुई थी, जिसमें आत्मनिर्भरता और गरीबी हटाओं पर जोर दिया गया था।
चौथी पंचवर्षीय योजना (1969 - 1974)
चौथी पंचवर्षीय योजना अशोक रुद्र और एलन मन्ने मॉडल पर आधारित थी, जिसे गाडगिल फॉर्मूला भी कहा जाता है। इसकी मुख्य प्राथमिकता देश में स्थिरता को बनाए रखने के साथ विकास और आत्मनिर्भरता को भी प्राप्त करना था।
-योजना के तहत 1969 में 14 प्रमुख भारतीय बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ और 1974 में भारत ने देश का पहला शांतिपूर्ण परमाणु परीक्षण 'स्माइलिंग बुद्धा' (पोखरण-I) भी किया। इस अवधि में 1971 का भारत-पाक युद्ध भी हुआ, जिससे भारत का पड़ोसी देश बांग्लादेश का जन्म हुआ।
-योजना में विकास दर का लक्ष्य 5.7 फीसदी रखा गया था, जो कि वास्तव में 3.3 फीसदी रही थी।
| योजना | अवधि | मॉडल / मुख्य उद्देश्य | परिणाम |
| पहली | 1951-56 | हैरोड-डोमर (कृषि और सिंचाई) | सफल (3.6%) |
| दूसरी | 1956-61 | पी.सी. महालनोबिस (भारी उद्योग) | सफल (4.27%) |
| तीसरी | 1961-66 | आत्मनिर्भरता (कृषि व उद्योग) | विफल (2.4% - युद्ध और सूखा) |
| चौथी | 1969-74 | स्थिरता के साथ विकास (बैंक राष्ट्रीयकरण) | धीमी (3.3%) |
| पांचवीं | 1974-78 | गरीबी हटाओ (4 वर्ष में समाप्त) | सफल (4.8%) |
| छठी | 1980-85 | गरीबी निवारण और रोजगार | सफल (5.7%) |
| सातवीं | 1985-90 | अनाज, काम और उत्पादकता | सफल (6.01%) |
| आठवीं | 1992-97 | मानव संसाधन (LPG सुधारों के बाद) | अत्यंत सफल (6.8%) |
| नौवीं | 1997-02 | सामाजिक न्याय और समानता | धीमी (5.4%) |
| दसवीं | 2002-07 | प्रति व्यक्ति आय दोगुना करना | सफल (7.6%) |
| ग्यारहवीं | 2007-12 | तीव्र और समावेशी विकास | सफल (8.0%) |
| बारहवीं | 2012-17 | तीव्र, समावेशी और सतत विकास | अंतिम योजना |
पांचवीं पंचवर्षीय योजना (1974 - 1978)
पांचवी पंचवर्षीय योजना की मुख्य प्राथमिकता गरीबी हटाओ और आत्मनिर्भरता थी। इस दौरान इंदिरा गांधी ने ‘गरीबी हटाओ’ का प्रसिद्ध नारा दिया। वहीं, जब देश में आपातकाल के बाद 1978 में मोरारजी देसाई की सरकार आई, तो उन्होंने इस योजना को समय से एक साल पहले ही यानि कि 1978 में समाप्त कर दिया।
-इस योजना की विकास दर का लक्ष्य 4.4 फीसदी थी, लेकिन इसकी प्राप्ति 4.8 फीसदी रही थी।
रोलिंग प्लान(Rolling Plan: 1978 - 1980)
देश में जनता पार्टी की सरकार बनी और पार्टी ने पंचवर्षीय योजना को हटाकर रोलिंग प्लान पेश कर दिया। हालांकि, 1980 में कांग्रेस की दोबारा सरकार बनी और रोलिंग प्लान को बंद कर दिया गया।
छठी पंचवर्षीय योजना (1980 - 1985)
छठी पंचवर्षीय योजना की प्राथमिकता गरीबी से निवारण, आर्थिक उदारीकरण और रोजगार पैदा करना था। इस दौरान देशभर में ग्रामीण विकास पर जोर दिया गया और इस कड़ी में नाबार्ड (NABARD - 1982) बैंक की स्थापना हुई। वहीं, इसी योजना के तहत Family Planning को सख्ती से बढ़ाया गया।
-योजना के विकास दर का लक्ष्य 5.2% था, लेकिन वास्तविक वृद्धि 5.7%रही थी।
आधुनिक चरण (1985 - 2002)
पंचवर्षीय योजनाओं में 1985 के बाद उदारीकरण का दौर शुरू हो गया था।
सातवीं पंचवर्षीय योजना (1985 - 1990)
इस योजना की मुख्य प्राथमिकता काम और उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ अनाज को भी बढ़ावा देना था। योजना में रोजगार बढ़ाने पर फोकस किया गया था।
-यह वह समय था, जब निजी क्षेत्र को अधिक प्राथमिकता दी गई और जवाहर रोजगार योजना को शुरू किया गया था।
-इस योजना का विकास दर का लक्ष्य 5.0% था, लेकिन यह वृद्धि 6.01% तक दर्ज की गई थी।
1990 से 1992 तक LPG का दौर
उस समय केंद्र में कई बार सरकार बदल गई थी। साथ ही, भारत का भुगतान संतुलन संकट भी गहरा गया था, जिससे 8वीं योजना को समय पर शुरू नहीं किया जा सका। हालांकि, इसी दौरान 1991 में भारत ने LPG (उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण)जैसे सुधारों को अपनाया।
आठवीं पंचवर्षीय योजना (1992 - 1997)
इस योजना की मुख्य प्राथमिकता रोजागर, शिक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य थी। योजना की इस अवधि को भारतीय अर्थव्यवस्था का आधुनिक मोड़ भी कहा जाता है। इस योजना के समय ही भारत देश 1995 में विश्व व्यापार संगठन (WTO) का सदस्य बना था।
-योजना का विकास दर का लक्ष्य 5.6 फीसदी थी, लेकिन वृद्धि 6.8 फीसदी की दर्ज हुई थी, जो कि बहुत सफल थी।
नौवीं पंचवर्षीय योजना (1997 - 2002)
योजना की मुख्य प्राथमिकता सामाजिक न्याय और समानता के साथ आर्थिक विकास को प्राप्त करना था। यह योजना 1997 के एशियाई वित्तीय संकट और 1999 के कारगिल युद्ध की वजह से अपने लक्ष्यों को पूरा नहीं कर सकी थी।
-इस योजना की विकास दर का लक्ष्य 6.5 फीसदी थी, लेकिन वास्तव में यह 5.4 फीसदी रहा था।
अंतिम चरण (2002 - 2017)
पंचवर्षीय योजनाओं का अंतिम चरण 2002 से 2017 तक रहा था, जिसमें समावेशी और सतत विकास पर ध्यान दिया गया था।
10वीं पंचवर्षीय योजना (2002 - 2007)
इस योजना की मुख्य प्राथमिकता आगामी 10 वर्षों में भारत की प्रति व्यक्ति आय को दोगुना करना था। साथ ही, 2007 तक गरीबी अनुपात को 15 फीसदी तक कम कर साक्षरता को बढ़ावा देना था।
-योजना में विकास दर का लक्ष्य 8 फीसदी था, लेकिन वास्तव में यह 7.6 फीसदी रहा था। यह अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड था।
11वीं पंचवर्षीय योजना (2007 - 2012)
इस योजना की मुख्य प्राथमिकता अधिक समावेशी विकास पर ध्यान केंद्रित करना था। योजना के तहत
'अनिवार्य शिक्षा का अधिकार' (RTE Act) प्रभावी रूप से लागू हुआ। वहीं, योजना में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।
-योजना में विकास दर का लक्ष्य 9 फीसदी थी, जो कि वास्तव में 8 फीसदी रहा था।
12वीं पंचवर्षीय योजना (2012 - 2017)
इस योजना की मुख्य प्राथमिकता तीव्र समावेशी और सतत विकास पर ध्यान केंद्रित करना था। योजना के तहत गैर कृषि क्षेत्रों में रोजगार पैदा करना, सभी गांवों को बिजली से जोड़ना और देश में कुपोषण दर को कम करना शामिल था।
-यह भारत की अंतिम पंचवर्षीय योजना थी। साल 2014 में भाजपा सरकार सत्ता में आई और योजना आयोग को समाप्त कर नीति आयोग का गठन किया गया।
2015 में हुई नीति आयोग की शुरुआत
भारत में नीति आयोग की शुरुआत 1 जनवरी, 2015 को हुई थी। NITI Aayog का पूरा नाम National Institution for Transforming India है।
पहले और अब में क्या अंतर है ?
कई बार योजना आयोग की पंचवर्षीय योजना और नीति आयोग के अंतर को लेकर परीक्षाओं में पूछ लिया जाता है। आपको बता दें कि पंचवर्षीय योजना केंद्र से राज्यों की ओर पर काम करती थीं, जबकि नीति आयोग सहकारी संघवाद नीति पर काम करता है। इसमें राज्यों की भागीदारी को अधिक महत्त्व दिया जाता है। इसके तहत सरकार 5 साल के बदले 15 साल की समय सीमा को लेकर काम करती है।
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