लोकसभा और राज्यसभा में कौन है अधिक शक्तिशाली, जानें
संसद के दो सदन हैं, जिनमें लोकसभा और राज्यसभा शामिल है। इन दोनों सदनों की अपनी-अपनी भूमिका और शक्तियां हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि दोनों सदनों में कौन अधिक शक्तिशाली है?
भारत की संसद में दो सदन हैं, जिनमें एक लोकसभा और दूसरी राज्यसभा है। इन दोनों सदनों की अपनी शक्तियां और अधिकार हैं। लोकसभा में सीधे जनता द्वारा प्रतिनिधियों को चुना जाता है, जबकि राज्यसभा में विधानसभा सदस्यों द्वारा राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव होता है। हालांकि, यहां सवाल है कि आखिर दोनों सदनों में कौन अधिक ताकतवर है? इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे।
लोकसभा या राज्यसभा, कौन है अधिक शक्तिशाली?
भारत के संसदीय सिस्टम में लोकसभा अधिक शक्तिशाली है। इसकी सबसे बड़ी वजह लोकसभा में सीधे तौर पर प्रतिनिधियों का चुना जाना है। ऐसे में लोकतंत्र की आखिरी शक्ति लोगों के हाथ में होती है। अब हम इसके अधिक शक्तिशाली होने के अन्य कारण जानेंगे।
लोकसभा अधिक शक्तिशाली क्यों है
लोकसभा, राज्यसभा की तुलना में अधिक शक्तिशाली है। इसके कई कारण हैं, जो कि इस प्रकार हैंः
वित्तीय शक्तियां
धन विधेयक को सिर्फ लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है, राज्यसभा में नहीं। वहीं, राज्यसभा धन विधेयक को सीधे तौर पर खारिज नहीं कर सकती है। वह सिर्फ इसे 14 दिनों के लिए रोक सकती है या अपने सुझाव इस पर दे सकती है। हालांकि, इन सुझावों को मानना या न मानना, लोकसभा के ऊपर निर्भर है। दूसरी तरफ, देश का बजट भी लोकसभा में ही पेश किया जाता है।
कार्यपालिका पर शक्ति
भारत सरकार यानि कि मंत्रिपरिषद् भी सिर्फ लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है। वहीं, सरकार को गिराने का प्रस्ताव भी सिर्फ लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है। यदि यह प्रस्ताव पास हो जाए, तो प्रधानमंत्री समेत पूरी कैबिनेट को इस्तीफा देना पड़ता है। राज्यसभा के पास सरकार गिराने की शक्ति नहीं होती है।
संयुक्त बैठक में भी फायदा
यदि लोकसभा या राज्यसभा में किसी साधारण विधेयक पर कोई मतभेद हो जाता है, तो राष्ट्रपति द्वारा संयुक्त बैठक बुलाई जाती है। हालांकि, लोकसभा के सदस्यों की संख्या 543 है, जबकि राज्यसभा की सदस्या संख्या 245 है, तो ऐसे में लोकसभा के हक में फैसला होने की संभावना बनी रहती है।
फिर राज्यसभा के पास क्या शक्ति है?
राज्यसभा को राज्यों की परिषद् भी कहा जाता है। ऐसे में अनुच्छेद 249 के तहत राज्यसभा 2/3 बहुमत से प्रस्ताव पारित कर राज्य सूची के किसी विषय पर राष्ट्रीय हित में कानून बना सकती है। वहीं,अनुच्छेद 312 के तहत नई All India Services जैसे IAS, IPS की तरह कोई नई सेवा शुरू करने का अधिकार केवल राज्यसभा के प्रस्ताव से ही शुरू हो सकता है।
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