भारत का सबसे बड़ा डीजल रेल इंजन कारखाना कौन-सा है, जानें यहां

Last Updated: May 21, 2026, 13:58 IST

भारतीय रेल को देश की लाइफलाइन भी कहा जाता है, जो कि देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने का काम कर रही है। इस कड़ी में देश की ट्रेनों को डीजल रेल इंजन भी रफ्तार दे रहे हैं। इस लेख में हम भारत के सबसे बड़े डीजल रेल इंजन कारखाने के बारे में जानेंगे।

डीजल रेल इंजन
डीजल रेल इंजन

भारतीय रेलवे दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। रेलवे में प्रतिदिन 13 हजार से अधिक ट्रेनों का संचालन किया जाता है, जिसमें पैसेंजर से लेकर  मालगाड़ियां शामिल हैं। इन ट्रेनों को रफ्तार देने का काम इलेक्ट्रिक से लेकर डीजल रेल इंजन तक कर रहे हैं।

देश की सबसे बड़ी डीजल रेल इंजन फैक्ट्री बनारस रेल इंजन कारखाना(BLW) है। यह वाराणसी में है, जो कि उत्पादन और क्षमता में महत्त्वपूर्ण है। हालांकि, कुछ जगहों पर हमें पटियाला स्थित डीजल रेलइंजन आधुनिकीकरण कारखाने का भी जिक्र देखने को मिलता है।

पहले इस नाम से जाना जाता था BLW

बनारस लोकोमोटिव वर्क्स पहले डीजल लोकोमोटिव वर्क्स(DLW) नाम से जाना जाता था। इसकी स्थापना 1961 में हुई थी। हालांकि, कारखाने में पहले इंजन का उत्पादन 1964 में किया गया था।

दुनिया के सबसे बड़े रेल इंजन निर्माताओं में शामिल 

आपको बता दें कि बनारस का यह रेल इंजन कारखाना सिर्फ भारत का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के सबसे बड़े रेल इंजन निर्माताओं में से एक है। यहां डीजल रेल इंजन के साथ-साथ इलेक्ट्रिक रेल इंजन का भी निर्माण किया जा रहा है।

WAP-7 और WAP-9 का करता है निर्माण 

बनारस लोकोमोटिव वर्क्स में डीजल इंजन श्रेणी में तैयार किये जाने वाले पैसेंजर लोकोमोटिव को अब इलेक्ट्रिक श्रेणी में तैयार किया जा रहा है। इनमें प्रमुख रूप से  WAP-7 और WAP-9 जैसे शक्तिशाली रेल इंजन शामिल है। यहां P का मतलब पैसेंजर श्रेणी से है।

डीजल रेल इंजन कारखाने की प्रमुख विशेषताएं 

-वाराणसी में बनने वाले रेल इंजन की न सिर्फ भारत में आपूर्ति की जाती है, बल्कि विदेशों में भी रेल इंजन की आपूर्ति की जाती है। इसमें मुख्य रूप से  श्रीलंका, म्यांमार, तंजानिया, सूडान और वियतनाम शामिल है। इन देशों में इंजन को निर्यात किया जाता है।

रेल इंजन कारखाने ने बनाया है यह रिकॉर्ड

आपको बता दें कि बनारस रेल इंजन कारखाने ने दो पुराने डीजल इंजन को जोड़कर एक शक्तिशाली इलेक्ट्रिक इंजन बनाया था, जो कि 10,000 HP का इंजन था। पर्यावरण संबंधी व ईंधन खपत को देखते हुए अब डीजल इंजन का निर्माण बहुत कम हो गया है। रेल कारखानों में अब इलेक्ट्रिक इंजन को बनाया जा रहा है। 

Kishan Kumar
Kishan Kumar

Senior content writer

A seasoned journalist with over 7 years of extensive experience across both print and digital media, skilled in crafting engaging and informative multimedia content for diverse audiences. His expertise lies in transforming complex ideas into clear, compelling narratives that resonate with readers across various platforms. At Jagran Josh, Kishan works as a Senior Content Writer (Multimedia Producer) in the GK section. He writes on national and international topics from a GK perspective. He can be reached at Kishan.kumar@jagrannewmedia.com

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First Published: May 21, 2026, 13:58 IST

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