भारत का ऐसा गांव जहां खामोशी ही भाषा है.. जानिए ‘साइलेंट विलेज’ की कहानी

Last Updated: Jun 29, 2026, 18:13 IST

डडकई को भारत का ‘साइलेंट विलेज’ कहा जाता है क्योंकि यहां की करीब 2,000 की आबादी में कई लोग जन्म से ही सुनने और बोलने में सक्षम नहीं हैं। चलिए जानते है इसके बारें में विस्तार से.

भारत का ऐसा गांव जहां खामोशी ही भाषा है.. जानिए ‘साइलेंट विलेज’ की कहानी
भारत का ऐसा गांव जहां खामोशी ही भाषा है.. जानिए ‘साइलेंट विलेज’ की कहानी

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले की गंडोह तहसील में बसा ‘डडकई’ या ‘धदकई’ (Dadhkai)  गांव अपनी खूबसूरती और अनोखी पहचान के लिए जाना जाता है। चारों तरफ ऊंची पहाड़ियां, घने जंगल और हरियाली से घिरा यह गांव किसी शांत तस्वीर जैसा नजर आता है। लेकिन इसकी असली कहानी इसकी प्राकृतिक खूबसूरती से कहीं ज्यादा खास है। चलिए इस रोचक गांव की कहानी के बारें में विस्तार से पढ़तें है.  

इसे क्यों कहा जाता है साइलेंट विलेज

डडकई को भारत का ‘साइलेंट विलेज’ कहा जाता है क्योंकि यहां की करीब 2,000 की आबादी में कई लोग जन्म से ही सुनने और बोलने में सक्षम नहीं हैं। अल जज़ीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, गांव के लगभग हर परिवार में कोई न कोई ऐसा सदस्य है, जो आवाज की दुनिया से दूर है। फिर भी यहां के लोग अपनी जिंदगी को पूरे आत्मविश्वास और खुशहाली के साथ जीते हैं।

बिना बोले बनाई अपनी अलग पहचान

आवाज के बिना भी डडकई के लोगों ने बातचीत का अपना खास तरीका खोज लिया है। उन्होंने एक अनोखी साइन लैंग्वेज विकसित की है, जिसके जरिए वे आसानी से एक-दूसरे से जुड़ते हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह भाषा सिर्फ मूक-बधिर लोग ही नहीं, बल्कि गांव के सामान्य लोग भी समझते और इस्तेमाल करते हैं।

पीढ़ियों से चली आ रही एक वैज्ञानिक वजह 

वैज्ञानिकों और डॉक्टरों के अनुसार, गांव में जन्मजात मूक-बधिरता के पीछे जेनेटिक कारण जुड़े हुए हैं। डडकई गांव गुज्जर मुस्लिम समुदाय का है, जहां लंबे समय तक करीबी रिश्तेदारों में विवाह होने की परंपरा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसी वजह से भी यह जेनेटिक समस्या कई पीढ़ियों तक आगे बढ़ती रही है। 

पुराने विश्वासों से आधुनिक सोच तक का सफर

कभी इस समस्या को गांव के लोग किसी श्राप या अन्य कारण से जोड़कर देखते थे, लेकिन समय के साथ विज्ञान ने इसकी असली वजह सामने रखी। डडकई में जन्मजात मूक-बधिरता (जेनेटिक म्यूटेशन) के मामले को एक दुर्लभ जेनेटिक स्थिति के रूप में समझा गया, जिससे लोगों की सोच में भी बदलाव आया। 

सेना और सरकारी संस्थाओं की पहल     

आज डडकई सिर्फ एक “मौन गांव” नहीं, बल्कि संघर्ष और हौसले की मिसाल बन चुका है। भारतीय सेना और सरकारी संस्थाओं ने यहां के युवाओं को साइन लैंग्वेज और बेहतर अवसरों से जोड़ने की दिशा में काम किया है। हाल के वर्षों में यहां के युवाओं और महिलाओं ने मतदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेकर दिखाया कि आवाज न होने के बावजूद उनकी मौजूदगी पूरी दुनिया तक पहुंच सकती है।

Bagesh Yadav
Bagesh Yadav

Senior Executive - Editorial

Bagesh Yadav is a journalist and current affairs analyst with over six years of experience in education journalism, national and international affairs, and digital media. He has contributed to India’s leading knowledge platforms, including Vision IAS and Only IAS, and currently serves in a senior editorial role at Jagranjosh.com, where he leads coverage across the Current Affairs and General Knowledge sections. His expertise spans breaking news, government policy analysis, world affairs, sports updates, science and technology, and visually engaging infographics. Known for his commitment to factual accuracy, editorial integrity, and audience-first storytelling, Bagesh delivers well-researched, accessible, and impactful journalism that serves millions of students, competitive exam aspirants, and informed readers across India.

... Read More
First Published: Jun 29, 2026, 18:13 IST

आप जागरण जोश पर भारत, विश्व समाचार, खेल के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए समसामयिक सामान्य ज्ञान, सूची, जीके हिंदी और क्विज प्राप्त कर सकते है. आप यहां से कर्रेंट अफेयर्स ऐप डाउनलोड करें.

Trending

Latest Education News