UP- Two-day Work from Home: यूपी में अब हफ्ते में 2 दिन 'वर्क फ्रॉम होम', टाइंमिंग में भी हुए बदलाव, जानें नया नियम

Last Updated: May 18, 2026, 17:30 IST

उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदूषण और ट्रैफिक जाम को कम करने के लिए 50 से अधिक कर्मचारियों वाले निजी संस्थानों को हफ्ते में दो दिन 'वर्क फ्रॉम होम' और 'स्टैगर्ड ऑफिस टाइमिंग्स' लागू करने की सलाह दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों पर श्रम विभाग द्वारा जारी यह एडवाइजरी पूरी तरह से स्वैच्छिक है, जिसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ कर्मचारियों के स्वास्थ्य में सुधार लाना है। अंतरराष्ट्रीय संकट के बीच मितव्ययिता उपायों को अपनाने की प्रधानमंत्री की अपील के बाद, श्रम और रोजगार मंत्री की समीक्षा बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।

UP- Two-day Work from Home: यूपी में अब हफ्ते में 2 दिन 'वर्क फ्रॉम होम', टाइंमिंग में भी हुए बदलाव, जानें नया नियम
UP- Two-day Work from Home: यूपी में अब हफ्ते में 2 दिन 'वर्क फ्रॉम होम', टाइंमिंग में भी हुए बदलाव, जानें नया नियम

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में प्रदूषण के बढ़ते स्तर और ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। सरकार ने सभी निजी उद्योगों, कंपनियों और संस्थानों को अपने कर्मचारियों के लिए हफ्ते में दो दिन 'वर्क फ्रॉम होम' लागू करने का सुझाव दिया है।

इसके साथ ही, सड़कों पर एक साथ वाहनों का दबाव कम करने के लिए 'स्टैगर्ड ऑफिस टाइमिंग्स' यानी दफ्तरों के खुलने और बंद होने के टाइम को अलग-अलग करने की सलाह दी गई है। सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल पर्यावरण को फायदा होगा, बल्कि कर्मचारियों के स्वास्थ्य और कार्यक्षमता  में भी सुधार आएगा।

यह सलाह शनिवार को श्रम और रोजगार मंत्री अनिल राजभर की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक के बाद जारी की गई, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों पर हुई थी। यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नागरिकों से मौजूदा वैश्विक संकट के मद्देनजर मितव्ययिता उपायों को अपनाने की अपील के बाद आयोजित की गई थी।

“श्रम विभाग द्वारा बड़ी संख्या में कर्मचारियों वाले उद्योगों और संस्थानों के लिए यह सलाह जारी की गई है। यह किसी पर बाध्यकारी नहीं है। लेकिन मौजूदा अंतरराष्ट्रीय स्थिति को देखते हुए, मुख्यमंत्री ने 50 से अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में सप्ताह में दो दिन घर से काम करने को प्रोत्साहित करने की अपील की थी। संबंधित संस्थानों और विभागों को अपनी-अपनी तरह से इस सलाह का पालन करना होगा,” एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया।

यूपी सरकार की नई एडवाइजरी

यूपी सरकार द्वारा जारी इस नई गाइडलाइन के तहत किन-किन बदलावों की सिफारिश की गई है, उसे आप नीचे दी गई टेबल से समझ सकते हैं:

मुख्य विषय

सरकार की सिफारिश/सुझाव 

वर्क फ्रॉम होम (WFH)

कर्मचारियों को सप्ताह में 2 दिन घर से काम करने की अनुमति दी जाए।

स्टैगर्ड टाइमिंग्स 

सभी दफ्तर एक टाइम पर न खुलकर, अलग-अलग शिफ्ट (जैसे 8:00 AM, 9:30 AM, 11:00 AM) में खुलें।

टारगेटेड संस्थान

आईटी कंपनियां, कॉर्पोरेट ऑफिस, निजी उद्योग और शैक्षणिक संस्थान।

मुख्य उद्देश्य

वायु प्रदूषण में कमी लाना, कार्बन फुटप्रिंट घटाना और ट्रैफिक जाम से मुक्ति।

लागू करने का क्षेत्र

विशेष रूप से दिल्ली-NCR (नोएडा, गाजियाबाद) और राज्य के बड़े मेट्रो शहर।

'स्टैगर्ड ऑफिस टाइमिंग' और इसके फायदे क्या है?

अक्सर देखा जाता है कि सुबह 9:00 बजे और शाम 6:00 बजे के दौरान अचानक सड़कों पर भारी ट्रैफिक जाम लग जाता है, क्योंकि सभी दफ्तरों का समय एक ही होता है। इसी को नियंत्रित करने के लिए 'स्टैगर्ड टाइमिंग्स' का सुझाव दिया गया है।

  • ट्रैफिक में राहत: जब अलग-अलग कंपनियों के खुलने का समय अलग (जैसे सुबह 8:30, 9:30 या 10:30 बजे) होगा, तो सड़कों पर गाड़ियों की कतारें नहीं लगेंगी।
  • प्रदूषण पर लगाम: गाड़ियों के रेंगने या जाम में खड़े रहने से सबसे ज्यादा धुआं और प्रदूषण फैलता है। समय के बदलाव से इसमें भारी कमी आएगी।
  • कर्मचारियों को मानसिक शांति: जाम में समय बर्बाद न होने से कर्मचारी तनावमुक्त होकर दफ्तर पहुंच सकेंगे।

उद्योगों और संस्थानों के लिए अन्य महत्वपूर्ण निर्देश

एडवाइजरी में सिर्फ वर्क फ्रॉम होम ही नहीं, बल्कि पर्यावरण को बचाने के लिए कुछ और भी जरूरी बातें कही गई हैं:

1. कारपूलिंग को बढ़ावा देना

सरकार ने कंपनियों से कहा है कि वे अपने कर्मचारियों को कारपूल (एक ही गाड़ी में कई साथियों का आना) करने या ऑफिस कैब/पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करें।

2. जेनरेटर सेट के उपयोग पर पाबंदी

औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण को कम करने के लिए बिजली कटने के दौरान भारी डीजल जेनरेटरों के उपयोग को कम करने और उनके स्थान पर क्लीनर फ्यूल (जैसे सीएनजी या पीएनजी) या सोलर पावर अपनाने की सलाह दी गई है।

3. कंस्ट्रक्शन साइट्स पर नियमों का पालन

जो उद्योग या संस्थान अपने परिसरों में निर्माण कार्य करवा रहे हैं, उन्हें धूल उड़ने से रोकने के लिए पानी का छिड़काव करने और निर्माण सामग्री को ढककर रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।

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Akshara Verma
Akshara Verma

Content Writer

Akshara Verma is an Executive Content Writer at Jagran Josh, specializing in authoritative content focused on Education, Current Affairs, and General Knowledge. A graduate of Bharati Vidyapeeth's Institute of Computer Applications and Management (BVICAM) with a Bachelor of Journalism and Mass Communication, Akshara leverages her 1.5 years of experience to create impactful pieces, building on her previous roles in content writing and Public Relations at both Genesis BCW and Dainik Bhaskar. She can be reached at akshara.verma@jagrannewmedia.com.

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First Published: May 18, 2026, 17:30 IST

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