Swami Vivekananda Speech in Hindi: 10 Lines, छोटे और लंबे भाषण हिंदी में for students

Jan 9, 2026, 14:32 IST

स्वामी विवेकानंद (जन्म 12 जनवरी 1863, नरेंद्रनाथ दत्त) एक महान भारतीय आध्यात्मिक गुरु, देशभक्त और विचारक थे, जिनके जन्मदिन को 'राष्ट्रीय युवा दिवस' के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने गुरु रामकृष्ण परमहंस से 'जीव सेवा' का सिद्धांत सीखा। उनकी मुख्य पहचान 1893 में शिकागो के विश्व धर्म संसद में दिए गए ऐतिहासिक भाषण से बनी, जहाँ उन्होंने भारतीय दर्शन (वेदांत और योग) को पश्चिमी दुनिया में स्थापित किया और 'वसुधैव कुटुंबकम्' का आदर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की, जो शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में समाज सेवा कर रहा है।

Swami Vivekananda Speech in Hindi: 10 Lines, छोटे और लंबे भाषण हिंदी में for students
Swami Vivekananda Speech in Hindi: 10 Lines, छोटे और लंबे भाषण हिंदी में for students

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी, 1863 को कोलकाता में नरेंद्रनाथ दत्त के रूप में हुआ था। उनके जन्मदिन को पूरे भारत में 'राष्ट्रीय युवा दिवस' के रूप में मनाया जाता है। वे सिर्फ एक आध्यात्मिक गुरु ही नहीं, बल्कि एक प्रखर देशभक्त और समाज सुधारक भी थे, जिन्होंने भारतीय दर्शन और संस्कृति को विश्व पटल पर स्थापित किया। उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस ने उन्हें 'जीव में शिव' का सिद्धांत सिखाया, जिसका अर्थ है कि हर प्राणी में ईश्वर का वास है, और मानव सेवा ही सच्ची पूजा है। विवेकानंद जी का जीवन दर्शन युवाओं को आत्मनिर्भरता, दृढ़ता और एकाग्रता के महत्व पर जोर देता है।

विवेकानंद जी की सबसे बड़ी पहचान 1893 में शिकागो, अमेरिका में आयोजित 'विश्व धर्म संसद' में दिए गए उनके ऐतिहासिक भाषण से बनी। जब उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत "मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों" कहकर की, तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा। इस भाषण के माध्यम से उन्होंने पश्चिमी दुनिया को भारतीय दर्शन, वेदान्त और योग के सिद्धांतों से परिचित कराया, और यह सिद्ध किया कि भारत 'वसुधैव कुटुंबकम्' (पूरी दुनिया एक परिवार है) के आदर्श में विश्वास रखता है। उन्होंने 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना भी की, जो आज भी शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में समाज सेवा का कार्य कर रहा है।

स्वामी विवेकानंद के बारे में मुख्य जानकारी (Quick Facts)

विवरण

जानकारी

जन्म तिथि

12 जनवरी, 1863 (राष्ट्रीय युवा दिवस)

बचपन का नाम

नरेंद्रनाथ दत्त

गुरु का नाम

स्वामी रामकृष्ण परमहंस

प्रसिद्ध नारा

उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।

स्वामी विवेकानंद के बारे में 10 महत्वपूर्ण पंक्तियाँ निम्नलिखित है:

  1. स्वामी विवेकानंद भारत के एक महान आध्यात्मिक गुरु और देशभक्त संन्यासी थे।

  2. उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था।

  3. उनके बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दत्त था।

  4. उनके जन्मदिन को पूरे भारत में 'राष्ट्रीय युवा दिवस' के रूप में मनाया जाता है।

  5. स्वामी विवेकानंद के गुरु का नाम रामकृष्ण परमहंस था।

  6. उन्होंने 1893 में शिकागो के 'विश्व धर्म संसद' में अपने प्रसिद्ध भाषण से भारत का गौरव बढ़ाया।

  7. उन्होंने पूरी दुनिया को 'वेदांत' और 'योग' के भारतीय दर्शन से परिचित कराया।

  8. उन्होंने 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की, जो आज भी समाज सेवा का कार्य कर रहा है।

  9. उनका प्रसिद्ध नारा था— "उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।"

  10. स्वामी विवेकानंद ने सिखाया कि युवाओं में राष्ट्र को बदलने की अद्भुत शक्ति होती है।

स्वामी विवेकानंद पर सरल भाषण (कक्षा 1 के लिए)

नमस्ते सबको!

आज मैं आपको स्वामी विवेकानंद जी के बारे में कुछ और बातें बताऊँगा/बताऊँगी। वे एक महान देशभक्त और सच्चे संन्यासी थे। उनका जन्म 12 जनवरी को हुआ था, जिसे हम 'राष्ट्रीय युवा दिवस' के रूप में मनाते हैं। उनके बचपन का नाम नरेंद्र था और वे बचपन से ही बहुत बहादुर थे। उन्हें ध्यान लगाना और किताबें पढ़ना बहुत पसंद था। वे कहते थे कि हमें हमेशा सच बोलना चाहिए और दूसरों की मदद करनी चाहिए। उनका सबसे प्यारा मंत्र था— "उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।" उन्होंने हमें सिखाया कि डरना नहीं चाहिए, बल्कि निडर होकर हर मुसीबत का सामना करना चाहिए। वे मानते थे कि अगर हम खुद पर विश्वास रखें, तो हम कुछ भी कर सकते हैं। स्वामी जी ने पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन किया। हमें उनके जैसा साहसी और बुद्धिमान बनने की कोशिश करनी चाहिए।

स्वामी विवेकानंद पर कक्षा 4 के लिए मध्यम भाषण

आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, शिक्षकगण और मेरे मित्रों,

आज मैं भारत के गौरव, स्वामी विवेकानंद जी पर अपने विचार साझा करना चाहता हूँ। उनका जन्म 12 जनवरी, 1863 को कोलकाता में हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेंद्रनाथ था।

स्वामी जी एक महान विद्वान और योगी थे। उन्होंने शिकागो के अपने प्रसिद्ध भाषण से पूरी दुनिया को भारतीय संस्कृति का लोहा मनवाया। उन्होंने सिखाया कि भगवान की सेवा का सबसे अच्छा तरीका 'गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा' करना है। वे चाहते थे कि भारत का हर बच्चा शिक्षित और साहसी बने।

अंत में, मैं उनके शब्दों को याद दिलाना चाहूँगा: "जितना बड़ा संघर्ष होगा, जीत उतनी ही शानदार होगी।" हमें उनके पदचिह्नों पर चलने की कोशिश करनी चाहिए।

धन्यवाद!

स्वामी विवेकानंद पर 2 मिनट का भाषण (विस्तृत)

माननीय अतिथिगण और साथियों,

आज हम उस महान व्यक्तित्व को याद कर रहे हैं जिन्होंने भारत के आध्यात्मिक ज्ञान को पूरी दुनिया में फैलाया—स्वामी विवेकानंद।

विवेकानंद जी केवल एक संन्यासी नहीं थे, वे एक समाज सुधारक और महान विचारक भी थे। उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस ने उन्हें सिखाया था कि 'जीव में ही शिव है', अर्थात हर इंसान में भगवान का वास है।

उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि 1893 का शिकागो भाषण था। जहाँ अन्य विद्वान 'देवियों और सज्जनों' से बात शुरू कर रहे थे, वहीं विवेकानंद जी ने "मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों" कहकर सबका दिल जीत लिया। इस एक वाक्य ने साबित कर दिया कि भारत पूरी दुनिया को एक परिवार (वसुधैव कुटुंबकम) मानता है।

युवाओं के लिए उनके विचार आज भी बहुत महत्वपूर्ण हैं:

  • वे एकाग्रता (Concentration) की शक्ति पर जोर देते थे।

  • वे चाहते थे कि हमारे पास 'लोहे की मांसपेशियां' और 'फौलाद की नसें' हों।

  • वे कहते थे कि "पवित्रता, धैर्य और दृढ़ता ही सफलता के लिए अनिवार्य हैं।"

आज जब हम 21वीं सदी में जी रहे हैं, तो उनकी शिक्षाएं हमें आत्मनिर्भर बनने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा देती हैं। आइए, हम उनके विचारों को अपने जीवन में उतारें।

जय हिन्द, जय भारत!

स्वामी विवेकानंद: छोटा भाषण

प्रस्तावना: आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, शिक्षकगण और मेरे प्यारे साथियों। आज हम उस महापुरुष को याद करने के लिए एकत्रित हुए हैं, जिनके ओजस्वी विचारों ने न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया को नई दिशा दी। मैं बात कर रहा हूँ युवाओं के प्रेरणास्रोत—स्वामी विवेकानंद की।

बचपन और गुरु का सानिध्य: स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। नरेंद्र शुरू से ही बहुत जिज्ञासु और सत्य की खोज करने वाले थे। उनकी यह खोज उन्हें स्वामी रामकृष्ण परमहंस के पास ले गई। गुरु के चरणों में बैठकर उन्होंने सीखा कि मानवता की सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है। उनके गुरु ने उन्हें सिखाया, "शिव भाव से जीव की सेवा करो।"

शिकागो भाषण और वैश्विक पहचान: 1893 में शिकागो में आयोजित 'विश्व धर्म संसद' उनके जीवन का सबसे ऐतिहासिक पल था। जब उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत "मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों" के साथ की, तो पूरी दुनिया उनकी मुरीद हो गई। उन्होंने दुनिया को बताया कि हिंदू धर्म न केवल सहनशीलता सिखाता है, बल्कि दुनिया के सभी धर्मों को सच के रूप में स्वीकार करता है। उन्होंने भारत के आध्यात्मिक वैभव का परचम विदेशों में लहराया।

युवाओं के लिए संदेश: स्वामी विवेकानंद का मानना था कि किसी भी देश का भविष्य उसकी युवा शक्ति पर निर्भर करता है। वे चाहते थे कि युवाओं के पास 'लोहे की मांसपेशियां' और 'फौलाद की नसें' हों। उनका सबसे प्रसिद्ध मंत्र था— "उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।" वे कहते थे कि यदि आप खुद पर विश्वास नहीं करते, तो आप भगवान पर भी विश्वास नहीं कर सकते।

निष्कर्ष: स्वामी विवेकानंद ने अपना पूरा जीवन मानवता के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना की, जो आज भी शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में निस्वार्थ भाव से कार्य कर रहा है। आइए, आज हम उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लें और एक सशक्त भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।

धन्यवाद! जय हिन्द।

स्वामी विवेकानंद: विस्तृत भाषण 

प्रस्तावना: नमस्ते! माननीय अतिथिगण, गुरुजन और उपस्थित जनसमूह। आज का दिन हम सबके लिए गौरव का विषय है, क्योंकि आज हम उस विभूति के जीवन का स्मरण कर रहे हैं, जिन्हें हम 'आधुनिक भारत के आध्यात्मिक पिता' के रूप में जानते हैं। स्वामी विवेकानंद केवल एक संन्यासी नहीं थे; वे एक प्रखर राष्ट्रवादी, दार्शनिक और अद्वितीय वक्ता थे।

आरंभिक जीवन और वैचारिक विकास: विवेकानंद जी का जन्म एक संपन्न परिवार में हुआ था। उनकी बुद्धि कुशाग्र थी और वे बचपन से ही निडर थे। वे अक्सर संन्यासियों की नकल किया करते थे, जो उनके भविष्य के संन्यासी जीवन का संकेत था। उनके जीवन में एक समय ऐसा भी आया जब वे ईश्वर के अस्तित्व पर सवाल उठाने लगे थे। इसी बेचैनी ने उन्हें रामकृष्ण परमहंस से मिलवाया। जब नरेंद्र ने उनसे पूछा, "क्या आपने ईश्वर को देखा है?", तो गुरु ने उत्तर दिया, "हाँ, मैंने उन्हें वैसे ही देखा है जैसे मैं तुम्हें देख रहा हूँ।" इस उत्तर ने नरेंद्र के जीवन को सदा के लिए बदल दिया और वे स्वामी विवेकानंद बन गए।

रामकृष्ण मिशन और सामाजिक सुधार: स्वामी विवेकानंद ने केवल मंदिरों में बैठकर पूजा करने को धर्म नहीं माना। उन्होंने 'दरिद्र नारायण' (गरीबों में ईश्वर) की सेवा को धर्म बताया। उन्होंने 1897 में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। इसका मुख्य उद्देश्य था—धर्म को समाज सेवा के साथ जोड़ना। वे बाल विवाह और छुआछूत जैसी कुरीतियों के घोर विरोधी थे। उन्होंने नारियों की शिक्षा और सम्मान पर बहुत जोर दिया। उनका मानना था कि जिस राष्ट्र में महिलाओं का सम्मान नहीं होता, वह कभी उन्नति नहीं कर सकता।

भारत की अस्मिता और शिकागो का गौरव: 11 सितंबर 1893 का वह दिन भारतीय इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। शिकागो की धरती पर जब विवेकानंद ने भारत का प्रतिनिधित्व किया, तो उन्होंने दुनिया को यह संदेश दिया कि धर्म जोड़ता है, तोड़ता नहीं। उन्होंने कट्टरता को दुनिया के लिए अभिशाप बताया। उनके विचारों ने पश्चिम को भारतीय योग और वेदांत के दर्शन से परिचित कराया। आज भी उनके भाषणों का अध्ययन दुनिया भर के विश्वविद्यालयों में किया जाता है।

युवा शक्ति और चरित्र निर्माण: विवेकानंद जी के अनुसार, शिक्षा का अर्थ केवल सूचनाएं जुटाना नहीं है, बल्कि वह है जिससे 'चरित्र निर्माण' (Character Building) हो। वे युवाओं से कहते थे कि एक समय में एक ही लक्ष्य चुनें और उस विचार को अपना जीवन बना लें। उसके बारे में सोचें, उसके सपने देखें और उस विचार को अपने रग-रग में बसा लें। यही सफलता का मार्ग है। उनका अटूट विश्वास था कि भारत एक बार फिर से 'विश्व गुरु' बनेगा, और इसमें युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी।

राष्ट्रीय युवा दिवस: भारत सरकार ने 1984 में यह घोषणा की थी कि स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन (12 जनवरी) को 'राष्ट्रीय युवा दिवस' के रूप में मनाया जाएगा। यह इस बात का प्रमाण है कि उनके विचार आज भी उतने ही आधुनिक और प्रभावी हैं जितने सौ साल पहले थे।

उपसंहार: विवेकानंद जी ने मात्र 39 वर्ष की अल्पायु में इस संसार को अलविदा कह दिया, लेकिन उनके विचार आज भी अमर हैं। वे एक ऐसा मशाल जला गए जिसकी रोशनी आज भी करोड़ों लोगों का मार्गदर्शन कर रही है। आइए, हम उनके आत्मविश्वास को अपने भीतर जगाएं। याद रखिए, स्वामी जी ने कहा था, "ब्रह्मांड की सारी शक्तियां पहले से ही हमारी हैं। वे हम ही हैं जिन्होंने अपनी आंखों पर हाथ रखा है और रोते हुए कह रहे हैं कि अंधेरा है।"

आइए, अपनी आंखों से भ्रम का पर्दा हटाएं और राष्ट्र निर्माण की शपथ लें।

धन्यवाद। जय हिन्द, जय भारत!

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Anisha Mishra
Anisha Mishra

Content Writer

Anisha Mishra is a mass communication professional and content strategist with a total two years of experience. She's passionate about creating clear, results-driven content—from articles to social media posts—that genuinely connects with audiences. With a proven track record of shaping compelling narratives and boosting engagement for brands like Shiksha.com, she excels in the education sector, handling CBSE, State Boards, NEET, and JEE exams, especially during crucial result seasons. Blending expertise in traditional and new digital media, Anisha constantly explores current content trends. Connect with her on LinkedIn for fresh insights into education content strategy and audience behavior, and let's make a lasting impact together.
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