भारत में कुल राज्यों की बात करें, तो इनकी संख्या 28 है। वहीं, सबसे बड़े राज्य की बात करें, तो क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़ा राज्य राजस्थान है। राज्य का कुल एरिया 342,239 वर्ग किलोमीटर है। राजस्थान को राजा-महाराजाओं और राज्य के गौरवशाली इतिहास के लिए जाना जाता है। इसके अतिरिक्त, इसकी पहचान थार के बड़े रेगिस्तान के लिए भी होती है। राज्य में पानी की आपूर्ति के लिए कई नदियों पर निर्भरता है। इस कड़ी में यहां एक ऐसी नदी भी है, जिसे ‘राजस्थान की गंगा’ भी कहा जाता है। कौन-सी है यह नदी, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
किस नदी को कहा जाता है ‘राजस्थान की गंगा’
सबसे पहले हम यह जान लेते हैं कि किस नदी को ‘राजस्थान की गंगा’ भी कहा जाता है। आपको बता दें कि यहां चंबल नदी को ‘राजस्थान की गंगा’ कहा जाता है। यह नदी राजस्थान की मुख्य नदी मानी जाती है।
क्यों कहा जाता है ‘राजस्थान की गंगा’
राजस्थान में बहने वाली चंबल नदी एकमात्र ऐसी नदी है, जो कि पूरे वर्षभर बहती है। ऐसे में इस नदी का महत्त्व रेगिस्तानी इलाकों के लिए अधिक है। इस नदी से कोटा, बूंदी और धौलपुर जैसे इलाकों में पीने के पानी से लेकर कृषि और सिंचाई के लिए पानी लिया जाता है।
कोटा के लिए बनी वरदान
राजस्थान का प्रसिद्ध कोटा शहर चंबल नदी के किनारे ही बसा है। यहां राणा प्रताप सागर बांध और जवाहर बांध है, जिससे बिजली उत्पादन किया जाता है। वहीं, कोटा को औद्योगिक राजधानी बनाने में चंबल नदी का अधिक महत्त्व माना जाता है।
स्वच्छता के लिए जानी जाती है नदी
चंबल की यह नदी गंगा जैसी पवित्र मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस नदी को शापित नदी कहा गया था। इस वजह से कई वर्षों तक नदी किनारे कोई बड़ा शहर नहीं बसा और न ही कोई औद्योगिक केंद्र बना। इस वजह से नदी का पानी दूषित नहीं हुआ। आज भी इस नदी का पानी स्वच्छ माना जाता है।
घड़ियाल और मगरमच्छ के लिए जानी जाती है नदी
चंबल नदी को मुख्य रूप से मगरमच्छों और घड़ियाल के लिए जाना जाता है। यहां बड़ी संख्या में मगरमच्छ और घड़ियाल की प्रजाति पाई जाती है। चंबल नदी मध्य प्रदेश से निकलने के बाद राजस्थान में चितौड़गढ़ के पास से प्रवेश करती है और सवाई माधोपुर, करौली व धौलपुर होते हुए उत्तर प्रदेश में प्रवेश करती है। यहां जालौन के पास यह नदी यमुना नदी में मिल जाती है।
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