क्या था POTA Act, 2002, अब इसकी जगह कौन-सा कानून है, जानें यहां
क्या आपने कभी POTA Act, 2002 के बारे में पढ़ा या सुना है? यदि नहीं, तो इस लेख के माध्यम से हम इस एक्ट के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे।
POTA Act, 2002 का पूरा नाम Prevention of Terrorism Act, 2002 है। भारत के इतिहास में आतंकवाद से निपटने के लिए इस अधिनियम को बनाया गया था, जो कि सबसे सख्त और विवादित कानूनों में से एक था। इस लेख में हम इस कानून के बनने की पृष्ठभूमि और विशेषताओं के बारे में विस्तार से जानेंगे। साथ ही, यह भी जानेंगे कि अब इसकी जगह कौन-सा कानून है।
क्यों बनाया गया था POTA Act, 2002
साल 2001 में दुनिया में दो ऐसी बड़ी घटनाएं हुईं, जिसके बाद भारत सरकार ने पोटा एक्ट बनाया। इन घटनाओं में पहली घटना 11 सितंबर, 2001 को अमेरिका में आतंकी हमले की थी, जबकि दूसरी घटना 13 दिसंबर, 2001 को भारत की संसद पर हुए आतंकी हमले की थी। इन दो घटनाओं के बाद से आतंकवादियों पर सख्ती के लिए 2002 में संसद के संयुक्त सत्र में पोटा कानून को पारित किया गया था। आपको बता दें कि इससे पहले भारत में TADA नाम का कानून हुआ करता था, जो कि 1995 में ही समाप्त हो गया था।
पोटा एक्ट की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?
अब हम पोटा एक्ट की विशेषताओं के बारे में जान लेते हैं। इस कानून के माध्यम से जांच एजेंसियों और पुलिस को आसाधरण शक्ति मिली थीं, जो कि इस प्रकार हैःं
-सामान्य कानून में पुलिस के सामने दिया गया इकबालिया बयान सुबूत नहीं माना जाता है, लेकिन पोटा कानून के तहत पुलिस उपाधीक्षक या इससे ऊपर के अधिकारी के सामने आरोपी द्वारा दिया गया बयान को कोर्ट में सुबूत माना जाता था।
-पोटा कानून के तहत पुलिस किसी भी संदिग्ध को बिना चार्जशीट के 180 दिनों तक हिरासत में रख सकती थी। सामान्य तौर पर पुलिस को 24 घंटे के भीतर अदालत में आरोपी की पेशी करनी होती है।
-पोटा के तहत आरोपी को आसानी से जमानत नहीं मिलती थी, जब तक अदालत यह न मान ले कि आरोपी निर्दोष है।
-यदि पुलिस को शक होता कि संपत्ति आतंकवाद द्वारा कमाए गए पैसों की है, तो पुलिस उस संपत्ति को जब्त कर लेती थी।
-पुलिस गवाहों की पहचान को गुप्त रखा करती थी।
पोटा कानून का विरोध क्यों हुआ?
पोटा कानून के लागू होने के कुछ समय बाद ही विरोध शुरू हो गया था। कई मानवाधिकार संगठनों और विपक्ष द्वारा इसके दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगे। उस समय आरोप लगाए गए थे पुलिस अपनी दुश्मनी निकालने के लिए इस कानून का इस्तेमाल कर रही है।
कब हुआ पोटा कानून का अंत
पोटा कानून के विरोध को देखते हुए साल 2004 में आम चुनावों के बाद 21 सितंबर को पोटा एक्ट को पूरी तरह से निरस्त कर दिया गया।
फिर अब कौन-सा कानून है?
अब सवाल है कि जब पोटा समाप्त हो गया, तो अब आतंकवाद से निपटने के लिए कौन-सा कानून है? पोटा का अंत होने के बाद सरकार ने पुराने कानून UAPA (Unlawful Activities Prevention Act), 1967 में बड़े बदलाव किये। पोटा की कुछ सख्त धाराओं में बदलाव कर इसे यूएपीए में शामिल किया गया।
क्यों जरूरी है यह लेख
इस लेख में पोटा के संबंध में जानकारी दी गई है। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पोटा एक्ट, 2002 के बारे में पूछ लिया जाता है। ऐसे में यह महत्त्वपूर्ण लेख है।
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