भारत में लोकसभा और राज्यसभा के बाद राज्य स्तर पर देखें, तो विधानसभाओं का विशेष महत्त्व होता है। यहां विधानसभाओं में जनप्रतिनिधि राज्य के मुद्दों पर चर्चा करने के साथ नये कानून को अमलीजामा पहनाते हैं। इस कड़ी में सबसे अधिक विधानसभा सीट वाले राज्य की बात करें, तो यह उत्तर प्रदेश है। राज्य में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं।
ऐसे में यह न सिर्फ लोकसभा, बल्कि विधानसभा सीटों के मामले में भी अव्वल स्थान पर आता है। क्योंकि, यहां की जनसंख्या पूरे देश में सबसे अधिक है। जनसंख्या के आधार पर ही राज्य में विधानसभा सीटों की संख्या निर्धारित की जाती है।
पहले पायदान पर उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। इसके साथ ही यहां 100 विधान परिषद् की सीटें भी हैं। ऐसे में यह राज्य राजनीतिक स्तर पर अपनी विशेष पहचान रखता है।
दूसरे पायदान पर पश्चिम बंगाल
विधानसभा सीटों के मामले में पश्चिम बंगाल कुल 294 सीटों के साथ दूसरे पायदान पर है। यहां सरकार बनाने के लिए 148 सीटों का बहुमत चाहिए होता है। वहीं, बंगाल की राजनीति अपनी सक्रियता के लिए जानी जाती है।
तीसरे पायदान पर महाराष्ट्र
विधानसभा सीटों के मामले में महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर आता है। यहां कुल 288 विधानसभा सीटें हैं, जो कि राज्य की जनसंख्या के हिसाब से है। इसके अतिरिक्त, यहां द्विसदनीय प्रणाली भी है। यहां विधान परिषद् की कुल 78 सीटें हैं। यहां मुंबई जैसा आर्थिक राजधानी वाला शहर है, जो कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है।
चौथे पायदान पर बिहार का स्थान
विधानसभा सीटों के मामले में 243 सीटों के साथ बिहार राज्य का स्थान चौथे पायदान पर आता है। यहां गठबंधन की सरकार चलती है। विधानसभा के साथ-साथ यहां विधानपरिषद् की कुल 75 सीटें हैं।
तमिलनाडू
दक्षिण भारत का यह राज्य इन दिनों चुनावों को लेकर चर्चाओं में है। इस कड़ी में यहां विधानसभा सीटों की संख्या की बात करें, तो इनकी संख्या 234 है। यहां पहले विधान परिषद् हुआ करती थी, लेकिन 1986 में इसे समाप्त कर दिया गया। वहीं, दक्षिण भारत के इस राज्य की राजनीति भाषाई गौरव और क्षेत्रीय मुद्दों पर होती है। लोकसभा सीटों के मामले में भी यह 5वें पायदान पर आता है, जिसकी कुल 39 लोकसभा सीटें हैं।