उत्तर भारत में पाई जाने वाली मिट्टी और इसके प्रकार, पढ़ें

Last Updated: Jun 17, 2026, 18:05 IST

उत्तर भारत का मैदान अपनी उपजाऊ मिट्टी के लिए जाना जाता है। यहां हिमालय से आने वाले नदियों के माध्यम से मिट्टी बहकर मैदानी इलाकों में पहुंचती है। इस लेख में हम मिट्टी और इसके प्रकार के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे।

मिट्टी के प्रकार
मिट्टी के प्रकार

उत्तर भारत का मैदान अपनी उपजाऊ मिट्टी के लिए जाना जाता है। इसके लिए यहां हिमालय से नदियों के साथ बहकर आने वाली मिट्टी जिम्मेदार है। क्योंकि, हिमालय से निकलने वाली नदियां पूरे वर्ष बहती हैं, जिनसे पूरे वर्ष हिमालय से अवसाद आता है और मिट्टी तंत्र का निर्माण होता है। यहां मुख्य रूप से जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है, जो कि देश के करीब 40 फीसदी हिस्से को कवर करती है।

उत्तर भारत में मिट्टी के प्रकार

उत्तर भारत में विभिन्न प्रकार की मिट्टी पाई जाती है। क्योंकि, हिमालय के दक्षिण से लेकर मैदानी इलाकों तक मिट्टी की बनावट बदल जाती है। हम इस बारे में विस्तार से जानेंगे।

भाबर मिट्टी

मिट्टी हिमालय की शिवालिक पहाड़ियों में मिलती है, जो कि एक पतली मिट्टी होती है। इसमें कंकड़ और पत्थर ज्यादा होते हैं। यह मिट्टी कृषि के लिए अधिक उपजाऊ नहीं होती है। कई बार छोटी नदियां इस मिट्टी में आकर भूमिगत हो जाती हैं।

तराई मिट्टी

यह क्षेत्र भाबर के नीचे दक्षिण में पाया जाता है, जो कि तराई मिट्टी वाला क्षेत्र है। यहां भाबर में लुप्त हुई नदियां दोबारा सतह पर आ जाती हैं। इसमें बारीक रेत, गाद और मिट्टी होती है। यहां पानी अधिक रहता है, जिससे यहां की मिट्टी अधिक दलदली रहती है। इस मिट्टी में नाइट्रोजन और कार्बनिक पदार्थों की भरपूर मात्रा होती है। इस मिट्टी पर चावल, गन्ना और गेहूं की खेती जाती है। 

बांगर मिट्टी

यह उत्तर भारत के उच्च भाग वाले क्षेत्रों में पाई जाती है, जहां बाढ़ का पानी नहीं पहुंचता है। यह पुरानी जलोढ़ मिट्टी होती है, जो कि गहरे रंग की और सख्त होती है। इसमें चूनेदार कंकड़ पाए जाते हैं। इस मिट्टी में गेहूं और तिलहल की खेती की जाती है।

खादर मिट्टी

खादर मिट्टी को नई जलोढ़ मिट्टी भी कहते हैं। यह नदियों का बाढ़ वाला इलाका होता है, जहां हर साल बाढ़ की वजह से मिट्टी की नई परत बन जाती है। यह मिट्टी बहुत हल्की और उपजाऊ होती है। साथ ही, यह नमी को भी सोख लेती है। इस मिट्टी की खास बात यह है कि इसमें रासायनिक उर्वरकों का उपयोग किये बिना चावल, सब्जी, जूट और दलहन की खेती की जा सकती है।

मिट्टी की विशेषताएं और फसलें

उत्तर भारत की जलोढ़ मिट्टी में पोटाश और चूना भरपूरा मात्रा में पाया जाता है। इससे पौधों को अच्छा पोषण मिलता है। हालांकि, इस मिट्टी में फॉस्फेट, नाइट्रोजन और नमी की कम रहती है। ऐसे में किसानों को रासायनिक खादों का इस्तेमाल करना पड़ता है।

फसलेंः यहां की मिट्टी में विभिन्न प्रकार की फसलें उगाई जा सकती हैं। यही वजह है कि पूरे 

उत्तर भारत को भारत का 'अन्न भंडार' कहा जाता है। इस क्षेत्र में मुख्य रूप से गेहूं, चावल, गन्ना, मक्का, आलू और कपास की अधिक खेती होती है। आपको बता दें कि कपास के लिए काली मिट्टी की जरूरत होती है। 

नोटः यदि आप किसी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो इन मिट्टी को ध्यान से पढ़ लें, क्योंकि विभिन्न परीक्षाओं में भारत की मिट्टी और इसके प्रकार को लेकर सवाल पूछे जाते हैं।


Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior Executive - Editorial

A seasoned journalist and Multimedia Producer with over 8 years of experience in print and digital media, Kishan specializes in turning complex topics into clear, compelling narratives. Currently working as a Senior Content Writer in the GK section at Jagran Josh, he brings deep subject expertise in History, Polity, and Geography, writing on national and international affairs from a general knowledge perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com.

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First Published: Jun 17, 2026, 18:05 IST

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