युवाओं को शॉर्टकट नहीं, कड़ी मेहनत और धैर्य को बनाना होगा सफलता का मंत्र: IIT मद्रास प्रोफेसर शिवकुमार विजयराघवलु
आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर शिवकुमार विजयराघवलु ने युवाओं को देश का भविष्य बताते हुए उन्हें नवाचार, निष्ठा और चरित्र निर्माण पर ध्यान देने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल नौकरी खोजने के बजाय अवसर पैदा करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए तैयार रहना चाहिए।
आज के युवा एक ऐसे दौर में खड़े हैं, जहां उनके कंधों पर न केवल अपने भविष्य की जिम्मेदारी है, बल्कि विश्व को एक नई दिशा दिखाने का कार्यभार भी है। कैसे युवा एक नए भारत का निर्माण कर सकते हैं, कैसे गढ़ सकते हैं अपना चरित्र, बता रहे हैं आइआइटी मद्रास के असिसटेंट प्रोफेसर शिवकुमार विजयराघवलु
भारत केवल प्राकृतिक ऊर्जा, तकनीक, सैन्य ताकत या अर्थव्यवस्था से समृद्ध नहीं है, भारत की असली ताकत है देश के युवा, जो न केवल देश का भविष्य बना रहे हैं बल्कि विश्व को एक नई दिशा देने का काम भी कर रहे हैं। इसलिए आज के युवाओं को क्लासरूम की पढ़ाई को केवल डिग्री और नौकरी पाने का साधन नहीं समझना चाहिए बल्कि नवाचार के लिए खुद को तैयार करना चाहिए। उनका दायित्व समाज को आगे बढाने के लिए होना चाहिए। क्लासरूम में केवल तथ्य ज्ञान नहीं मिलता, यहीं से महान चिंतक, रचयिता, बुद्धिजिवी, वैज्ञानिक, उद्योगपति और पालिसी मेकर्स बनते हैं।
निष्ठा और अनुशासन सीखें युवा
एआइ और आटोमेशन के बदौलत जल्द ही उद्योग और तकनीक की तस्वीर बदलने वाली है। ऐसे में भविष्य में जाब का बाजार केवल तकनीकी शिक्षा पर आधारित नहीं होगा बल्कि जिनके पास कुछ अलग करने की चाहत होगी उनपर निर्भर होगा। जो युवा नवाचार, निष्ठा, भावनात्मक बुद्धिमता, आविष्कार और समाज की समस्याओं को सुलझाने की क्षमता रखेंगे वे ही सफलता का आसमान छू पाएंगे। दरअसल, कोई भी देश तभी प्रगति करता है जब वहां का युवा यह नहीं पूछता कि 'मैं क्या पा सकता हूं, लेकिन यह पूछता है कि मैं क्या दे सकता हूं'।
अब्राहम लिंकन जैसे नेताओं का सोच से प्रेरित होकर छात्र ऐसी मानसिकता बनाएं कि देश की उन्नति उनकी निजी जिम्मेदारी बन जाए।। भ्रष्टाचार मुक्त भारत केवल कानून और सरकार से नहीं बनेगा, सच्चे आफिसर, उद्योगपति, वैज्ञानिक, राजनेता, पारदर्शी प्रशासनिक अधिकारियों से बनेगा। निष्ठा और सच्चाई जैसे महान गुण रातों-रात नहीं आते, विद्यार्थियों जीवन के दौरान अनुशासन, जवाबदेही और नैतिक साहस के माध्यम से ही इन्हें विकसित किया जाता है।
रिज्यूमे के साथ चरित्र बनाएं युवा
आज के युवाओं के लिए एक बात स्पष्ट है कि केवल अपना रिज्यूमे न बनाएं, बल्कि अपना चरित्र भी बनाएं। उन्हें कड़ी मेहनत का सम्मान करना सीखना चाहिए, शार्टकट के बजाय सत्य निष्ठा को महत्व देना चाहिए और व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर राष्ट्रीय प्रगति को प्राथमिकता देनी चाहिए। सच्ची शिक्षा केवल विषयों में महारथ हासिल करना नहीं है, नैतिक रूप से नेतृत्व करने, स्वतंत्र रूप से सोचने, निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करने और दूसरों को सकारात्मक रूप से प्रेरित करने की क्षमता विकसित करना है।
नौकरी नहीं, अवसर पैदा करें युवा
भारत को ऐसी पीढ़ी की आवश्यकता नहीं है जो केवल नौकरी की तलाश करे बल्कि जो अवसर पैदा कर सके, समस्याओं का समाधान करे, समुदायों का उत्थान करे, लोकतांत्रिक और नैतिक मूल्यों की रक्षा करे और मानवता में सार्थक योगदान दे।
नवाचार बने देश की पहचान
विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों और परीक्षाओं से परे नवाचार की मानसिकता विकसित करनी चाहिए। अनुसंधान, उद्यमिता, पेटेंट, स्वदेशी प्रौद्योगिकी सतत समाधान, ग्रामीण नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हरित ऊर्जा और रक्षा प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्र बनने चाहिए जिनमें भारतीय युवा वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करें। 'बनाएं लोकल, सोचें ग्लोबल' इस कहावत के मुताबिक भारत के किसी लैब में कुछ ऐसे आविष्कार होने चाहिए जो विश्व की समस्याओं का समाधान कर सके।भविष्य में सफलता उस देश को मिलेगी जो न केवल उपभोक्ता बनेगा, बल्कि आविष्कार करेगा। आज के छात्रों को विश्व की अर्थनीति, रणनीति, विश्व राजनीति, तकनीक, स्वास्थ्य चुनौतियों के बारे में भी जानना चाहिए।
छात्रों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों का अनुसरण भय से नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से करना चाहिए।
आराम और स्वार्थ से परे देखें युवा
इतिहास बार-बार यह सिद्ध करता है कि राष्ट्र तभी उत्थान करते हैं जब उनके युवा उद्देश्यपूर्ण होकर आगे बढ़ते हैं। आज के युवाओं के पास प्रौद्योगिकी, शिक्षा, वैश्विक संपर्क, स्वास्थ्य संबंधित ऐसे अवसर हैं जिनके बारे में पिछली पीढ़ियाां केवल सपने ही देख सकती थीं। ऐसे विशेषाधिकार के साथ जिम्मेदारी भी आती है। भारत को ऐसे युवाओं की जरूरत नहीं है जो केवल आराम और व्यक्तिगत सफलता की तलाश में हों बल्कि ऐसे युवा हों जो स्वार्थ से परे सपने देखें।
राष्ट्र निर्माण में योगदान दें युवा
भारत का भविष्य केवल संसद, उद्योगों या अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलनों में ही तय नहीं होगा। यह कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों, स्टार्टअप्स, गांवों और विश्वविद्यालयों में भी आकार लेगा जहां युवा मन उदासीनता के स्थान पर जिम्मेदारी और आत्म संतुष्टि के स्थान पर योगदान को चुनते हैं। प्रत्येक छात्र को केवल यह प्रश्न नहीं पूछना चाहिए कि "मैं कौन सा करियर बनाऊंगा?" बल्कि यह भी पूछना चाहिए कि "मैं किस प्रकार के राष्ट्र के निर्माण में योगदान दूंगा?" क्योंकि भारत की वास्तविक शक्ति केवल उसकी जनसंख्या नहीं है—बल्कि उसके युवाओं की दूरदृष्टि, ईमानदारी, नवाचार और देशभक्ति है।
Priyaish Srivastava is Community Manager at Jagran Josh and holds a postgraduate degree in Mass Communication. With over six years of experience in creative writing, AV content creation, social media marketing, and community management, he specialises in building engaging digital communities and developing impactful content strategies in the education and media sectors. He can be reached at priyaish.srivastava@jagrannewmedia.com.