Essay on Swami Vivekananda in Hindi

Jan 9, 2026, 12:34 IST

यह लेख स्वामी विवेकानंद के जीवन, उनके दर्शन और समाज में उनके योगदान पर आधारित है। इसमें स्कूली छात्रों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 200, 300, 400 और 500 शब्दों के अलग-अलग निबंध तैयार किए गए हैं। लेख में उनके बचपन (नरेंद्रनाथ दत्त), शिकागो भाषण, रामकृष्ण मिशन की स्थापना और युवाओं के लिए उनके प्रेरणादायक विचारों पर प्रकाश डाला गया है।

स्वामी विवेकानंद भारत के उन महान व्यक्तित्वों में से एक थे, जिन्होंने अपने विचारों, ज्ञान और ओजस्वी वाणी से न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व को प्रभावित किया। वे एक महान संत, दार्शनिक, समाज सुधारक और युवाओं के मार्गदर्शक थे। स्वामी विवेकानंद ने भारतीय संस्कृति, वेदांत दर्शन और योग का संदेश पूरी दुनिया तक पहुँचाया और भारत को आध्यात्मिक रूप से पुनः जागृत किया।

उनका जीवन यह सिखाता है कि आत्मविश्वास, शिक्षा और कर्तव्यबोध के माध्यम से कोई भी व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। वे मानते थे कि युवा शक्ति ही किसी भी देश की सबसे बड़ी ताकत होती है और यदि युवाओं को सही दिशा मिल जाए, तो समाज और राष्ट्र का विकास निश्चित है।

इसी कारण आज भी स्कूलों में स्वामी विवेकानंद पर निबंध लिखवाया जाता है, ताकि विद्यार्थियों में नैतिक मूल्य, आत्मबल और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित हो सके। उनके प्रेरणादायक विचार छात्रों को कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने का साहस देते हैं और उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करते हैं।

यह दिवस क्यों मनाया जाता है? (Why This Day Is Celebrated)

स्वामी विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी को मनाई जाती है। भारत सरकार ने इस दिन को राष्ट्रीय युवा दिवस (National Youth Day) के रूप में घोषित किया है।
इस दिन का उद्देश्य युवाओं को स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरित करना है, जैसे – आत्मविश्वास, मेहनत, चरित्र निर्माण और राष्ट्र सेवा। स्कूलों और कॉलेजों में भाषण, निबंध प्रतियोगिता और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

स्वामी विवेकानंद पर निबंध (200 शब्दों में): Essay on Swami Vivekananda for Students

स्वामी विवेकानंद भारत के महान संत और समाज सुधारक थे। उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। वे बचपन से ही बुद्धिमान और जिज्ञासु थे। बाद में वे रामकृष्ण परमहंस के शिष्य बने, जिन्होंने उन्हें आत्मज्ञान का मार्ग दिखाया।

स्वामी विवेकानंद ने 1893 में शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उनके शब्द “सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ अमेरिका” आज भी प्रसिद्ध हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति और वेदांत दर्शन को विश्वभर में पहचान दिलाई।

उनका मानना था कि शिक्षा से ही व्यक्ति और देश का विकास संभव है। वे युवाओं से कहते थे – “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको।”
स्वामी विवेकानंद का जीवन हमें आत्मविश्वास, सेवा और मानवता की शिक्षा देता है। वे वास्तव में भारत के गौरव थे।

स्वामी विवेकानंद पर निबंध (300 शब्दों में): Essay on Swami Vivekananda for School Children

स्वामी विवेकानंद भारत के महान आध्यात्मिक गुरु, समाज सुधारक और युवाओं के प्रेरणास्रोत थे। उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ। उनके पिता का नाम विश्वनाथ दत्त और माता का नाम भुवनेश्वरी देवी था। बचपन में उनका नाम नरेंद्रनाथ दत्त था।

नरेंद्रनाथ जी शुरू से ही तर्कशील और साहसी थे। उन्होंने रामकृष्ण परमहंस को अपना गुरु बनाया, जिनसे उन्हें जीवन का सच्चा उद्देश्य समझ में आया। स्वामी विवेकानंद ने संन्यास लेकर अपना जीवन मानव सेवा को समर्पित कर दिया।

1893 में उन्होंने अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म सम्मेलन में भाग लिया। वहाँ उन्होंने अपने भाषण से पूरी दुनिया को प्रभावित किया और भारत का मान बढ़ाया। उन्होंने हिंदू धर्म और भारतीय दर्शन की महानता को सरल शब्दों में समझाया।

स्वामी विवेकानंद शिक्षा को सबसे शक्तिशाली हथियार मानते थे। वे चाहते थे कि युवा आत्मनिर्भर बनें और समाज की सेवा करें। उनके विचार आज भी छात्रों को मेहनत और अनुशासन का महत्व सिखाते हैं।

4 जुलाई 1902 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनके विचार आज भी जीवित हैं। स्वामी विवेकानंद का जीवन हर विद्यार्थी के लिए प्रेरणा है।

स्वामी विवेकानंद पर निबंध (400 शब्दों में): Essay on Swami Vivekananda for Students and Kids

स्वामी विवेकानंद भारत के उन महान व्यक्तियों में से एक थे, जिन्होंने देश को नई दिशा दी। उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ। उनका वास्तविक नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। वे बचपन से ही मेधावी, निर्भीक और सत्य की खोज में लगे रहते थे।

नरेंद्रनाथ जी की मुलाकात रामकृष्ण परमहंस से हुई, जिन्होंने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया। गुरु के मार्गदर्शन में उन्होंने वेदांत और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया और संन्यासी जीवन अपनाया। इसके बाद वे स्वामी विवेकानंद कहलाए।

1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया। उनके ओजस्वी भाषण ने उन्हें विश्व प्रसिद्ध बना दिया। उन्होंने यह सिद्ध किया कि सभी धर्म समान हैं और मानवता सबसे बड़ा धर्म है।

स्वामी विवेकानंद का मानना था कि युवाओं में देश बदलने की शक्ति है। वे शिक्षा को चरित्र निर्माण का माध्यम मानते थे। उन्होंने कहा था कि ऐसी शिक्षा होनी चाहिए जो आत्मविश्वास और सेवा की भावना पैदा करे।

स्वामी विवेकानंद का निधन 4 जुलाई 1902 को हुआ। उनका जीवन हमें सिखाता है कि कठिनाइयों के बावजूद लक्ष्य पर डटे रहना चाहिए। वे सदा भारत के युवाओं के आदर्श बने रहेंगे।

स्वामी विवेकानंद पर निबंध (500 शब्दों में): Essay on Swami Vivekananda for School Students

स्वामी विवेकानंद भारत के महान संत, विचारक और समाज सुधारक थे। उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। उनके पिता एक वकील थे और माता धार्मिक स्वभाव की थीं। बचपन से ही नरेंद्रनाथ में साहस, बुद्धिमत्ता और सत्य जानने की इच्छा थी।

उन्होंने रामकृष्ण परमहंस को अपना गुरु बनाया, जिन्होंने उन्हें आत्मज्ञान और मानव सेवा का मार्ग दिखाया। गुरु के निधन के बाद नरेंद्रनाथ ने संन्यास लिया और स्वामी विवेकानंद कहलाए। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज और देश के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया।

1893 में अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म सम्मेलन में दिए गए उनके भाषण ने उन्हें विश्व प्रसिद्ध बना दिया। उन्होंने भारतीय संस्कृति, वेदांत और योग को पूरी दुनिया में पहचान दिलाई। उन्होंने सभी धर्मों की एकता और मानवता के महत्व पर बल दिया।

स्वामी विवेकानंद शिक्षा को जीवन का आधार मानते थे। उनका मानना था कि शिक्षा से ही गरीबी, अज्ञान और सामाजिक बुराइयों को दूर किया जा सकता है। वे युवाओं को आत्मविश्वासी, मेहनती और निडर बनने की प्रेरणा देते थे।

4 जुलाई 1902 को स्वामी विवेकानंद का देहांत हो गया, लेकिन उनके विचार आज भी जीवित हैं। उनका जीवन हर छात्र को मेहनत, अनुशासन और सेवा की सीख देता है। वे सच्चे अर्थों में भारत के गौरव थे।

स्वामी विवेकानंद का जीवन और विचार छात्रों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक हैं। वे हमें आत्मविश्वास, शिक्षा और मानव सेवा का महत्व समझाते हैं। यदि विद्यार्थी उनके आदर्शों को अपनाएँ, तो वे न केवल अच्छे इंसान बन सकते हैं, बल्कि देश के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण भी कर सकते हैं।


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Content Writer

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