कभी UPSC से थीं अनजान, अब वही किसान की बेटी बनेंगी IAS, कड़ी मेहनत ने बदली किस्मत
कहते हैं कि कड़ी मेहनत और लगन से हर परिस्थिति को बदला जा सकता है, बशर्ते मन में जीतने का हौसला हो। मध्य प्रदेश की रहने वाली प्राची की कहानी इसी बात का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में 260वीं रैंक हासिल कर यह साबित कर दिया है कि विपरीत परिस्थितियां कभी भी आपके सपनों के आड़े नहीं आतीं। एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली प्राची ने अपनी मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया है।
उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः। न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥ अर्थात् कोई भी काम केवल इच्छा करने या सोचने से पूरा नहीं होता, उसके लिए कठिन परिश्रम (उद्यम) करना पड़ता है। ठीक वैसे ही, जैसे सोते हुए शेर के मुँह में हिरण खुद-ब-खुद प्रवेश नहीं करता, बल्कि शिकार के लिए उसे भी मेहनत करनी पड़ती है।
यह कहानी है मध्य प्रदेश की रहने वाली प्राची चौहान की, जिनके पिता किसान हैं और जिन्हें कभी UPSC के बारे में पता तक नहीं था। आज UPSC सिविल सेवा परीक्षा में 260वीं रैंक हासिल कर प्राची ने यह साबित कर दिया कि कुछ भी नामुमकिन नहीं है। 'अगर लड़की को पढ़ने के लिए बाहर भेजोगे, तो उससे कौन शादी करेगा?' समाज की इस रूढ़िवादी सोच को भी उन्होंने पूरी तरह धराशायी कर दिया। आइए, प्राची चौहान की इस प्रेरणादायक सफलता की पूरी कहानी के बारे में जानते हैं।
प्राची के पिता है किसान
प्राची चौहान का जन्म मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के एक छोटे से गांव जौहद में हुआ। वह एक बेहद साधारण परिवार से आती है, जिनके पिता का नाम चंद्रभान सिंह चौहान है, जो पेशे से किसान है और उनकी मां साधना सिंह चौहान एक हाउस वाइफ हैं। संसाधनों की कमी और पांच भाई-बहनों के बावजूद प्राची को परिवार ने पढ़ाई के काफी मोटिवेट किया और आज जिसका रिजल्ट हम सभी के सामने हैं, उन्होंने साल 2026 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा दी और 260वीं रैंक हासिल की। IAS बन परिवार और देश के लिए मिसाल कायम की। बेटी के IAS बनने से पिता की आंखों में खुशी के आंसू है।
प्राची चौहान की एजुकेशन
प्राची चौहान ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के ही एक सरकारी स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन बीएससी में पूरी की और ग्रेजुएशन के बाद प्राची सिविल सेवा की तैयारी में जुट गई। कमाल की बात है कि उन्हें सिविल सेवा की चयन प्रक्रिया और तीनों स्टेज के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। सरकारी दफ्तरों में जाने के दौरान प्राची को UPSC के बारे में पता चला। एक टाइम तक यूपीएससी का मतलब उनके लिए केवल कलेक्टर की नौकरी थी।
प्राची चौहान तीसरी बार में बनीं IAS
प्राची चौहान के लिए IAS बनना इतना आसान नहीं था। घर की आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से वह कोचिंग नहीं ले सकीं। वे ज्यादातर सेल्फ-स्टडी और ऑनलाइन कोर्स पर निर्भर रहीं। प्राची UPSC सिविल सेवा परीक्षा में दो बार मेन्स तक पहुंची। पर सफल नहीं हो सकी। पर उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी गलतियों से सीखती रहीं और आगे बढ़ती रहीं। तीसरी बार में प्राची ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की और 260 रैंक लाकर IAS बन इतिहास रच दिया। प्राची बताती हैं कि वे ऐसे समाज से आती हैं जहां यह माना जाता है कि अगर लड़की को पढ़ने के लिए बाहर भेजेंगे तो कोई शादी नहीं करेगा।
Farhan Khan is an education journalist with over 3 years of experience specializing in the public sector recruitment space. From UPSC and SSC to Banking and Defense, he provides end-to-end coverage on exam notifications, admit cards, and Sarkari results. Farhan holds a Master’s degree in Mass Communication from Guru Jambheshwar University and blends research-driven journalism with creative storytelling to guide aspirants through their exam preparation journeys.